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विश्वकर्मा पूजा विशेष: भारत के परम्परागत शिल्पकार

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यह लेख बहुत ही अच्छा और प्रयास पूर्वक लिखा गया है । इसे अवश्य पढ़ें ......... हमनें तो जनता तक धिक् से अधिक बात पहुचने के लिए इसे यहाँ लिया है ........ विश्वकर्मा पूजा विशेष: भारत के परम्परागत शिल्पकार --------- ललित शर्मा http://lalitdotcom.blogspot.in/2012/09/blog-post_17.html   ब्लॉ.ललित शर्मा, सोमवार, 17 सितम्बर 2012 ज हाँ पर मानव सभ्यता के विकास का वर्णन होता है वहां स्वत: ही तकनीकि रुप से दक्ष परम्परागत शिल्पकारों के काम का उल्लेख होता है। क्योंकि परम्परागत शिल्पकार के बिना मानव सभ्यता, संस्कृति तथा विकास की बातें एक कल्पना ही लगती हैं। शिल्पकारों ने प्राचीन काल से लेकर वर्तमान तक विभिन्न स्वरुपों में (लोहकार, रथकार, सोनार, ताम्रकार, शिल्पकार-वास्तुविद) अपने कौशल से शस्य श्यामला धरती को सजाने में कोई भी कसर बाकी नहीं रखी। समस्त एषणाओं से परे एक साधक की तरह परम्परागत शिल्पकार अपने औजारों के प्रयोग से मानव जीवन को सरल-सहज एवं सुंदर बनाने का उद्यम कर रहे हैं। आज समस्त सृष्टि जिस सुवर्ण रुप में दृष्टिगोचर हो रही है वह हमारे परम्परागत शिल्पकारों के खून पस