पोस्ट

दिसंबर 5, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

भ्रष्टाचार का तूफ़ान : सुनो सुनो अदालत कुछ कह रही है ...

इमेज
- अरविन्द सीसोदिया नीचे इलाहवाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंड पीठ के एक आदेश से जुडी दो खबरें हैं ...जिसमें न्यायालय ने बहुत जोर से भारतीय राजनीति और प्रशासन  तंत्र से खरी खरी कही है ...! इसे भारत के राष्ट्रपति , प्रधान मंत्री और गठबंधन सरकार की मुखिया को ध्यान देना चाहिए ..! विशेष कर उस समय जब सारा देश भ्रष्टाचार के तूफ़ान में डूबा जा रहा हो तब तो इन बेहतर आवाजों को ध्यान से सुना जाना चाहिए ...!  **** अनाज घोटाले पर अदालत सख्त लखनऊ, शनिवार, 4 दिसंबर 2010 इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पीठ ने अनाज घोटाले के मामले में कहा कि यदि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के मामले में मुकदमें के लिए तीन महीने में अनुमति नहीं देती है तो उसके लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। न्यायमूर्ति देवीप्रसाद सिंह ओर न्यायमूर्ति एस.सी.चौरसिया की खंडपीठ ने राज्य के मुख्य सचिव को आदेश दिया कि राज्य में हुए 35 हजार करोड़ रुपए के अनाज घोटाले समेत भ्रष्टाचार के ऐसे सभी मामले जिसकी सीबीआई अथवा राज्य की अन्य एजेंसी कर रही है और जिसमें अधिकारियों की संलिप्तता है उन पर मुकदमा चलाने की अनुमति तीन महीने के अंदर दें। खंडपीठ ने क

बाबू राजेन्द्र प्रशाद : सोमनाथ मंदिर और वन्देमातरम के सम्मान के लिए हमेशा याद रहेंगे

इमेज
- अरविन्द सीसोदिया         सोमनाथ मंदिर  और वन्देमातरम के सम्मान के लिए हमेशा  याद रहेंगे , बाबू राजेन्द्र प्रशाद जी.., ये वे कार्य थे जिन्हें उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरु की इच्छा के विरुद्ध करते हुए नैसगिर्क न्याय की रक्षा की थी ! सोमनाथ मंदिर शिव ज्योतिर्लिग स्थापना  सोमनाथ मंदिर शिव ज्योतिर्लिग है , महमूद गजनी से ओरंगजेब तक कितनी ही बार ध्वस्त किया गया ..! जब जूनागढ़ स्टेट का विलय भारत में हुआ , तब ९ नवंम्बर १९४७ को जूनागढ़ की जन सभा में केन्द्रीय गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने जनसभा में घोषणा की कि " सोमनाथ  शिव ज्योतिर्लिग मंदिर " का जहाँ पूर्व में था वहीं पुनः  निर्माण  होगा ! इस जनसभा में उनके साथ लोक निर्माण एवं पुनर्वास मंत्री वी एन गाडगिल भी थे , नेहरूजी की तमाम अडंगे बाजी के वाबजूद गांधी जी की अनुमति से सोमनाथ का पुनः  निर्माण  केन्द्रीय खाध्य  एवं कृषी मंत्री कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी कि अध्यक्षता में गठित कमिटी द्वारा किया गया ..! किन्तु सरदार पटेल का इस दौरान निधन हो चुका था , मंदिर के पूर्ण निर्माण के पश्चात् उसकी ज्योतिर्लिग प्राण प्रतिष्ठा के लिए ज