बुधवार, 23 फ़रवरी 2011

2 जी : अंडरवल्र्ड डॉन दाउद इब्राहिम



 
- अरविन्द सिसोदिया 
अब जांच जे पी सी के पास जानें वाली है और उसे सबसे पहले यह यह जांच करनी चाहिए की २ जी स्पेक्ट्र घोटाले का संबंध अंडरवल्र्ड डॉन दाउद इब्राहिम की 'डी' कंपनी से क्या है ....?देश की आंतरिक व्यवस्था में गहरा असर अंडरवल्र्ड का है , ख़ास कर मुम्बई और फिल्म जगत पर ....!!!! मगर यह हाथ देश की संसद के अन्दर और केंद्र की सरकार में भी पहुच गए तो यह गंभीर चिंता का विषय होगी ..!! सबसे पहले इसी विषय पर जांच होनी चाहिए ..!! गाथा बंधन सरकार की मजबूरी  अंडरवल्र्ड डॉन दाउद इब्राहिम की 'डी' कंपनी  का गुलाम देश को बनती है तो इसा तरह की गठबंधन सरकार नहीं चाहिए...!! 
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राजस्थान पत्रिका का आलेख ....
' डी ' कंपनी का खेल
http://www.rajasthanpatrika.com/news/INDIA/2132011/india%20news/121290मुम्बई।
2जी स्पेक्ट्रम घोटाला सिर्फ पैसे की लूट न होकर अब देश की सुरक्षा से जुड़ गया है। सीबीआई द्वारा हिरासत में लिए गए स्वान टेलीकॉम के डायरेक्टर शाहिद बलवा से मिले दस्तावेजों में कुछ अहम सुबूत मिले हैं, जो इस घोटाले में अंडरवल्र्ड डॉन दाउद इब्राहिम की 'डी' कंपनी के शामिल होने के संकेत दे रहे हैं।  इस खुलासे ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, बलवा और 'डी' कंपनी का खासा कनेक्शन है। बलवा अंडरवल्र्ड का पैसा हिंदुस्तान के शेयर बाजार में लगाता है।

22 हजार करोड़ का चूना लगाया देश को
इतना ही नहीं, बलवा ने दिल्ली की एक नामी रियल एस्टेट कंपनी के साथ देश को 22 हजार करोड़ से भी ज्यादा का चूना लगाया है। ये खुलासा सीबीआई ने अपनी 6 पेजों वाली एफआईआर में किया है। सूत्र बताते हैं कि सीबीआई के पास इस पूरे खेल के सूत्रधार का भी नाम है, मगर इसका खुलासा अभी नहीं करेगी।
बलवा-दाउद कनेक्शन
सूत्रों ने बताया कि सीबीआई को टेलीकॉम घोटाले से जुड़े लोगों की छापेमारी के दौरान बलवा के खिलाफ अहम सबूत हाथ लगे हैं। इन दस्तावेजों में बलवा की कंपनी स्वान टेलीकॉम और यूएई की एतिसलात कंपनी के बीच समझौते का जिक्र है। एतिसलात कंपनी को बलवा ने अपनी कंपनी स्वान टेलीकॉम में 45 फीसदी हिस्सेदारी बेची।
 एतिसलात का अच्छा खासा स्टेक पाकिस्तान टेलीकॉम कॉर्पाेरेशन लि. में है, जो वर्तमान में आईएसआई की निगरानी में है। हिस्सेदारी बेचने का बलवा का एक ही मकसद था। वह दुबई में बैठे उन लोगों को पैसे पहुंचाना चाहता था, जिनका पैसा पिछले कई सालों से वो अपने रियलिटी के धंधे में लगा रहा था।
राजा का खासमखास
इस एफआईआर में कहा गया है कि बलवा पूर्व दूरसंचार मंत्री और 2जी घोटाले के मुख्य आरोपी ए. राजा का सबसे खासमखास था। वह न केवल राजा के पैसों को देश और विदेश में इनवेस्ट करता था, बल्कि जिस समय वो टू जी स्पेक्ट्रम के लाइसेंस को हासिल करने की जुगत में था। उस वक्त विदेश में बैठे संदिग्ध शख्स ने उसे पैसे भी उपलब्ध कराए थे।
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राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलू भी खंगालें: 
सीबीआई से जज ने कहा कि जांच एजेंसी को याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मसलों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘यह पता लगाना आपका (सीबीआई) काम है कि 2जी घोटाले से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे का कोई पहलू तो नहीं जुड़ा है।’ मामले में अगली सुनवाई 8 मार्च को होगी।

याचिका में खतरे का अंदेशा:
स्वामी ने अपनी याचिका में बताया है, ‘2जी लाइसेंस हासिल करने वाली स्वान टेलीकॉम और यूनीटेक वायरलेस ने अपनी हिस्सेदारी विदेशी कंपनियों इत्तिस्लात और टेलीनोर को बेची है। इन दोनों कंपनियों का संपर्क पाकिस्तान से भी हैं। इनको लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई थीं।’

कौन है शहीद बलवा 
(बी बी सी हिंदी से विनीत खरे की रिपोर्ट ...)
http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/02/110209_balwa_profile_skj.श्त्म्ल
 देश की प्रमुख रियल इस्टेट कंपनी डीबी रिऐल्टी के मैनेजिंग डॉयरेक्टर शाहिद उस्मान बलवा को दो दिनों के ट्रांज़िट रिमांड पर जाँच एजेंसी सीबीआई को दे दिया गया है.
उन्हें सीबीआई दिल्ली ले आई है जहाँ उनसे 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले के बारे में पूछताछ की जाएगी.
बलवा की कंपनी डीबी रिऐल्टी ने स्वान टेलीकॉम नाम की कंपनी शुरू की थी जिसने 13 सर्कल्स के स्पेक्ट्रम के लिए 1537 करोड़ रुपए सरकार को दिए, लेकिन कुछ ही समय में कंपनी के 45 प्रतिशत शेयर संयुक्त अरब अमीरात की कंपनी एटियालसेट को 4500 करोड़ रुपए में बेच दिए.
आरोप है कि इस घोटाले से सरकार को करोड़ों की चपत लगी और कथित तौर पर ये सब पूर्व टेलीकॉम मंत्री ए राजा की मदद से हुआ. कंपनी का नाम एटियालसेट डीबी टेलीकॉम प्राईवेट लिमिटेड रख दिया गया.
बलवा की गिरफ़्तारी की खबर से मुंबई में रियल एस्टेट कंपनियाँ सकते में हैं.
डीबी रिऐल्टी देश की तीसरी सबसे बड़ी रिएल इस्टेट कंपनी है. कंपनी की वेबसाईट के मुताबिक उसके पास मुंबई और पुणे में 30 बड़े प्रोजेक्ट हैं जो पूरे होने के विभिन्न चरणों में हैं. वेबसाईट के मुताबिक कंपनी की बाज़ार में कीमत 2.2 अरब अमरीकी डॉलर की है.
गिरफ़्तारी की ख़बर आने के बाद कंपनी के शेयरों के दाम रिकॉर्ड तेज़ी से गिरे हैं.
ज़बर्दस्त प्रगति
शाहिद बलवा के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने कॉलेज में ही पढ़ाई छोड़ दी. उनका परिवार रेस्तराँ कारोबार से जुड़ा है और वो गुजरात से मुंबई आए. मुंबई के मरीन लाइंस में उत्तर भारतीय और चाइनीज़ खाने के लिए मशहूर बलवाज़ रेस्तराँ उन्हीं का है.
कहा जाता है कि उनके दादा, परदादा का कारोबार था हिंदुस्तानी नवाबों के लिए मध्य पूर्व से अच्छे नस्ल के घोड़े मंगवाना.
महाराष्ट्र जैसे राज्य में जहाँ राजनीति और बिल्डर्स के बीच घनिष्ठ संबंध हैं, जहाँ कई राजनीतिज्ञ बिल्डर हैं.
डीबी रिएल्टी पर आरोप लगते रहे हैं कि इसमें महाराष्ट्र के एक बड़े नेता का काफ़ी पैसा लगा है और ये कथित तौर पर उनके फ्रंट के तौर पर काम करती रही है, लेकिन इस बारे में कोई सुबूत सामने नहीं आए हैं. कंपनी भी ऐसे आरोपों से इंकार करती है.
शाहिद बलवा की गिरफ़्तारी के बाद कई हलकों में कहा जा रहा है कि आदर्श और लवासा के बाद निशाना फिर उसी नेता पर है.
डीबी रिएल्टी में शाहिद बलवा के अलावा दूसरा नाम विनोद गोयनका का है. माना जाता है कि राजनीति और राजनीतिज्ञों पर उनकी पकड़ अच्छी है. शाहिद और विनोद करीब 15 साल पहले साथ आए जब उन्होंने होटल ल रॉयल मेरिडियन बनाया जो अभी हिल्टन के नाम से जाना जाता है. प्रोजेक्ट के सफ़ल होने के बाद दोनो ने करीब चार साल पहले डीबी (डायनमिक्स बलवा) रिएल्टी नाम की कंपनी बनाई.
फ़ोर्ब्स पत्रिका के मुताबिक शाहिद के पास एक अरब डॉलर से ज़्यादा की संपत्ति है. कंपनी की वेबसाईट के मुताबिक पत्रिका फोर्ब्स ने विनोद गोयनका को देश का 49वाँ और शाहिद बलवा को 50वाँ अमीर व्यक्ति बताया है.
लेकिन करीब चार साल में ही इस कंपनी के देश की इतनी बड़ी कंपनी बनने पर सवाल भी उठे हैं. मुंबई में जहाँ पुरानी रिएल एस्टेट कंपनियाँ पीछे छूट गई हैं, नई कंपनियों में लोधा ग्रुप, इंडियाबुल्स और डीबी रिएल्टी का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है जिन्होंने बाज़ार को जैसे अपने हाथ में ले लिया है.
हाल ही में डीबी रिएल्टी ने सभी को उस समय अचंभे में डाल दिया जब उन्हें मुंबई के बांद्रा पूर्व में वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के पास स्थित करीब 57-एकड़ की सरकारी कॉलोनी को दोबारा विकास करने के अधिकार मिले. मुंबई में अपनी तरह का ये सबसे बड़ी पुर्नविकास योजना थी, खासकर बांद्रा जैसे महंगे इलाके में.
शाहिद और विनोद के बारे में कहा जाता है कि उन्हें ऊँची शानो-शौकत वाली ज़िंदगी बेहद पसंद है. शाहिद अपनी सेहत का बहुत ध्यान रखते हैं. वो शादी-शुदा हैं और उनके दो बच्चे हैं.
उधर कारोबार सूत्रों के मुताबिक शाहिद बलवा की गिरफ़्तारी एक छोटी घटना है और जाँच एजेंसियों का निशाना दरअसल देश की एक बड़ी कंपनी का प्रमुख है जिसकी कंपनी का नाम भी टेलीकॉम घोटाले में लिया जा रहा है.
जब बीबीसी ने इस पूरे मामले बारे में विनोद गोयनका से बात करने की कोशिश की, तो बताया गया कि वो किसी मीटिंग में व्यस्त हैं. उधर डीबी रिएल्टी ने सभी आरोपों से इंकार किया है और कहा है कि कंपनी के काम काज पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी): कांग्रेस सरकार का मन का पाप जा नहीं रहा है ...!

