मंगलवार, 22 मार्च 2011

मनमोहन सिंह से होली खेली नारद जी नें

मनमोहन सिंह की होली ...
- अरविन्द सिसोदिया 
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से होली खेलनें के लिए, नारद जी विशेष  यान से दिल्ली  पहुचे !
साथ में वे बहुत से दुर्लभ रंग भी लाये थे ..!! साथ में संगीत और होली के दुर्लभ गीतों को सुनानें के लिए मण्डली भी लाये थे ! 
मगर ये क्या ....., 
प्रधान मंत्री जी बहुत उदास  बैठे थे ..,
नारद जी को देख वे शिष्टाचार वश उठ कर खड़े हो गए .., सम्मान पूर्वक नारद जी को उच्च - आसन पर बिठाया ..! 
नारद जी ने अन्य बातों के बाद.., गूढ़ दृष्टी जब पी एम् पर डाली .., तो पी एम् ने सभी अन्य को वहां से चले जाने का इशारा करते हुए कहा एकांत..!
एकांत हो गया ...!! 
नारद जी ने कहा - उदासा कैसे हो जी ..
मन मोहन सिंह जी - आपतो जानते ही हैं की सोनिया जी बाहर हैं ...
नारद जी -तो क्या हुआ ....?
मनमोहन सिंह जी -उनकी इच्छा  के बिना में हँस नहीं सकता -  रो नहीं सकता..
प्रभु आपतो सब जानते हैं कि....!!!!!!
नारद जी - चलो हंसनें रोने कि बात छोडो ..रंग तो खेल लें ..यह तो अपनी संस्कृति है..
मनमोहन सिंह जी - आपकी आज्ञा  सर माथे पर .., पर मेरी सुनलें .. बेकार ही एक नई खबर बनेंगी ..
नारद जी - क्यों भई...
मनमोहन सिंह जी -सर आपका एक भी रंग नहीं चढ़ने वाला .. रंगों की  भी बेइज्जती होगी ..! आप के पास भी नकली रंग है यह एक नया मेसेज चला जाएगा ..! लोग  कहेंगे कि भगवान के यहाँ भी नकलची हैं .., नकली रंग बनाते / बेंचते हैं ..!
नारद जी - ऐसा कैसे हो सकता है ..? आप व्यर्थ में ही भ्रम पाल रहे हैं ..! 
मनमोहन सिंह जी -अजी में सही बोल रहा हूँ .., आज कल में ही मिडिया में हूँ , हर  बुरे को मुझ पर ही थोपा  जा रहा है जब की सारे मीडियो को मालूम हे कि बुरे का जिम्मेवार कौन है ......?
नारद जी - अजी बुरे भले को छोडिये .., अपन तो रंग खेलते हैं ...
मनमोहन सिंह जी - अजी छोडिये भी .., सुरेश कलमाडी का रंग , ए रजा का रंग , थामस का रंग , विकिलीक्स का रंग ..., हसन अली का रंग .., अजी देखते जाईये  कि आगे आगे होता क्या है .. की तर्ज पर कौन कौन  से रंग और देखना भाग्य में लिखा है...!!
नारद जी अत्यंत गंभीर हो कर सतर्क भी हो गए ...! अब गंभीरता मनमोहन सिंह के चहरे पर नहीं बल्की नारद जी के चहरे पर थी ..! वे बहुत गंभीरता से बोले - सच है यह पृथ्वी लोक है ..!
और नारद जी उठे और चले  गए.... जाते जाते बुदबुदा रहे थे ....कलमाडी का रंग , राजा का रंग , राडिया का रंग .., महंगाई  का रंग , भ्रष्टाचार का रंग .., विकिलीक्स का रंग .., भुखमरी का रंग .., बेरोजगारी का रंग ...थामस का रंग .. अजी भगवान ने तो सात रंग बनाये थे और नौ रत्न बनाये थे  .. मगर यहाँ तो रंगों के भी रंग है और नौ रत्न तो नौ लखा हैं ........नारद जी भी मनमोहन सिंह की बात मान कर चले गए ..भला भारत की जनता की क्या विसात जो यह उनकी बात नहीं मानें ...सच यही है की हर बदरंग के लिए मनमोहन पर राज करने वाली शक्ती ही तो जिम्मेवार है ..!     

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