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अक्तूबर 15, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विजय दसमी,भारत ५०० परमाणु बम बनाये..!

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- अरविन्द सीसोदिया   विजय दसमी..,  दशहरा ..,  रावण दहन ..,  रावण वध..,  इन्ही नामों से जाने जाना वाला यह त्यौहार , हमें एक ही सन्देश देता है कि बुराई पर अंततः जीत अच्छाई   की होती है.., जीत के लिए शक्ती भी चाहिए.., इसीदिन शक्ती की पूजा के रूप में शस्त्रों का पूजन भी होता है..! जो प्रतिवर्ष अपनी शस्त्र शक्ति का परिचय और पुर्ननिरिक्षण का अवसर देता  है ..! शक्ती की आवश्यकता पूर्ती का संकल्प करवाती है, योजना का निर्माण करवाती है !  याद रहे हम हमेशा शस्त्रों के मुकावले में पीछे रहने से ही हारे हैं.., तोपों और मशीन गनों ने हमें हराया  है..! हार शब्द ही बुरा होता  है.., हारने वाले कि कहीं भी पूजा नहीं होती.., जीत के लिए हमेशा ही आधुनिकतम शस्त्रों की जरूरत होती है.., शस्त्र पूजा यही आत्म निरिक्षण का अवसर देती है..!    भारतीय रक्षा संदर्भ बहुत ही कमजोर पक्ष है.., चीन से हार इसका उदाहरण  है, चीन के द्वारा लगातार सीमाएं दवाये जाना भी इसी कारण है..! इजराइल  ने शस्त्र  शक्ति में अपने आपको तेजस्वी रखा वह चार चार देशो को एक साथ हराता है..! अमरीका , रूस , ब्रिटेन फ्रांस सबके सब शस्त्र शक्ती मे

परमेश्वरी माँ जगदंम्वा : परब्रम्ह का ही स्वरूप

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- अरविन्द सीसोदिया     हमारे इस सम्पूर्ण जगत ,सृष्टि मण्डल की मूल अधिष्ठाता शक्ति , जिसने इसे जन्म दिया या निर्माण किया बनाया है वह एक ही ...! यह शब्द परमशक्ति माता भुवनेश्वरी के हैं , जो उन्होंने ; ब्रम्हा, विष्णु और महेश को सुनाये थे...!        कथानक इस प्रकार से है कि मधु - कैटभ युद्ध को लम्बे संघर्ष के उपरांत माँ जगदम्वे  की कृपा से जीता जाता है, उसी स्थान पर एकत्र ब्रम्हा , विष्णु, महेश को देवी का आदेश होता है कि सृजन , पालन और संहार के कार्यों को प्रमाद रहित हो कर वे करें...! तदुपरांत एक विमान उनके पास आता है जिसमें वे सवार होजाते हैं., वह विमान इन तीनों को लेकर स्वर्ग जैसे लोक में ले जाता हैं उनका स्वागत इंद्र जैसा कोई अधिष्ठाता  करता है..! इस के बाद वह विमान , ब्रम्ह लोक, विष्णु लोक और शिव लोक में जाता हर लोक में .., जिनमें यह तीनों अधिवाशी हैं , यह देख कर आश्चर्य होता है कि वहां उन लोकों के अधिष्ठाता यथा ब्रम्हा , विष्णु और महेश अपने अपने सहयोगियों  के साथ कार्य रत हैं...! इसके बाद में वह विमान इन्हें माता भुवनेश्वरी के मणिदीप लोक में पहुचता है , विमान से उतार कर ये तीनो