- अरविन्द सिसोदिया 

जांच कब से....; के पीछे की असलियत ....
मनमोहन सिंह सरकार कभी जनता के वोट से जीते नहीं , एक बार चुनाव लड़े थे मगर जनता ने उन्हें हरा दिया सो वे अब जनता से बदला लेने का कोई अवसर नहीं चूकते ..! उनके जयादातर कारनामें इसा तरह के हैं की उन्हें देश के इतिहास में अलीबाबा और चालीस चोर की कहावत के दर्जें में दर्ज करेगा!  यह स्पष्ट है की २ जी और ३ जी और एस बैंड स्पेक्ट्रम का कार्यकाल मनमोहन सिंह का है , जांच को इसी समय से करना चाहिए था .., मगर जब तक कांग्रेस में कोई न कोई हल्का पन , टुच्चापन नहीं आये तब तक यह सरकार आगे बडती ही नहीं है ..! २०१० के साल में जो भी घोटाले सामनें आये वे सभी जे पी सी के दायरे की योग्यता रखते हैं .., कारण इन घोटालों में जो राशियाँ हैं और जो लोग सम्मिलित हैं , वे बहुत उंची पहुच वाले हैं ..! देश का धन लूटा गया है ...! मगर कांग्रेस नेत्रत्व नें महज एक राजहठ जो सोनिया जी की बालहठ थी के लिए एक पूरा सत्र  बर्वाद किया..!! अब जब उनकी हठ नहीं चली तो , समय को लेकर हेराफेरी हो रही है ...??? एन डी ए का कोई प्रभावशाली सांसद जे पी सी में न आ पाए इसलिए कभी उसे २००१ से जांच करने को कहते हैं कभी १९९८ से जांच  करने की कहते हैं ...! कांग्रेस सरकार का मन का पाप जा नहीं रहा है ...! 
सरकार 2जी मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने को तैयार है। इसकी औपचारिक घोषणा भी बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को हो गई । अत: अब सत्ता पक्ष और विपक्ष जेपीसी का दायरा और अध्यक्ष तय करने की कवायद में लग गए हैं। सूत्रों की मानें तो जेपीसी के दायरे में सिर्फ डी एम् के के ; ए. राजा का कार्यकाल रहे या कांग्रेस के सुखराम के जमाने से जांच हो, इस पर मशक्कत चल रही है। इस मसले पर शिवराज वी. पाटील समिति की अनुशंसा को ध्यान में रखा जाता है तो 2001 से 2010 तक स्पेक्ट्रम आवंटन प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा सकती है। कांग्रेस का एक वर्ग चाहता है कि 1998 से (राजग सरकार के कार्यकाल की शुरुआत से) 2010 तक मामले की जांच जेपीसी के दायरे में होनी चाहिए। भाजपा के नेताओं का कहना है कि उन्हें इस प्रस्ताव पर आपत्ति नहीं होगी। लेकिन अगर जेपीसी का दायरा बढ़ाना ही है तो पूर्व दूरसंचार मंत्री सुखराम के कार्यकाल से अब तक (1994-2010) इसकी जांच क्यों नहीं कराई जा सकती।
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हर " जी " के साथ जुड़ा है घोटाला
- संतोष ठाकुर , भास्कर.कॉम 
http://www.bhaskar.com/article/spldb-every-g-is-associated-with-a-scam-1823726.html 
नई दिल्ली. दूरसंचार मंत्रालय और घोटाला एक ही सिक्के के दो पहलू बनते जा रहे हैं। जब भी देश में नई दूरसंचार तकनीक आई या उसका विस्तार हुआ उसके क्रियान्वयन में गड़बड़ी-घपले के आरोप लगते रहे। चाहे फिर वह सुखराम रहे हों, जिनके शासनकाल में 1-जी या लैंडलाइन की उन्नत तकनीक आई या फिर ए राजा जिनके शासनकाल में 2-जी और 3-जी तकनीक आधारित स्पेक्ट्रम का आवंटन हुआ और इस सेवा का विस्तार हुआ। सुखराम 1993 से 1996 तक केंद्र की नरसिंह राव सरकार में दूरसंचार मंत्री थे। उनके समय में देश में लैंडलाइन फोन की उन्नत तकनीक आई। इस तकनीक को उस समय 1-जी के नाम से भी जाना गया था। इसे पहली पीढ़ी की नई तकनीक करार दिया गया।

सुखराम पर आरोप था कि उन्होंने देश में टेलीफोन लाइनों का जाल बिछाने के लिए दिए जाने वाले टेंडर में गड़बड़ी की है। सुखराम को भी सीबीआई ने ही १८ अगस्त 1996 मंे गिरफ्तार किया था। वह तब सांसद थे। जिस समय उन्हें गिरफ्तार किया गया उससे करीब तीन महीने पहले तक (16 मई 1996 तक) वह दूरसंचार मंत्री थे।

