पोस्ट

अप्रैल 19, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

फिर अकेले मोदी ही 'राक्षस' क्यों..?- मधु पूर्णिमा किश्‍वर

इमेज
Mahesh Girase/ facebook फिर अकेले मोदी ही 'राक्षस' क्यों..? -मधु पूर्णिमा किश्‍वर ( लेखिका जानीमानी समाजविज्ञानी हैं) फरवरी 2002 में जब हिंसक दंगों से गुजरात के कुछ हिस्से कांप उठे, तब मैंने भी राष्ट्रीय मीडिया और अपने सक्रिय प्रतिभागी मित्रों के विवरण को स्वीकार कर लिया और मान लिया कि वर्ष 2002 के दंगों में मोदी भी लिप्त थे। इस कारण से मैंने भी मोदी के खिलाफ बयानों पर हस्ताक्षर कर दिए और मानुषी में उन लेखों को छापा, जिनमें गुजरात सरकार को दोषी ठहराया गया था। हमने भी दंगा पीडि़तों के लिए फंड इकट्‍ठा किया। लेकिन, मैं अपने नाम से कुछ भी लिखने से बचती रही क्योंकि मुझे गुजरात जाने, वहां अनुभव लेने और स्वयं स्थिति को जांचने का मौका नहीं मिला था। मेरे पहले के विभिन्न दंगों को कवर करने के अनुभव और कश्मीर तथा पंजाब में हिंसक संघर्ष की स्थितियों ने मुझे सिखा दिया था कि ऐसे मुद्‍दों पर सुनिश्चित रुख तय करने से पहले मीडिया की रिपोर्टों पर भरोसा नहीं किया जा सकता है क्योंकि ये आमतौर पर लेखक की विचारधारा के रंग से रंगी होती हैं। इसलिए मैंने गुजरात पर कोई बयान देने से खुद को रोक

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो -मीरा

इमेज
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो .. वस्तु अमोलिक दी मेरे सतगुरु किरपा करि अपनायो . जनम जनम की पूंजी पाई जग में सभी खोवायो . खरचै न खूटै चोर न लूटै दिन दिन बढ़त सवायो . सत की नाव खेवटिया सतगुरु भवसागर तर आयो . मीरा के प्रभु गिरिधर नागर हरष हरष जस गायो .