पोस्ट

सितंबर 28, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

श्रीरामजन्म भूमि , बड़े राजनीतिक षड्यंत्र का पटाक्षेप

चित्र
श्रीरामजन्म भूमि  फैसला आना ही हितकर, ३० सितम्बर को ३.३० पर आयेगा  फैसला    - अरविन्द सीसोदिया                नई दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्‍या की श्रीरामजन्म भूमि विवादित जमीन से जुड़े मुकदमे पर फैसला सुनाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट को अनुमती  दे दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ३० सितम्बर को अपहरण ३.३० बजे फैसला सुनाएगा ! इस फैसले से जो भी पक्ष असंतुष्ट होगा वह सर्वोच्चा न्यायालय में अपील कर सकेगा !! इसी के साथ एक बड़ी राजनैतिक साजिस के तहत फैसला रोकने की दायर याचिका को निरस्त कर दिया गया है !! इस सुनवाई का इंतजार पूरा देश कर रहा था। याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एसएच कपाड़िया की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। तीन सदस्यीय इस पीठ ने सर्वसम्मति से यह याचिका खारिज की।     ये याचिका पूर्व नौकरशाह रमेशचंद्र त्रिपाठी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए दाखिल की थी। इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रमेशचंद्र की इस याचिका को खारिज करने के साथ ही उन पर 50000 रुपये का जुर्माना भी लगा दिया था। सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद रमेश चंद्र को

ईसा मसीह ; क्या भारतीय ज्ञान का प्रकाश

चित्र
ईसा मसीह की भारत यात्रा पर खोज हो....  - अरविन्द सीसोदिया  हमारे देश में अनेकों महान आत्मदर्शी हुए हैं , इनमें से एक रजनीश अर्थात ओशो हैं , उनके धरा प्रवाह भाषणों के आधार पर ६५० से भी अधिक पुस्तकें २० भाषाओं में छप चुकी हैं , उनकी एक पुस्तक "भारत : एक अनूठी संपदा "  है , उसमें उन्होंने ईसा मसीह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया है कि ईसा ज्ञान कि प्रकाश भारत से लेकर गए थे और उनकी मृत्यु भी भारत में ही हुई है !   -- यह संयोग मात्र ही नहीं है कि जब भी कोई सत्य के लिए प्यासा होता है , अनायास ही वह भारत में उत्सुक हो उठाता है , अचानक वह पूरब की यात्रा पर निकाल पड़ता है | और यह केवल आज की ही बात नहीं है | यह उतनी प्राचीन बात है जितने पुराने पुराण और उल्लेख मौजूद हैं | आज से पच्चीस सौ वर्ष पूर्व , सत्य की खोज में पाइथागोरस भारत आया था | ईसा मसीह भी भारत आए थे |  -- ईसा मसीह को तेरह से तीस वर्ष की उम्र के बीच का बाइबल में कोई उल्लेख नहीं है | - और यही उनकी लगभग पूरी जिन्दगी थी , क्योंकि तैंतीस की उम्र में तो उन्हें सूली पर ही चढ़ा दिया गया था | तेरह से तीस तक के सत्रह सालों का हि