सुखराम के बाद देश में मोबाइल फोन तकनीक आई। यह शुरुआती चरण में 1.6 से 1.8 जी तकनीक कहलाई, जबकि उसी दौरान इससे कुछ अधिक उन्नत तकनीक 2-जी आई। इसको लेकर कहा जाता है कि यह असल में 2.5 जी तकनीक है। क्योंकि आधी संख्या की गणना नहीं होती है इसलिए इसे 2-जी तकनीक या दूसरी पीढ़ी की तकनीक कहा गया। बतौर दूरसंचार मंत्री ए राजा को अंतत: इसी 2-जी तकनीक आधारित लाइसेंस व स्पेक्ट्रम आवंटन में धांधली व मनमर्जी के आरोप में न केवल अपना पद गंवाना पड़ा बल्कि उसी सीबीआई के हाथों गिरफ्तार भी होना पड़ा, जो उनसे पहले 1-जी आधारित तकनीक को सर्वसुलभ कराने वाले पूर्व दूरसंचार मंत्री सुखराम को गिरफ्तार कर चुकी थी।

घटनाक्रम

22 अक्टूबर 2009 सीबीआई ने केंद्रीय सतर्कता आयोग की ओर से संदर्भ हासिल होने के बाद दूरसंचार मंत्रालय के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ स्पेक्ट्रम आवंटन में भूमिका का मामला दर्ज किया

नवंबर 2010 पहला सप्ताह मीडिया में कैग की रपट का हवाला देते हुए खबर आई कि स्पेक्ट्रम आवंटन में गड़बड़ी की वजह से सरकार को 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

9 नवंबर 2010 संसद का शीतकालीन सत्र शुरू। विपक्षी पार्टियों ने स्पेक्ट्रम घोटाले मंे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की मांग शुरू की

9 नवंबर 2010 राजा ने अपनी इस्तीफा सौंपा

8 दिसंबर 2010 सीबीआई ने राजा के सरकारी निवास के साथ ही पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के निजी सचिव रहे आरके चंदोलिया के घरों पर दबिश दी और कई कागजात जब्त किए।

15 दिसंबर 2010 सीबीआई ने कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया के दफ्तर पर दबिश दी।

24 दिसंबर 2010 सीबीआई ने राजा से नई दिल्ली में पूछताछ की

25 दिसंबर 2010 राजा से लगातार दूसरे दिन भी सीबीआई ने पूछताछ की

31 जनवरी 2011 सीबीआई ने फिर से राजा से पूछताछ की

2 फरवरी 2011 सीबीआई ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के निजी सहायक रहे आरके चंदोलिया को गिरफ्तार किया।
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30 सदस्यीय जेपीसी करेगी 2-जी की जांच 
 
    2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए सरकार द्वारा संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के ऎलान के बाद इसका खाका तैयार हो गया है। सूत्रों के अनुसार समिति में 30 सदस्य होंगे। बताया जा रहा है कि 30 सदस्यीय समिति में लोकसभा से 20 और राज्यसभा से 10 सदस्य होंगे। कुछ देर में इसकी औपचारिक घोषणा होने की संभावना है।
      जेपीसी समिति के अध्यक्ष का नाम तय नहीं हो पाया है। हालांकि, चेयरमैन के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल, पीसी चाको और वी किशोर चंद्र देव का नाम सामने आ रहा है। कांग्रेस और भाजपा के सदस्यों के अलावा जेपीसी पैनल में तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बसपा, जदयू, डीएमके पार्टी के भी सदस्य होंगे। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को सरकार ने विपक्ष की मांग के आगे झुकते हुए 2-जी घोटाले की जांच जेपीसी से कराने को मंजूरी दे दी थी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद के बजट सत्र के दौरान जेपीसी के गठन का ऎलान किया था। संसद का पूरा शीतकालीन सत्र जेपीसी के चलते हंगामे की भेंट चढ़ गया था। बजट सत्र सुचारू रूप से चल सके, इसलिए सरकार ने अपना रूख बदलते हुए जेपीसी का गठन करने का फैसला किया।

Godhra : 27-2-2002 Hindu pilgrims have died in a fire on a train in India

- अरविन्द सिसोदिया 
 गोधरा में जब जिन्दा कर सेवक जलाये गए थे तब यह समाचार बी बी सी ने दिया था जो यथावत यहाँ है .....
http://news.bbc.co.uk/onthisday/hi/dates/stories/february/27/newsid_4168000/4168073.stm
2002: Hindus die in train fire
Fifty-seven Hindu pilgrims have died in a fire on a train in India.

The fire happened as the Sabarmati Express, bound for Ahmedabad, was pulling out of Godhra station in the western state of Gujarat at approximately 0630 today.
The train was returning hundreds of Hindu activists from a pilgrimage to the disputed holy site of Ayodhya in the northern Indian state of Uttar P, which is claimed by both Muslims and Hindus.
A gang of Muslims are suspected of causing the fire and India's prime minister Atal Bihari Vajpayee has appealed for calm amid fears of renewed religious tension in the country.
'Sad and unfortunate'
The dispute over Ayodhya has been ongoing for several years.
In 1992 the Vishwa Hindu Parishad (VHP), or World Hindu Council, organised a demonstration which resulted in the destruction of a 500-year-old Moghul mosque at Ayodhya.
The Hindus believe the mosque occupied the same spot where their god Ram was born.
The destruction of the mosque sparked the most widespread rioting India has seen since partition, and resulted in the deaths of more than 3,000 people.
More than 14,000 Hindus have gathered at Ayodhya in recent weeks to plan the construction of a temple. They have set a deadline of 15 March for work to begin.
According to the head of police in Godhra, Raju Bhargava, it appears this morning's train fire was started by a gang of Muslims who were angered by pro-Hindu chanting on the train.
Initial evidence suggests kerosene was poured into four of the carriages before they were set alight.
Local resident Rakesh Kimani, 18, witnessed the event: "I heard screams for help as I came out of my house.
"I saw a huge ball of fire... people putting out their hands and heads through the windows, trying to escape.
"It was a horrible sight."
Schools and shops have been shut in Godhra and a curfew has been imposed. Police in the town have been ordered to shoot troublemakers on sight.
Prime Minister Vajpayee, whose Hindu nationalist party Bharatiya Janata party (BJP), allied to the VHP, came to power in the mid-1990s in a landslide victory, said: "This is a very sad and unfortunate incident.
"The Ayodhya dispute can be solved only by dialogue between Hindus and Muslims or resolved by the court. It cannot be resolved through violent means or agitation.
"I would appeal to the VHP to suspend their campaign and help government in maintaining peace and brotherhood in the country."
But the VHP has called for a state-wide strike to protest against the attack and the more militant members have vowed to continue with the temple's construction.
There have been scattered reports of clashes between Hindus and Muslims in Gujarat after news of the train attack spread.

fire was a pre-planned conspiracy : a large quantity of petrol was used in the incident

 Forensic report was key to Godhra conviction
Published: Tuesday, Feb 22, 2011, 23:28 IST 
 http://www.dnaindia.com/india/report_forensic-report-was-key-to-godhra-conviction_1511619
By Nikunj Soni | Place: Ahmedabad | Agency: DNA 
Public prosecutor JM Panchal said on Tuesday that evidence that led to the conviction of 31 persons in connection with the Godhra train burning case came from Gandhinagar’s Forensic Science Laboratory (FSL), eyewitnesses and circumstantial evidence.

The forensic evidence was crucial since two panels formed to investigate the cause of the fire on the Sabarmati Express on Feb 27, 2002, came to two different conclusions. While the Nanavati commission, set up by the Gujarat government in 2002 concluded that the fire was a pre-planned conspiracy and that the coach caught fire after petrol was poured inside deliberately, the UC Banerjee Commission, set up by the central government in 2004 said the fire was an ‘accident’ and ruled out the possibility of external attack.

Tuesday’s(22-2-2011)judgement depended on forensic evidence conducted by the FSL that concluded that the fire broke out in the S-6 coach after petrol was poured inside the compartment. The FSL report stating that a large quantity of petrol was used in the incident was placed on record before the court while the case was being heard.

According to sources connected to the case, the FSL examined the pattern of burning and even reconstructed the episode to determine how the coach caught fire. Given the pattern of the fire when the coach was set ablaze, the FSL ruled out the possibility of petrol being thrown from outside the coach either through the windows or doors. The FSL, however, noted the presence of petrol hydrocarbons at the site of the attack. Two containers found on the track also had some petrol in it.

According to the prosecution, the accused had brought these petrol-filled containers in a tempo to the Godhra railway station. They then entered the coach after forcing open the vestibule between two coaches and poured petrol into the coach that caused the fire.

