आध्यात्मिक देवत्व का अभिवादन गुरु पूर्णिमा पर्व - अरविन्द सिसोदिया
गुरू पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व भारत में अनादिकाल से समाज की रक्षा करनें के लिये राजा की व्यवस्था रही है तो समाज को दिशा देनें के लिये आध्यात्मिक साधु , संतो ,ऋषियों , मुनियों की एक सतत परम्परा भी रही है। जो शासन से भी अधिक समाज में आदरणीय हुआ करती थी और गलत बात पर राजा को भी टोकनें का साहस रखा करती थी ! वह शासन का अंग होकर भी शासन से दूर आत्म चिन्तन के द्वारा निरंतर लोक कल्याण में अपना जीवन खपा देती थी। उसी परम्परा से आज भी लाखों लोग समाज का मार्गदर्शन कर रहे है। जिसका मूल आध्यात्मिक जीवन है। इस तरह से गुरूजनों के अभिवादन , अभिनंदन का पर्व अषाढ़ की गुरूपूर्णिमा है। Spiritual significance of Guru Purnima Since time immemorial, India has had the system of kings to protect the society and there has also been a continuous tradition of sadhus, saints, Rishi and munis to give direction to the society. They used to be more respected in the society than the government and had the courage to rebuke the king even when he did s...