महान वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई Rani Lakshmi Bai
1857 की क्रांति की महानायिका महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस 18 जून के अवसर पर जनक्रांति 1857 की महान वीरांगनाः रानी लक्ष्मीबाई अरविन्द सीसौदिया शक्ति की अवतारी वीरांगना लक्ष्मी बाई मूलतःमहाराष्ट,सतारा जिले के ‘बाई’गांव के निवासी पिता -मोरोपंत तांबे, माता -भागीरथी देवी, बाल्यकाल स्थान-काशी ; गंगा तट जन्मतिथि - ज्यादातर जगह 19 नवम्बर और कुछ जगह 13 नवम्बर 1835,जाति - मराठा ब्राह्मण,बलिदान -18 जून 1858; कुछ पुस्तकों में 17 जून भी लिखा है। अंतिम संस्कारकर्ता -रघुनाथ सिंह, पठान गुल मोहम्मद और रामचन्द्रजी,बलिदान स्थल - स्वर्णनाला,ग्वालियर,अंतिम शब्द - ‘हर-हर महादेव’ ‘ऊं वासुदेवाय नमः’,गद्दार - झांसी का दीवान दुल्हाजु, अंतिम साथी - जूही, मुंदर, रघुनाथ सिंह पुत्र - दामोदर राव दत्तकपुत्र हिन्दू वीरांगनाओं की परम्परा भारतीय नारी की गौरव गाथा महामाया भगवती की अनन्य वीरता से प्रारम्भ होती है। बुद्धि के क्षैत्र में सरस्वती, अर्थ क्षैत्र में लक्ष्मी जी और शक्ति क्षैत्र में दुर्गा का सहज स्मरण हर हिन्दू को है। इसी वीरता, त्याग और बलिदान की परम्परा इस समाज...