However, the defence challenged the conclusion on many grounds. One argument was that the doctors who conducted the post-mortem on the victims of the fire did not note any smell of petrol or kerosene on the bodies. Thus, the defence argued that there was no evidence to prove that kerosene or petrol was used to start the fire that led to 59 deaths.

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साबरमती की विशेष अदालत ने 9 साल पहले हुए गोधराकांड में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 94 में से 63 आरोपियों को बरी कर दिया जबकि अग्नीकांड को साजिश करार देते हुए 31 लोगों को दोषी करार दिया। गोधराकांड की जांच के लिए बनाए गए दो आयोगों ने भी इस मामले में अलग-अलग राय दी थी। निम्न बिंदू बने फैसले की मुख्य वजह..-कोर्ट ने अभियोजन की इस मुख्य दलील को मान लिया कि अयोध्या में विवादित स्थल से यज्ञ आहुति करके साबरमती एक्सप्रेस से लौट रहे कारसेवकों से बदला लेने के लिए साजिश रची गई।
- चश्मदीद अजय बारिया, रंजीत सिंह पटेल, प्रभात सिंह पटेल, सिकंदर फकीर की गवाही को मंजूर किया गया है। इनमें से दो पेट्रोल पंप कर्मचारी थे, उन्होंने बयान में बताया कि एस-6 कोच में बड़ी मात्रा में पेट्रोल छिड़का गया।
-यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि जिन 63 आरोपियों को बरी किया गया है उन्हें संदेह का लाभ दिया गया है या साक्ष्यों के अभाव में उन्हें छोड़ा गया है।
-कारसेवकों और अन्य यात्रियों सहित 50 चश्मदीद के बयानों पर कोर्ट ने विचार किया
 

गोधरा कांड : रेल के डिब्बे में आग लगाई गई थी ..!


- अरविन्द  सिसोदिया
  गोधरा  में जो कांड हुआ था निश्चित रूप से दुखद था .., श्री राम जन्म भूमी ; अयोध्या से कार सेवा कर लौट  रहे स्त्री , बच्चों और पुरुँषों  को ले कर आरही बोगी में पट्रोल डाल कर निर्दयता पूर्वक जिन्दा जला दिया गया कि सामान्यतः शांत रहनें वाले हिन्दू समाज को भी भयंकर गुस्सा आगया और प्रतिक्रिया स्वरूप जो घटित हुआ वह भी दुखद था ..! इंदिराजी की हत्या के बाद भी इसी तरह की प्रतिक्रिया हुई थी ..! यह होना स्वभाविक है ..! हिंषा के बल पर सच का गला ज्यादा समय तक घोंटा नहीं जा सकता ..!! गैर भाजपा दलों नें तब इस महा भयानक षड्यंत्र को भी सिर्फ वोटों की खातिर कांग्रेस के नेत्रतत्व  में मात्र छोटी सी दुर्घटना में बदलनें की हर संभव कोशिस की ...! इस घटना के प्रतिक्रिया स्वरूप घटे घटनाक्रम को नरेंद्र मोदी सरकार के द्वारा समपन्न अपराध बता कर उसे घेरनें में कोई कसर नहीं छोड़ी गई..!! जब की इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस नेताओं की अगुआई में हुए हिंषक कृत्यों को जायज ठहराया गया और हत्यारों को सजा नहीं हुई ..! ख़ैर अब अदालत ने अपने फैसले में यह स्पष्तः दर्ज किया है की गोधरा में रेल के डिब्बे में आग लगाई गई थी ..! यह पूर्व निर्धारित षड्यंत्र था ..!!   
* अहमदाबाद;२२ फरबरी २०११ 
 गोधरा कांड की सुनवाई कर रही साबरमती विशेष कोर्ट ने 94 आरोपियों में 63 आरोपियों को बरी कर दिया है जबकि 31 आरोपियों को दोषी माना है। 25 फरवरी को सजा का ऐलान किया जाएगा। गौरतलब है कि 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस की बोगी नंबर एस-6 आग लगानें से 58 लोगों की मौत हो गई थी। गुजरात पुलिस ने अपनी जांच में ट्रेन जलाने की वारदात को आईएसआई की सोची-समझी साजिश करार दी थी। मकसद हिन्दू कारसेवकों की हत्या कर राज्य का साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ना था।
लेकिन राजनीति से प्रेरित ममोहन सिंह की केंद्र सरकार का यू सी बैनर्जी कमीशन इस नतीजे पर पहुंचा कि गोधरा की घटना महज एक हादसा थी। बैनर्जी कमीशन के मुताबिक जांच एजेंसियों ने गवाहों को काफी टार्चर कर उनके स्टेटमेंट लिए। कुछ लोगों का ऐसा भी मानना है कि गुजरात के मुख्यमंत्री ने कांड को साजिश बता कर जांच की दिशा पहले ही तय कर दी थी। बाद में पुलिस भी उसी लाइन पर चली।
जबकि गुजरात पुलिस और नानावती कमीशन साजिश की थ्योरी को लेकर जांच कर रही थी। चार्जशीट में 134 आरोपी बनाए गए, जिसमें 16 अब भी फरार हैं। पांच लोगों की हिरासत में ही मौत हो गई। 13 लोग सबूत के अभाव में छोड़ दिए गए जबकि पांच घटना के वक्त नाबालिग थे। अब तक तीन अलग-अलग एजेंसियां इस कांड की जांच कर चुकी हैं। फिलहाल आर के राघवन की अध्यक्षता वाली एसआईटी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इस मामले की जांच कर रही है।
गोधरा कांड घटनाक्रम पर एक नजर
दरअसल गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस में लगाई गई  आग आजाद हिन्दुस्तान के इतिहास पर काले धब्बे की तरह है। ट्रेन की उस कोच में लगी आग की आंच को पूरे गुजरात ने महसूस किया था। क्रोध  की आग में पूरा गुजरात  झुलस गया था। गोधरा में हुए उस कांड और उसके बाद इसकी जांच में कई अहम मोड़ आए।
27 फरवरी 2002 की सुबह 7 बजकर 43 मिनट पर अहमदाबाद जाने वाली साबरमती एक्सप्रेस गोधरा स्टेशन पर थी। गोधरा कांड की जांच करने वाली एजेंसियों के मुताबिक ट्रेन अहमदाबाद के लिए प्लेटफॉर्म से कुछ ही दूर आगे बढ़ी कि एस 6 बोगी आग की लपटों से घिर गई। इस हादसे में 58 लोगों की जान चली गई। मृतकों में 23 पुरुष, 15 महिलाएं और 20 बच्चे थे।
हादसे की चपेट में जो एस-6 कोच आया, उसमें अयोध्या से कार सेवा कर लोट रहे कारसेवक सवार थे। इसलिए इसे साजिश होने की आशंका हुई । घटना क्रम भी सर्व विदित रहा जिसके कारण इस खबर ने पूरे गुजरात ही नहीं पूरे देश को आंदोलित कर दिया था !  
साल 2002 में ही राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए नानावती आयोग का गठन कर दिया। नानावती आयोग ने 2008 में रिपोर्ट सरकार को सौंपी। कई गैर सरकारी संगठनों ने इस रिपोर्ट को विधानसभा में पेश करने पर रोक लगाने की मांग की। इस सिलसिले में गुजरात हाईकोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई। लेकिन हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया।
इस बीच यूपीए सरकार ने भी वोट बाएँ की खातिर गोधरा कांड की जांच के लिए एक समिति बनाई। ये समिति साल 2004 में बनाई गई। समिति के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस यूसी बनर्जी बनाए गए। इस समिति ने साल 2006 में अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस बीच सरकार ने इस मामले की सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट बनाने का फैसला किया। ये स्पेशल कोर्ट साबरमती जेल के अंदर ही बना। जून 2009 में स्पेशल कोर्ट में मुकदमा शुरू हुआ। मुकदमे के दौरान 253 गवाहों से पूछताछ की गई और गुजरात पुलिस ने कोर्ट के सामने 1500 से अधिक दस्तावेजी सबूत पेश किए। 94 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए। सितंबर 2010 में स्पेशल कोर्ट में ये सुनवाई पूरी हो गई। आज कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया।
अहमदाबाद। 
एक विशेष द्रुत गति अदालत द्वारा गोधरा मामले में दोषी ठहराए गए 31 लोगों की सूची निम्न प्रकार है।
1. हाजी बिलाल
2. रजाक कुरकुर
3. शौकत पिटादी
4. सलीम जर्दा
5. जाबिर बिनयामिन बेहरा
6. अब्दुल रउफ
7. यूनुस घड़ियाल
8. बिलाल बादाम
9. फारुख गाजी
10. इरफान कलंदर
11. अयूब पठाडिया
12. शोएब बादाम
13. सलमान पीर
14. जम्बूरा कनखट्टा
15. बिलाल टीडो
16. बिरयानी
17. रजाक कुरकुर
18. सादिक बादाम
19. मोहम्मद पोपा
20. रमजानी बोहरा
21. हसन चर्खा
22. मोहम्मद चांद
23. मोहम्मद हनीफ भाना
24. मोहम्मद हसन
25. शौकत बिबिनो
26. सोएब कलंदर पठाडिया
27. सिद्दीक मोरा
28. अब्दुल सत्तार
29. अब्दुल रउफ कमाली
30. इस्माइल सवाली
31. सिराज वाडा
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प्रमुख रूप से घटना क्रम .......
वर्ष 2002 के गोधरा ट्रेन कांड और उसके बाद हुए सांप्रदायिक दंगे का घटनाक्रम इस प्रकार है-
27 फरवरी, 2002: गोधरा रेलवे स्टेशन के पास साबरमती ट्रेन की एस-6 कोच में भीड़ द्वारा आग लगाये जाने के बाद 59 कारसेवकों की मौत हो गई. इस मामले में 1500 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी.
28 फरवरी से 31 मार्च 2002 :गुजरात के कई इलाकों में दंगा भड़का जिसमें 1200 से अधिक लोग मारे गये. मारे गये लोगों में ज्यादातर अल्पसंख्यक समुदाय के लोग थे.
3 मार्च, 2002: गोधरा ट्रेन जलाने के मामले में गिरफ्तार किये गये लोगों के खिलाफ आतंकवाद निरोधक अध्यादेश (पोटो) लगाया गया.
6 मार्च, 2002: गुजरात सरकार ने कमिशन ऑफ इन्क्वायरी एक्ट के तहत गोधरा कांड और उसके बाद हुई घटनाओं की जांच के लिये एक आयोग की नियुक्ति की.
9 मार्च, 2002: पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक षडयंत्र) लगाया.
25 मार्च, 2002: केंद्र सरकार के दबाव की वजह से सभी आरोपियों पर से पोटो हटाया गया.
27 मार्च, 2002: 54 आरोपियों के खिलाफ पहला पहला आरोप पत्र दाखिल किया गया लेकिन उन पर आतंकवाद निरोधक कानून के तहत आरोप नहीं लगाया गया. (पोटो को उस समय संसद ने पास कर दिया था जिससे वह कानून बन गया)
18 फरवरी, 2003: गुजरात में भाजपा सरकार के दुबारा चुने जाने पर आरोपियों के खिलाफ फिर से आतंकवाद निरोधक कानून लगा दिया गया.
21 नवंबर, 2003: उच्चतम न्यायालय ने गोधरा ट्रेन जलाये जाने के मामले समेत दंगे से जुड़े सभी मामलों की न्यायिक सुनवाई पर रोक लगा दिया.
4 सितंबर, 2004: राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान केद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले के आधार पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश यू सी बनर्जी की अध्यक्षता वाली एक समिति का गठन किया गया. इस समिति को घटना के कुछ पहलुओं की जांच का काम सौंपा गया.
21 सितंबर, 2004: नवगठित संप्रग सरकार ने पोटा कानून को खत्म कर दिया और अरोपियों के खिलाफ पोटा आरोपों की समीक्षा का फैसला किया.
17 जनवरी, 2005: यू सी बनर्जी समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया कि एस-6 में लगी आग एक ‘दुर्घटना’ थी और इस बात की आशंका को खारिज किया कि आग बाहरी तत्वों द्वारा लगाई गई थी.
16 मई, 2005: पोटा समीक्षा समिति ने अपनी राय दी कि आरोपियों पर पोटा के तहत आरोप नहीं लगाये जायें.
13 अक्तूबर, 2006: गुजरात उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी कि यू सी बनर्जी समिति का गठन ‘अवैध’ और ‘असंवैधानिक’ है क्योंकि नानावती-शाह आयोग पहले ही दंगे से जुड़े सभी मामले की जांच कर रहा है. उसने यह भी कहा कि बनर्जी की जांच के परिणाम ‘अमान्य’ हैं.
26 मार्च, 2008: उच्चतम न्यायालय ने गोधरा ट्रेन में लगी आग और गोधरा के बाद हुए दंगों से जुड़े आठ मामलों की जांच के लिये विशेष जांच आयोग बनाया.
18 सितंबर, 2008: नानावती आयोग ने गोधरा कांड की जांच सौंपी और कहा कि यह पूर्व नियोजित षडयंत्र था और एस-6 कोच को भीड़ ने पेट्रोल डालकर जलाया.
12 फरवरी 2009: उच्च न्यायालय ने पोटा समीक्षा समिति के इस फैसले की पुष्टि की कि कानून को इस मामले में नहीं लागू किया जा सकता है.
20 फरवरी, 2009: गोधरा कांड के पीड़ितों के रिश्तेदार ने आरोपियों पर से पोटा कानून हटाये जाने के उच्च न्यायालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी. इस मामले पर सुनवाई अभी भी लंबित है.
1 मई, 2009: उच्चतम न्यायालय ने गोधरा मामले की सुनवाई पर से प्रतिबंध हटाया और सीबीआई के पूर्व निदेशक आर के राघवन की अध्यक्षता वाले विशेष जांच दल ने गोधरा कांड और दंगे से जुड़े आठ अन्य मामलों की जांच में तेजी आई.
1 जून, 2009: गोधरा ट्रेन कांड की सुनवाई अहमदाबाद के साबरमती केंद्रीय जेल के अंदर शुरू हुई.
6 मई, 2010: उच्चतम न्यायालय सुनवाई अदालत को गोधरा ट्रेन कांड समेत गुजरात के दंगों से जुड़े नौ संवेदनशील मामलों में फैसला सुनाने से रोका.
28 सितंबर, 2010: सुनवाई पूरी हुई लेकिन शीर्ष अदालत द्वारा रोक लगाये जाने के कारण फैसला नहीं सुनाया गया.
18 जनवरी, 2011: उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुनाने पर से प्रतिबंध हटाया.
22 फरवरी, 2011: विशेष अदालत ने गोधरा कांड में 31 लोगों को दोषी पाया जबकि 63 अन्य को बरी किया.

