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रॉबर्ट वाड्रा जमीन सौदे के मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में हंगामा

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  रॉबर्ट वाड्रा जमीन सौदे के मुद्दे पर  संसद के दोनों सदनों में हंगामा भाषा | Mar 12, 2013, नई दिल्ली।। यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा एक जमीन सौदे में शामिल होने के आरोप पर मंगलवार को संसद की कार्यवाही रोकनी पड़ी। लोकसभा और राज्यसभा, दोनों की कार्यवाही को एक बार स्थगित करने के बाद दोपहर 2 बजे के लिए स्थगित कर दिया गया। बीजेपी के सदस्य मामले की जांच की मांग को लेकर स्पीकर के पास आकर नारेबाजी करने लगे थे। मंगलवार को लोकसभा में श्रीलंकाई तमिलों की दुर्दशा और इटली के नाविकों समेत कई मुद्दे उठे, लेकिन वाड्रा से जुड़ा मुद्दा सब पर हावी रहा। जिस वक्त लोकसभा में बीजेपी के सदस्य इस मुद्दे को लेकर हंगामा कर रहे थे, सोनिया गांधी भी सदन में मौजूद थीं। बीजेपी सदस्यों के हाथ में प्लेकार्ड था, जिन पर लिखा था- 'वित्त मंत्री! दामाद का फॉर्यम्युला अपनाइए, घर बैठे कमाइए और घाटा घटाइए।' बीजेपी ने राजस्थान में वाड्रा से जुड़े जमीन के सौदे में कथित अनियमितताओं के बारे में चर्चा कराने के लिए दोनों ही सदनों में प्रश्नकाल स्थगित करने का नोटिस दिया था। खबरों के मुताबिक र

कोयला आवंटन में गड़बड़ी हुई : सुप्रीम कोर्ट

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        अब प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह को ही बताना है कि यह घोटाला क्यों और किसके लिए ................... CBI ने कोर्ट से कहा, कोयला आवंटन में गड़बड़ी हुई एबीपी न्यूज़ ब्यूरो Tuesday, 12 March 2013 नई दिल्ली: कोयला घोटाले को लेकर सीबीआई ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि खदानों के आवंटन का कोई आधार नहीं था और कोयला आवंटन में गड़बड़ी हुई है. सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि कोयला ब्लॉक्स के आवंटन के वक़्त कंपनियों की सही तरह से जांच भी नहीं की गई. इसके बाद कोर्ट ने सीबीआई से कहा है कि वो इस केस की जांच रिपोर्ट सरकार को नहीं बल्कि सीधे कोर्ट को दे. इसके बाद सरकार की ओर से इस पर आपत्ति भी जताई गई है. सीबीआई की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जानना चाहा है कि आखिर क्यों छोटी कंपनियों को कोयला के खदान आवंटित किए गए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब बड़ी संख्या में बड़ी कंपनियों ने भी आवेदन दिया था तो कैसे जिसे चाहा उसे ब्लॉक्स आवंटित कर दिए गए. ग़ौरतलब है कि सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि साल 2004 से 2009 के बीच कोयला आवंटन में भारी गड़बड़ी हुई है और इसमें सरकार

इन्होने जाना संघ क्या है ....?

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अवश्य पढ़े पूरा लेख -पांचजन्य इन्होंने जाना सं घ क्या है....? तुष्टीकरण की नीति के चलते इस्लामी आतंकवाद के समानांतर भगवा आतंकवाद का जुमला सोनिया कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने उछाला और चिदम्बरम ने स्थापित करने की कोशिश की। गांधी की कांग्रेस से सोनिया की कांग्रेस तक की यात्रा में इतना अंतर आया कि गांधी जी ने संघ के शिविर को देखकर कहा कि ऐसा अच्छा दृश्य कहीं नहीं दिखा, तो आज सोनिया कांग्रेस के गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे को संघ के शिविरों में आतंकवाद का प्रशिक्षण मिलता दिख रहा है। रा.स्व.संघ के संस्थापक डा. केशव बलिराम हेडगेवार एक क्रांतिकारी तथा कांग्रेस के संगठक रहे थे। उन्होंने गांधी जी के आह्वान पर असहयोग आंदोलन तथा 1931 में जंगल सत्याग्रह में भाग लिया तथा जेल भी गए। ब्रिटिश गुप्तचरों की सूची में उनका नाम मध्य भारत- 114 नम्बर पर दिया गया है। संघ के इतिहास में उसके स्वयंसेवकों का पहला प्रशिक्षिण शिविर 1927 में लगा था, जो दो महीने का था। 1937 से प्रांतों में प्रशिक्षिण शिविर प्रारंभ हुए तथा उस वर्ष लाहौर, पूना तथा नागपुर में शिविर लगे। 1940 में केवल असम, उड़ीसा तथा जम्

लुप्त सरस्वती नदी के संदर्भ में प्रकाशित शोध

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लुप्त सरस्वती नदी के संदर्भ में इंडिया टुडे ६ मार्च २० १ ३ के अंक में प्रकाशित शोध पाताल में मिला सरस्वती का पता और भी... http://aajtak.intoday.in/story/muse-muse-detected-in-the-hell-did-1-724211.html नई दिल्‍ली, 11 मार्च 2013 पीयूष बबेले | सौजन्‍य: इंडिया टुडे —साथ में राम प्रकाश मील और विमल भाटिया कालीबंगा के मिट्टी के टीले खामोश खड़े हैं. अगर लोहे की काली सलाखों वाली बड़ी-सी चारदीवारी में इन्हें करीने से सहेजा न गया हो, तो यह एहसास करना कठिन है कि हम पुरखों की उस जमीन पर खड़े हैं, जहां कभी सरस्वती-सिंधु की नदी घाटी सभ्यता सांस लेती थी. मिट्टी के इन ढूहों के पीछे गेहूं के लहलहाते खेत हैं. बगल में पुरातत्व विभाग के बोर्ड पर खुदा नक्शा याद दिलाता है कि इन टीलों को घेरकर कभी सरस्वती नदी बहा करती थी और आज उसी के बहाव क्षेत्र में 21वीं सदी की फसल लहलहा रही है. वैसे तो आज भी बरसात के मौसम में यहां से एक छोटी-सी नदी घग्घर कुछ दिन के लिए बहती है, लेकिन उस महानदी के सामने इस बरसाती पोखर की क्या बिसात, जिसकी गोद में कभी दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक फल-फूल