मेरी दृष्टि में नरेन्द्र मोदी "शबरी के श्रीराम " हो गये
मेरी दृष्टि में नरेन्द्र मोदी जी "शबरी के श्रीराम " हो गये । निश्चित ही मेरे इन शब्दों का अर्थ अतिरेक के रूप में निकाला जाएगा । अन्यथा भी लिया जायेगा । मगर मुझे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मेरी संस्कृति देती है। इसलिये जो मुझे कहना है, में कहूंगा । ये मेरे अंतर्मन की आवाज है। जिस दिन वनवासी समाज के अत्यंत साधारण स्वरूप वाली विधवा महिला श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को विश्व की सबसे बडी राजनीतिक पार्टी भाजपा ने महामहिम राष्ट्रपति के पद हेतु चयन किया, उन्हे महामहिम राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाया। इस दिन भारत माता ने सबसे ज्यादा गर्वित हुई और उसनें असीम आर्शीवाद भाजपा नेतृत्व को दिया,विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को,जिनकी बिना सहमति के यह संभव नहीं था। यह भाजपा ही है जिसमें भारतीय संस्कृति के अन्त्योदय अर्थात अंतिम व्यक्ति तक को सम्मान और उत्थान के भाव की पूर्ति का लक्ष्य निहित है। अर्थात भाजपा का भी सम्मान विश्व में कई गुणा बडा है। एक कविता : - आप मुर्मूजी को राष्ट्रपति बना कर,भारत का पैग़ाम हो गये। मेरी दृष्टि में नरेंद्र मोदी “शबरी के श्रीराम“ हो गये। अपना देश, करोडों वर्षों...