मंगलवार, 22 फ़रवरी 2011

Ottavio Quattrocchi भारत से बड़ा इटालियन ओत्तावियो क्वात्रोच्चि


- अरविन्द सिसोदिया 
    भारत की प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी की पुत्र वधु बन कर जब इटालियन मूल की सोनिया गांधी ने भारत के प्रधानमंत्री निवास में प्रवेश किया होगा तब ईसाई समुदाय का खुश होना तो  स्वाभाविक था मगर लगता है की खुशी सबसे ज्यादा क्वात्रोच्ची को ही होई होगी ..! इताली इटली का यह सामान्य व्यक्ती जो एक इटालियन कंपनी में कार्यरत था , अचानक ही इसलिए महत्वपूर्ण हो गया की उसकी ख़ास पहचान सोनिया गांधी से थी ,और .. इसी आधार पर उसने देश के कई बड़े बड़े ठेके अपनी कंपनी को दिलवाए ..!! जब बह चलता था तो देश की सरकार हिलती थी, मंत्रलत काँप था , मिनिस्टर उअथा कर सलाम बजाते थे ...! क्योंकि पहुच घर में अंदर चूल्हे तक जो थी ..!! सिर्फ और सिर्फ वह व्यक्ती सोनिया गांधी के कारण देश से ऊपर , देश के कानून से ऊपर और देश की प्रशासनिक व्यवस्था से ऊपर रहा ..! सोनिया गांधी के बरद हस्त  के कारण उस पर कोई आंच नहीं आई...! वह भारत की किसी भी अदालत में हाजिर नहीं हुआ..! उसे गिरिफ्तर करने के बजाये उसे ससम्मान देश से बाहर निकलवाया गया ..! उसके बैंक खाते जो सीज थे ; जिनमें से वह धन निकाल नही पा रहा था ; उन्हें रिलीज करवाया गया ..!! उसका रेड कार्नर गिरफ्तारी वारंट था ; वह समाप्त करवाया गया ..! उसे देश लाने के प्रयास करने के बजाये उसे मुक्त करवाने के सारे प्रयास चल रहे हैं ..! जिस सी बी आई पर उसके खिलाफ एक कमरा भर सबूत बताये  जा रहे थे उसने आरोप पात्र दाखिल किया था वही अब आरोप वापस लेने में लगी है ..!! सबूत नहीं होनें की बात कह रही है ..! यह लगता नहीं कि सी बी आई सोनिया जी की बाई की तरह है ..? सबसे शर्मनाक बात तो यह है कि आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण ने उन्हें दोषी पाया है तब भी उसे मुक्त करवानें पर वह विभाग लगा हुआ है जो केंद्र सरकार के पास है ..!    
 
