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शैम...शैम....; कांग्रेस का राष्ट्र विरोधी चेहरा फिरसे उजागर

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  - अरविन्द सीसोदिया           कांग्रेस का राष्ट्र विरोधी और घोर  साम्प्रदायिक चेहरा फिरसे उजागर हुआ है , इस वार यह यह भाजपा या संघ परिवार के द्वारा नहीं , बल्कि  अमरीकी ख़ुफ़िया गिरी के विकीलीक्स पर लीक दस्तावेत से सामने आया है ...! जिस कांगेस नें महात्मा गांधी और इंदिरा गांधी के हत्यारों को बहुत कम समय में फांसी दे दी .., उसी कांग्रेस  ने भारतीय संसद पर हमले के लिए जिम्मेवार अफजल गुरू की फांसी लगातार इसा तरह से टली मानों , संसद पर हमले ये स्वंय शामिल हों .....! कांग्रेस के इस राष्ट्र विरोधी कार्य की कड़ी से कड़ी निदा की जानी चाहिए ...!  खबर ........ नई दिल्ली। 2001 में संसद पर हमले के मामले में दोषी अफजल गुरू की फांसी का मामला एक बार फिर भारतीय राजनीति को गरमा सकता है। विकीलीक्स ने अफजल गुरू की फांसी के मामले को लेकर सनसनीखेज खुलासा किया है। विकीलीक्स के गोपनीय दस्तावेजों के मुताबिक कांग्रेसी नेता व मौजूदा केन्द्रीय मंत्री गुलान नबी आजाद ने अफजल गुरू को दया याचिका मंजूर किए जाने के लिए भारी दबाव बनाया था। 2006 में नई दिल्ली स्थित अमरीकी दूतावास की ओर से वॉशिंगटन भेजे गए

न्यायलय तुम देश बचाओ जनता तुम्हारे साथ हैं ..

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- अरविन्द सिसोदिया  .........इस समय देश में लूटपाट का हमला चल रहा है ...इस आक्रमण से मुकवाला करनें में प्रतिपक्ष भी उतना कारगर जितनें की आवश्यकता है ..! केंद्र की सरकार नें कई दलों को आय से अधिक संपत्ति के मामलों में सीबीआई से बाँध दिया है सो वे भी सरकार के परोक्ष गुलाम बन गए  हैं ..! इस स्थिति में भारतीय न्यायपालिका ने ही देश हित में कुछ कदम उठाये हैं ..! उन्हें भी रोकनें के लिए कांग्रेस ने यह बात चल वाई है की न्यायपालिका अति सक्रीय है ..., जब की सच यह है कि देश के साथ लूट पात की अति सक्रियता  है..! प्रधान मन्त्र के विभाग से एस बैंड स्पेक्ट्रम घोटाला हो जाये और त्यागपत्र की जगह मात्र साफ सफाई से रफा दफा किया जाये ...! एक नहीं .. लगातार असंवैधानिक गतिविधियों में सरकार लिप्त हो तो कौन उसे रोकेगा ..? जबकि आधा विपक्ष बंधक बन चुका हो ..? अतः न्यायलय की सक्रियता आवश्यक है ...इसका स्वागत होना चाहिए ..! न्यायलय तुम देश बचाओ जनता  तुम्हारे साथ हैं .. यह नारा देश में गूंजना चाहिए ..!.........देखिये न्यायपालिका को दवाब में लेने की कोशिस की दो रिपोर्टें ..... १******** http://www.samaylive.com/

बस होली है...होली है ...

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रचना, लेखन एवं प्रस्तुति, प्रो. अश्विनी केशरवानी ‘‘ राघव ’’  डागा कालोनी, चाम्पा-495671 ( छत्तीसगढ़ ) http://rainbownews.in/ent.php?nid=488   होली  हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम उनकी त्योहारों और पर्वो में दिखाई देता है। इन पर्वो में न जात होती है न पात, राजा और रंक सभी एक होकर इन त्योहारों को मनाते हैं। सारी कटुता को भूलकर अनुराग भरे माधुर्य से इसे मनाते हें। इसीलिए होली को एकता, समन्वय और सदभावना का राष्ट्रीय पर्व कहा जाता है। होली के आते ही धरती प्राणवान हो उठती है, प्रकृति खिल उठती है और कवियों का भावुक नाजुक मन न जाने कितने रंग बिखेर देता है अपनी गीतों में। देखिये इसकी एक बानगी पेश है:-     होली का त्योहार मनायें    ले लेकर अबीर होली में    निकलें मिल जुलकर टोली में    बीती बातों को बिसराकर    सब गले मिलें होली में    पिचकारी भर भरकर    सबको हंसकर तिलक लगायें    आओं मिलकर होली मनायें।    गांवों में बसा हमारा भारत ग्राम्य संस्कृति में घुले मिले रचे बसे लोग मांगलिक प्रसंगों पर लोकगीत गाकर वातावरण को लुभावना बना देते हैं। गांवों में नग

होली है भई होली है ......

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- अरविन्द सिसोदिया  कुल मिला कर होली के इस त्यौहार पर हम ईर्ष्या रूपी होलिका को जलादें .. तभी इस  त्यौहार  की सार्थकता है ..! अवध की होली और राम का चरित्र  होली राग रंग से भरा ऐसा उल्लास पर्व है जिसका धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय महत्व है। इसमें भारतीय जनमानस का स्वाभाविक व्यक्तित्व झलकता है। हालाँकि यह पर्व प्राचीन काल से आज तक अनेक रूपों में विकसित हुआ है फिर भी हर्ष, उल्लास और उत्सवधर्मिता में कभी कोई कमी नहीं आई। अवध राम की जन्म स्थली और क्रीड़ा स्थली रही है। उनकी यशोगाथा से भरे अवधी लोकगीतों में लोकमानस की भावनाएँ, आशाएँ, आकांक्षाएँ व कामनाएँ परिलक्षित होती है। इस परिप्रेक्ष्य में डाक्टर महेश अवस्थी द्वारा संपादित 'लोकगीत रामायण' में संकलित लोकगीतों में राम से संबंधित होली का सहज चित्रण देखने को मिलता है। होली के मादक रंग में रंगे हुए चारो भाइयों के होली खेलने का यह दृश्य लोकजीवन और लोकप्रेम की सुरम्य झाँकी प्रस्तुत कर रहा है : अवध माँ होली खेलैं रघुवीरा। ओ केकरे हाथ ढोलक भल सोहै, केकरे हाथे मंजीरा। राम के हाथ ढोलक भल सोहै, लछिमन हाथे मंजीरा। ए केकरे