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राहुल गांधी : विकिलीक्स : अमरीकी गिरफ्त : धार्मिक वैमनस्य

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- अरविन्द सीसोदिया  विकिलीक्स के हो रहे खुलासों कि जद में अब कांग्रेस के राजकुमार भी आगये हैं , जो एक ८५ प्रतिशत हिन्दू बहुल देश के प्रधान मंत्री का ख़ाव सजाये हुए हैं ..और उसी समुदाय को बेवजह भयानक दोषों के लिए गरिया रहे हैं..?   ....और अब यह भी पाता लग गया है कि कांग्रेस के कई नेता गण बार बार हिन्दुओं को आतंकवादी क्यों कह रहे थे .. चाहे वे दिग्विजय सिंह हों या चिदम्बरम हों या प्रणव हों .... क्यों कि यह गाइड लाइन राहुल गांधी कि तय कि हुई थी ...! राहुल को यह गाइड लाइन किसके द्वारा तय करवाई इसके लिए हमें भारत के बाहर उन ताकतों की और संदेह करना होगा जिनके सम्पर्क में राहुल हो सकते हैं ...! ...जांच की बात यह है कि राहुल ने २६ / ११ के इतनें भयानक मुम्बई हमले की छाया में भी इस्लामिक आतंकवाद या पाकिस्तान के प्रति कड़ी प्रतिक्रिया के बजाये सामान्यतः शांत हिन्दू सम्प्रदाय की आलोचना क्यों की ...? जबकी उनके ही  दल की  राज्य सरकार ने इस हमले को पाकिस्तान प्रेरित आतंकवादी हमला करार दिया था ..! कुछ समय के लिए पाकिस्तान के उस गाँव से लाइव तेली कास्ट भी हुआ था जिसका रहने वाला कसाव था..! बाद में ह

कांगेस का असली साम्प्रदायिक चेहरा

- अरविन्द सीसोदिया       मेरी लगातार यह मान्यता रही है कि पंडित जवाहर लाल नेहरु के समय से ही कांग्रेस ने साम्रदायिकता की राजनीति कि है और हमेशा ही अंग्रेजों  कि तरह हिन्दू - मुस्लिम को आपस में मुर्गों की तरह लड़ा कर रखने की कोशिश कि है ! कुल मिला कर फूट डालो राज करो की नीति ही कांग्रेस कि राजनीति है जो देश के लिए लगातार दुर्भाग्यशाली साबित हो रही है !  साम्प्रदायिकता के आधार पर देश का विभाजन स्वीकार करने वाला और अपनी सत्ता के लिए देश पर आपातकाल थोपने वाला यह दल सिर्फ और सिर्फ वोट बैंक की राजनीति में किसी भी स्तर तक गिर सकता है..! नीचे दी गई खबर को पढ़ें यह भारत के नहीं अमरीकी राजदूत का आकलन है ..........          वॉशिंगटन । विकिलीक्स पर जारी अमेरिका के एक गोपनीय दस्तावेज में अल्पसंख्यक मामलों के पूर्व मंत्री ए. आर. अंतुले के विवादास्पद बयान का हवाला देते हुए कहा गया है कि मुंबई हमले के बाद कांग्रेस पार्टी का एक वर्ग, धर्म पर आधारित राजनीति करते नजर आया था । यह दस्तावेज 23 दिसंबर, 2008 को नई दिल्ली में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत डेविड मलफोर्ड ने अपने देश के विदेश विभाग को भेजा था। इस दस्ताव