नई दिल्ली ----- यहां एक अदालत ने बोफोर्स घोटाला मामले में इतालवी व्यवसायी ओत्तावियो क्वात्रोच्चि के खिलाफ मामला खत्म करने की अर्जी पर फैसला ४  मार्च २०११ तक के लिए सुरक्षित रख लिया। चीफ मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट विनोद यादव की अदालत में सीबीआई की अर्जी पर सुनवाई चल रही है। वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट के वकील अजय अग्रवाल सीबीआई की अर्जी का विरोध कर रहे हैं। 
       सीबीआई ने अक्टूबर, 2009 में अदालत से क्वात्रोच्चि के खिलाफ मामला खत्म करने की इजाजत मांगी थी। सीबीआई की दलील थी कि आरोपी को भारत लाने के लिए दो बार प्रयास किए गए, लेकिन दोनों ही बार उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा। बोफोर्स तोप करार में कथित रूप से दलाली लेने को लेकर क्वात्रोच्चि के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था। सीबीआई ने 1986 के बोफोर्स तोप करार की दलाली मामले में 20 जनवरी 1990 को मामला दर्ज किया था।
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http://connect.in.com/ottavio-quattrocchi/biography-303144.html
Ottavio Quattrocchi is an Italian businessman who was being sought until early 2009 in India for criminal charges for acting as a conduit for bribes in the Bofors scandal.

Quattrocchi's role in this scandal, and his proximity to Indian prime minister Rajiv Gandhi through his Italian wife Sonia Gandhi (Antonia Maino), is thought to have contributed to the defeat of the Congress Party in the 1989 elections. Ten years later (1999), the Central Bureau of Investigation (CBI) named Quattrocchi in a chargesheet as the conduit for the Bofors bribe. The case against him was strengthened in June 2003, when Interpol revealed two bank accounts, 5A5151516M and 5A5151516L, held by Quattrocchi and his wife Maria with the BSI AG bank, London, containing Euros 3 million and $1 million, a \"curiously large savings for a salaried executive\". In January 2006, these frozen bank accounts were unexpectedly released by India's law ministry, apparently without the consent of the CBI which had asked for them to be frozen.

On 6 February 2007, Ottavio Quattrocchi was detained in Argentina on the basis of the Interpol warrant. The Indian investigating agency CBI came under attack for putting up a half-hearted effort towards his extradition[4] and India lost the case for his extradition in June 2007, the judge remarking that \"India did not even present proper legal documents\". Embarrassingly, India was asked to pay Ottavio's legal expenses.

Ottavio's financier son, Massimo Quattrocchi, grew up with Sonia Gandhi's children Rahul and Priyanka Gandhi, who are currently rising through the political hierarchy in India. Massimo currently advises the Luxembourg-based firm Clubinvest on business opportunities in India. He visits India frequently, and runs an office in Bangalore. He was present in India at the time of his father's Argentina arrest in February 2007, and there is speculation that he may have met Priyanka Vadra around that time.
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www.outlookindia.com.........But The Q Factor Still Haunts
 http://www.outlookindia.com/printarticle.aspx?203545
The CBI is at a loss to explain Sonia Gandhi's links with Quattrocchi—and, therefore, Bofors
IS the CBI on the verge of questioning Sonia on Bofors? And more importantly, did the disclosure that the Quattrocchis were major beneficiaries of the Bofors kickbacks lead to her decision  to join the Congress? According to well-placed sources in the agency, Ottavio Quattrocchi and wife Maria have a chargesheet coming their way in the Bofors scam.
As for quizzing Sonia, the CBI took up the issue when Arun Nehru,Rajiv Gandhi's school friend, harped on the Sonia-Quattrocchi connection while he was being interrogated. Some members of the Special Investigation Team (SIT) suggested that Sonia's name must be included on its list. Mere questioning, they argued, would not necessarily mean she is guilty. Having done that, the agency is at a loss to locate an officer who will question Sonia, even if such a decision would necessarily mean political clearance.
On May 8, CBI director Joginder Singh said the chargesheet, currently being scrutinised by the agency's legal department, will be filed "soon". Agency sources say the chargesheet will be finalised this weekend and sent to the personnel department for clearance.
After amateurish attempts to extradite Quattrocchi from Malaysia failed in February, the agency claims it is better armed now. Immediately after the chargesheet is filed, the CBI will formally apply for the Italian businessman's extradition. "This time, we have a solid case," insists a CBI official. In the last attempt, the grounds cited by CBI officials to get him back were considered 'inadequate' by Malaysian authorities. Agency officials say that if they fail to extradite Quattrocchi this time, they may even seek his deportation, which does not need a formal bilateral agreement.
PRAMOD MAHAJAN

The Congress desperately needs leaders but not Sonia.She will turn out to be another Maneka Gandhi. Sonia has a language problem and a basic lack of understanding of India. Sonia is like the last straw for a drowning Congress.
All of which is bad news, as far as Sonia is concerned, because it leads to a host of questions. What is her connection with Quattrocchi, which dates back to her Italy days? And how did Quattrocchi, a fertiliser expert representing the interests of Italian multinational Snamprogetti, come to acquire such sweeping powers in a foreign country? To make things worse, Quattrocchi has quite unabashedly admitted his close relations with the Gandhis.
The scrutiny of Bofors papers from Switzerland reveal that Rs 24 crore was paid to Quattrocchi by the shady AE Services in 1986 as part of the kickbacks for the Howitzer guns. The money was deposited in a Swiss bank named by Quattrocchi. This, says the CBI, transpired a few days before the Defence Ministry awarded the contract to Bofors. The chargesheet also has details of Quattrocchi's deals with notorious Hong Kong-based hawala dealer Amir Bhai. "There is evidence that the formidable Italian also laundered money through Amir Bhai," says a source.
Well-placed agency sources say the first Bofors chargesheet is likely to concentrate on public servants, including former defence secretary S.K. Bhatnagar, the only person privy to every single meeting on the Bofors deal. Other names, like key Rajiv Gandhi aides Gopi Aurora and Sarla Grewal, have also come up.
Of the politicians, the SIT has suggested the chargesheeting of Arun Nehru but only if it is cleared by the CBI's legal department. The same applies to Gen. K. Sundarji, who cleared the contract. Look at it any way, almost everyone involved is a former Rajiv aide—Sonia's predicament is understandable.
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http://economictimes.indiatimes.com/news/politics/nation/bofors-scam-itat-names-quattrocchi-as-one-of-the-beneficiaries-of-the-kickbacks/articleshow/7213084.cms
 
