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हनुमान चालीसा : चमत्कारी सिद्धियां Hanuman Chalisa

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हनुमान चालीसा  विश्व में सबसे ज्यादा पढ़़ी जाने वाली स्तुति है,प्रार्थना है,कविता है।     श्री हनुमान जी की भक्ति से मिलती हैं ये 8 चमत्कारी सिद्धियां  रुद्र अवतार श्री हनुमान जी, सिद्धि और बल के अधिपति देवता हैं। यही कारण है कि वह संकट मोचक कहलाते हैं। विपत्तियों से रक्षा के लिए श्री हनुमान का स्मरण और उपासना बेहद प्रभावी मानी जाती है। इसी कामना से श्री हनुमान की भक्ति और प्रसन्नता के लिए बोली जाने वाली सबसे लोकप्रिय स्तुति है गोस्वामी तुलसीदास द्वारा बनाई गई श्री हनुमान चालीसा है। इसी चालीसा में एक चौपाई आती है। जिसमें श्री हनुमान को आठ सिद्धियों का स्वामी बताया गया है। यह चौपाई है -  अष्टसिद्धि नव निधि के दाता। अस बर दीन्ह जानकी माता।। अक्सर, हर हनुमान भक्त चालीसा पाठ के समय इस चौपाई का भी आस्था से पाठ करता है। इस चौपाई के अनुसार यह अष्टसिद्धि माता सीता के आशीर्वाद से श्री हनुमान को मिली और साथ ही उनको इन सिद्धियों को अपने भक्तों को देने का भी बल प्राप्त हुआ। लेकिन, क्या आप जानतें हैं - कौन-सी हैं ये अष्टसिद्धियां?  नहीं, तो जानिए, इन आठ सिद्...

शिवसेना,संविधान छोड,सड़क पर ! यही तो लोकतंत्र का अपमान है - अरविन्द सिसौदिया shivsena

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  शिवसेना,संविधान छोड,सड़क पर ! यही तो लोकतंत्र का अपमान है - अरविन्द सिसौदिया  शिवसेना पर बहूमत है तो फलोर टेस्ट की बात क्यों नहीं करते ? शरद पंवार तो चाहते ही यही है कि शिवसेना समाप्त हो, उनका विकास हो। ---- अन्ततः वही हुआ जिसका इंतजार था। शिवसेना के विधायक एवं सांसद तो पार्टी से नाराज होकर कोप भवन में बैठें है। उन्हे मनाने और पार्टी को संभालनें के बजाये। अपने ही विधायकों एवं सांसदों के खिलाफ शिवसेना नेतृत्व सडकों पर निबंट लेने की धमकी पर आ गया है। तोड फोड प्रारम्भ होनें वाली है। घरों पर आक्रमण होंगे । शिवसेना का यह स्वरूप पत्थरबाजों से ही मिलता माना जायेगा। लोकतंत्र में नम्बर गेम चलता है। आज तक की स्थिती में शिवसेना के हाथ से विधानसभा निकल चुकी है। उनके अधिकांश विधायक उन्हे छोड गये हैं। जिस तरह एन टी रामाराव को छोड चन्द्रबाबू नायडू को नेता चुना गया था, लगभग वही महाराष्ट्र में होनें जा रहा है। वहीं असली शिवसैनिक भी हिन्दुत्व छोड कर कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस की गुलामी कर ही नहीं सकता। आधी शताब्दी की संर्घष यात्रा , विचारधारा के विपरीत कैसे परिवर्तित हो सकती है। हनुमान च...

हनुमान चालीसा Hanuman Chalisa

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  हनुमान चालीसा लेखक    गोस्वामी तुलसीदास भाषा    अवधी हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा पढ़ते श्रद्धालु हनुमान चालीसा अवधी में लिखी एक काव्यात्मक कृति है जिसमें प्रभु राम के महान भक्त हनुमान के गुणों एवं कार्यों का चालीस चौपाइयों में वर्णन है। यह अत्यन्त लघु रचना है जिसमें पवनपुत्र श्री हनुमान जी की सुन्दर स्तुति की गई है। इसमें बजरग बली‍ की भावपूर्ण वन्दना तो है ही, श्रीराम का व्यक्तित्व भी सरल शब्दों में उकेरा गया है। 'चालीसा' शब्द से अभिप्राय 'चालीस' (40) का है क्योंकि इस स्तुति में 40 छन्द हैं (परिचय के 2 दोहों को छोड़कर)। हनुमान चालीसा भगवान हनुमान को प्रसन्न करने के लिए उनके भक्तों द्वारा की जाने वाली प्रार्थना हैं जिसमें 40 लाइनें होती है इसलिए इस प्रार्थना को हनुमान चालीसा कहा जाता है इस हनुमान चालीसा को तुलसीदास जी द्वारा लिखा गया है जिसे बहुत शक्तिशाली माना जाता है। इसके रचयिता गोस्वामी तुलसीदास हैं।दोहा श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं प...

हनुमान चालीसा hanuman chalisaa की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने जेल में की थी

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  हनुमान चालीसा की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने जेल में की थी हनुमान चालीसा की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी और इसकी रचना किसी आश्रम में या दरबार में नहीं की गई थी. हनुमान चालीसा की रचना मुगल शासक अकबर की जेल में हुई थी. आप शायद ही जानते होंगे कि हनुमान चालीसा जेल में लिखी गई थी... * हनुमान चालीसा कब लिखा गया क्या आप जानते हैं। नहीं तो जानिये, शायद कुछ ही लोगों को यह पता होगा?* *पवनपुत्र हनुमान जी की आराधना तो सभी लोग करते हैं और हनुमान चालीसा का पाठ भी करते हैं, पर यह कब लिखा गया, इसकी उत्पत्ति कहाँ और कैसे हुई यह जानकारी बहुत ही कम लोगों को होगी।* *बात 1600 ईस्वी  की है यह काल अकबर और तुलसीदास जी के समय का काल था।* *एक बार तुलसीदास जी मथुरा जा रहे थे, रात होने से पहले उन्होंने अपना पड़ाव आगरा में डाला, लोगों को पता लगा कि तुलसीदास जी आगरा में पधारे हैं। यह सुन कर उनके दर्शनों के लिए लोगों का ताँता लग गया। जब यह बात बादशाह अकबर को पता लगी तो उन्होंने बीरबल से पूछा कि यह तुलसीदास कौन हैं।* *तब बीरबल ने बताया, इन्होंने ही रामचरित मानस का अनुवाद किया है, यह रामभक्त तुलसीदास...