Bofors scam: ITAT names Quattrocchi as one of the beneficiaries of the kickbacks
NEW DELHI: The ghost of Bofors scandal seems to be mustering for yet another onslaught on the Manmohan Singh government with the Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) naming Italian middleman Ottavio Quattrocchi as one of the beneficiaries of the kickbacks.
According to an ITAT order dated December 31, 2010, “payments were made illegally as the government of India’s policy did not allow middleman in defence deals”. Quattrocchi and Win Chadha are accused of receiving `41 crore in illegal kickbacks in the Bofors gun purchase scandal of the mid-1980s. “Bofors admittedly paid the amounts to AE Services, Ottavio Quattrocchi and other entities. It’s a liability for withholding tax is built in. Ottavio Quattrocchi was living in India for a considerable time. This issue about his tax residence status should have been verified,” the order said.
The ITAT order comes in the midst of the Opposition’s campaign against the government over allegations of corruption and a day before a city court takes up the CBI’s plea to drop criminal proceedings against the Italian middleman. During the arguments in the case two months ago, the government’s counsel had contended that the continued prosecution of Quattrocchi was “unjustified” in the light of various factors, including the failed attempts of the CBI to extradite him. “I find that the continuance of prosecution against Quattrocchi will be unjustified. It is considered expedient in the interest of justice that the proceedings against him should not be continued and be withdrawn,” the CBI had pleaded in its nine-page plea.
Today’s development is certain to cause major embarrassment for the prime minister and the UPA government. It may be recalled that the prime minister had made an emphatic defence of the CBI’s decision to close the case against the Italian middleman, who was close to the Gandhi family. “It is not a good reflection on the Indian legal system that we harass people while the world says we have no case,” the prime minister had said. “Quattrocchi case is an embarrassment for the government of India. We tried to extradite him from Malaysia...from Argentina ...and the courts said we don’t have a strong case. Before the matter was referred, Interpol asked India why do you want to keep him under a RCN — the law minister referred to AG (Attorney General) who gave advice that it should be lifted,” the prime minister had observed.
The claim that Malaysian and Argentine courts had rejected India’s appeal are not exactly correct. Dismissing India’s review petition of Quattrocchi’s extradition, Justice Augustine Paul of Kuala Lumpur High Court had noted that the descriptions of the offenses in the requisition papers were “insufficient, vague and ambiguous”.
It may be recalled that the Malayasian court’s ruling was cited by UPA-I government to de-freeze Quattrocchi’s bank accounts in December 2005. Although the Supreme Court directed the government to ensure that the money was not withdrawn, the delay in approaching the court helped Quattrocchi walk away with ` 21 crore from his London bank accounts.
The government did not do much to get Quattrocchi extradited when he was arrested in Argentina in February, 2007. It be recalled that the Argentine judge noted that the CBI did not even present proper legal documents for his extradition.



सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

विदेशी दान :भारतीय लोगों को धर्मान्तरण


- अरविन्द  सिसोदिया  
सबसे पहले हम इडिया टुडे १६ फरवरी २०११ के अंक में प्रकाशित , पड़ताल कलम में विदेशी फंडिंग पर विशेष आलेख ..
तय होगी जवाबदेही
में से बहुत छोटा सा अंश इस प्रकार से है .......
सूत्रों के मुताबिक , सबसे ज्यादा विदेशी चंदा लेने वाले २० प्रमुख संगठनों में से १० इसाई संगठन हैं . इसके आलावा , कई छोटे इसाई कल्याणकारी संगठनों और हिमायती समूहों को विदेशी चंदा मिल रहा है . खबर है कि इनमें से कई धर्मान्तरण  कि गतिविधियों में लिप्त हैं . विशेषकर आदिवासियों को ईसाई बनाने की गतिविधियों में शामिल हैं . हालांकि कानून में धर्मान्तरण की इजाजत है पर जबर धर्मान्तरण अवैध्य है . धर्मान्तरण के लिए रिश्वत या किसी तरह का प्रलोभन देनें के  दोषी पाए गए संगठनों को प्रतिबंधित कर दिया जाता है .
 सरकार ने पाया कि विवादास्पद वाचटावर  बाइबल एंड टैक्ट सोसायटी जबरन धर्मान्तरण की गतिविधियों में लिप्त  है , इसके वाद इसा इसा सोसायटी को विदेशी चन्दा लेने से रोक दिया गया . इससे पहले यह संगठन राष्ट्र गीत गायन के खिलाफ अभियान चला रहा था . 
चालीस एनी स्वंयसेवी  संगठनों को विदेशी चंदा लेने से रोक दिया गया है. और ३५ संगठनों को चंदा हांसिल करने से पहले " पहले मंजूरी " लेने की श्रेणी में दल दिया गया है . इसकी वजह से उन्हें एक भी रुपया चंदा लेने से पहले गृह मंत्रालय की मंजूरी लेनी होती है . ....      
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 सच यह है कि भारत पर अंग्रजों के भी दो हमले एक साथ हुए थे पहल संप्रभुता का अफर्ण और दूसरा भारतीय लोगों को धर्मान्तरण ....., अंग्रेज तो चले गए मगर ईसाई मिशनरियों को यहाँ धर्मांतरण के लिए छोड़ गए .., वे तब से ही विदेशी धन के सहारे पूरे भारत को एक ईसाई राष्ट्र में बदलनें में जुटे हुयें हैं .., सरकार की कानूनी खामियों और इच्छा शक्ती के आभाव में यह सब बहुत आसानीसे चल रहा है .., जबसे  नेहरु  खानदान   की बहु  ईसाई महिला  है तब  से यह और भी नीरंकुश्ता  से चल रहा है ...!
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नई दिल्ली ।। लोकसभा में शुक्रवार( २७ अगस्त 2010 ) को विदेशी दान या डोनेशन के विनियमन से जुड़ा विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया। इसका मकसद स्वयंसेवी संस्थाओं ( एनजीओ ) को विदेशों से प्राप्त होने वाले धन को नियंत्रित किया जा सके और उस धन के खर्च की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
किसी संस्थान के बैंक खाते में 10 लाख रुपये की राशि आने पर उसकी जानकारी सरकार को देनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे जहां इमानदार एनजीओ को बढ़ाव मिलेगा वहीं विदेशांे से आने वाले पैसे के राष्ट्र के खिलाफ इस्तेमाल पर लगाम लगाई जा सकेगी।
गृह राज्यमंत्री अजय माकन ने सदन में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए इसे एक अभूतपूर्व विधेयक बताया। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को पक्ष और विपक्ष दोनों का समर्थन प्राप्त है। इस विधेयक में स्थायी समिति की 14 में से 12 सिफारिशों को शामिल किया गया है।
किसी एनजीओ द्वारा विदेशी धन का उपयोग करने के लिए 10 शर्तें लगाई गई हैं। इनमें बेनामी संस्थान , धार्मिक कार्यों में शामिल संस्थान , सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वाले , धन का दुरुपयोग करने वाले और अपना उद्देश्य हासिल करने के लिए हिंसा का रास्ता अपनाने वाली संस्था द्वारा ऐसे धन का उपयोग करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। विधेयक में एनजीओ के प्रशासनिक खर्च की सीमा कुल खर्च का 50 प्रतिशत तय करने के साथ धन के अनुमान या आकलन के आधार पर खर्च पर रोक लगाई गई है। एनजीओ को प्रत्येक पांच साल में अपना नवीकरण कराना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस पर निगाह रखेगी कि विदेशी धन का किस प्रकार के लोग या संस्थान उपयोग करेंगे और उनका मकसद और क्षेत्र क्या होगा। अगर बैंक में किसी संस्थान के खाते में 10 लाख रुपये से अधिक की राशि आती है तो इसकी जानकारी सरकार को होने की व्यवस्था की गई है। विधेयक पर चर्चा के दौरान सदस्यों ने आमतौर पर इस का समर्थन किया।
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चूंकि विदेश से पैसा लाने के लिए इस कानून के तहत गृहमंत्रालय में पंजीकरण कराना पड़ता है और सालाना हिसाब देना पड़ता है, इसलिए इनके कुछ आंकड़े उपलब्ध है। विदेशों से धन प्राप्त करने वाली संस्थाओं की संख्या 1993-94 में 15,039 थी जो दुगनी से ज्यादा बढ़कर 2007-08 में 34,083 हो गई है। विदेश से आने वाला धन इस अवधि में 1865 करोड़ रु. से बढ़कर 9663 करोड़ रु. यानी पांच गुने से ज्यादा हो गया है। सबसे ज्यादा दान देने वाली संस्थाओं में कुछ इस प्रकार हैं: वल्र्ड विजन, गोस्पेल फॉर एशिया, प्लान इंटरनेशनल, क्रिश्चियन चिल्ड्रन फंड, कंपेशन इंटरनेशनल, डॉ. विक्रम पंडित (सभी संयुक्त राज्य अमरीका), ब्रम्हानंद सरस्वती ट्रस्ट, एक्शन ऐड इंटरनेशनल, ऑक्सफेम इंडिया ट्रस्ट, स्वामी नारायण हिन्दू मिशन (सभी ब्रिटेन) फाउन्डेशन विसेन्टे फेरर (स्पेन) आदि। देश में आने वाला 80 प्रतिशत विदेशी दान अमरीका-कनाडा-यूरोप-जापान-आस्टेªलिया-संयुक्त अरब अमीरात आदि करीब 15 देशों से आता है। पूरी दुनिया को लूट कर अमीर बने इस पूंजीवादी-साम्राज्यवादी देशों में अचानक उमड़ी इस दरियादिली और परोपकारी भावना के पीछे राज क्या है ?
विदेशी धन से चलने वाले कुछ एनजीओ के तेवर क्रांतिकारी और व्यवस्था-विरोधी भी होते हैं। वैश्वीकरण के विरोध में विश्व सामाजिक मंच तथा एशियाई सामाजिक मंच जैसे आयोजनों में भी उनकी प्रमुख भूमिका रहती है। कहीं-कहीं पर किसी मुद्दे विशेष पर जन-आंदोलन खड़ा करने में भी उनकी भूमिका रहती हैं, हालांकि कुछ आंदोलन सचेत रुप से सतर्कतापूर्वक स्वयं को विदेशी संस्थागत फंडिंग से अलग रखते हैं। फिर सैकड़ों की संख्या में एडवोकेसी संगठन भी है ही, जो किसी एक मुद्दे पर, किसी एक क्षेत्र मंे, काफी अच्छी जानकारी एवं रपट जुटाते हैं और अभियान चलाते हैं। लेकिन आगे बढ़कर, व्यवस्थागत कारणों को पहचानकर, देश बदलने वाला समग्र आंदोलन छेड़ने की दिशा में वे आगे नहीं बढ़ते, क्योंकि उसके लिए फंड नहीं मिलेगा। यह एक वैचारिक-राजनैतिक काम है और इसके लिए कोई अंतरराष्ट्रीय एजेन्सी पैसा नहीं देती। वहीं उनकी सीमा आ जाती है। उनके पैर रुक जाते हैं। इस मायने में विदेशी धन पर निर्भरता विकलांग बनाने वाली है।
 
पहले समाजसेवा एवं परोपकार के काम मूलतः स्थानीय पहल एवं भागीदारी से निःस्वार्थ तरीके से होते थे। किन्तु इनके एनजीओकरण और विदेशी दान की बाढ़ से ये सारे गुण गायब हो गए हैं। इनका चरित्र ही बदल गया है। अक्सर स्वयंसेवी संस्थाओं में समाज के बजाय स्वयं की सेवा ज्यादा होने लगी है। गरीबी और कुपोषण पर पांच सितारा होटलों के वातानुकूलित सभागारों में सेमिनार करते हुए और हवाई जहाजों एवं महंगी गाड़ियों में घूमते हुए समाजसेवा के इन चैम्पियनों के चेहरे पर शिकन भी नहीं आती। 
महात्मा गांधी --
‘‘मैं नहीं चाहता कि मेरा मकान चारों तरफ से बंद हो और खिड़कियां भी बंद होने से मेरा दम घुटे। मैं चाहता हूं कि सब जगह की संस्कृतियों की हवा मेरे मकान के आसपास बहती रहे। किन्तु मैं ऐसी हवा नहीं चाहता हूं कि मेरे पैर ही उखड़ने लगें। मैं दूसरों के घर में घुसपैठिये, भिखारी या गुलाम के रुप में रहने से इंकार करता हूं।’’  
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'Pastors trafficking NE children for church grants and foreign donations'


http://timesofindia.indiatimes.com/india/Pastors-trafficking-NE-children-for-church-grants-and-foreign-donations/articleshow/6262576.cms
NEW DELHI: Promising proper education, pastors are trafficking children from the north-eastern states to Tamil Nadu and Karnataka with an oblique motive to get grants from churches and abroad, the National Commission for Protection of Child Rights said in a damning report to the Supreme Court.

Inquring into recent rescue of hundreds of children trafficked from the NE states and housed in Homes illegally run by pastors in the southern states, NCPCR found that girls were even asked to give massage to the directors of these Homes and molested.

Analysing the situation in a detailed report, NCPCR said insurgency coupled with the virtual absence of government officials at the sub-district and block level to address the education, health and developmental problems have made the entire north-east an easy hunting ground for middlemen to lure out children from parents in the name of providing them proper education.

"All-out effort are being made by pastors and other category of persons who are reaching out to source areas through middlemen for getting children in order to obtain financial support from churches within the country or donations from outside," the NCPCR said in response to a direction from the apex court to inquire into the incidents.

The source areas for the pastors are Tamnglong, Senapati, Chandel, Bishnupur, Churachandpur and Imphal in Manipur, North Cachar Hills in Assam and Meghalaya. The destination states are TN, Karnataka, Andhra Pradesh and Kerala.

"The main reason for children being sent out by the poor parents to far off places in southern states is due to their high expectation of quality education for their children which is not available at their own places," the Commission said.

The other main reasons for the parents agreeing to send their children far away were no easy access to schools; lack of basic infrastructure such as road connectivity, power and hospitals; insurgency and lack of a sense of security among parents to send children walking to schools; poor financial status of parents preventing them from putting children in boarding schools; and absence of governance in sub-district and block level to address education, health and developmental problems of vulnerable families.

This provides a perfect opportunity for middlemen to exploit the situation and is being taken advantage of by pastors. But, the children get caught between the devil at home and the deep sea in the Homes in southern states, NCPCR said.

"Mostly these children from north-east who are brought to TN and Karnataka are put in Tamil and Kannada-medium schools for study. It is not easy for these children to have education in the languages which are not spoken in their states," the Commission said.

Apart from giving a series of recommendatory directions to the NE states to improve the educational and health facilities, NCPCR asked the Union HRD ministry to supply data about the number of schools and hostels in the north-east currently occupied by the armed forces.

While asking the HRD ministry to open Kendriya Vidyalayas, Navodaya Vidyalayas and model schools in the affected areas, the Commission said the Union home ministry must ensure that "the para-military forces vacate the schools and hostels occupied by them and submit an action taken report within two months to the SC".



शनिवार, 19 फ़रवरी 2011

केंसर का बचाव : आयुर्वेद से ....

- अरविन्द सिसोदिया 
खेजड़ी की सूखी  सांगरी , ह्रदय और कैंसर की रोकथाम में मदद गार ....
 
बीकानेर। खेजड़ी की सूखी सांगरी में ऎसा रसायन है जो दिल की बीमारी, सूजन एवं कैंसर की रोकथाम करता है। यह जानकारी भारतीय मूल के अमरीकी वैज्ञानिक डॉ. एम.जी. नैयर ने दी। वे यहां केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान में शुष्क क्षेत्रीय फल एवं सब्जियों में जैव प्रौद्योगिकी से पोषक तत्वों और औषधीय गुणों में बढोतरी तकनीक पर प्रशिक्षण सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। यहां भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की राष्ट्रीय कृषि नवाचार योजना में कृषि वैज्ञानिकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 
मैथी मधुमेह रोग प्रतिरोधी
उन्होंने बताया कि मैथी के पत्तों में ऎसा रासायनिक पदार्थ है जो सूजन एवं मधुमेह रोग प्रतिरोधी है। इसी तरह अश्वगंधा के पौधे में मिलने वाले रसायन कैंसर, अल्जीमर को रोकते हैं। डॉ. नैयर ने फल एवं सब्जियों में औषधीय गुणों वाले रासायनिक पदार्थो से औषधीय उद्यमिता व बाजार विकसित करने पर जोर दिया।

केर-काचरी भी रोग प्रतिरोधक
डॉ. सुरेश वालिया ने बताया कि बेर, अनार, बेलपत्र, फालसा, केर, काचरी, मतीरा में प्रति आक्सीकारक, एंेंथोसाइनिन, काक्सी-2 प्रतिरोधी, केरोटीन, ग्लूकोसाइडस, एल्कोलोइडस रसायन मिलते हैं। इससे अल्जीमर, सूजन, कैंसर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, डायरिया, पेचिस आदि बीमारियों की रोकथाम होती है।

काली गाजर अधिक स्वास्थ्यवर्द्धक
डॉ.चरण जीत कौर ने कहा कि काली गाजर व टमाटर औषधीय रूप से बहुत उपयोगी है। टमाटर में लाइकोपिन पदार्थ प्रोस्टेट कैंसर व ह्वदय रोग प्रतिरोधी है। संस्थान के निदेशक डॉ. एस.के.शर्मा ने कहा कि इस प्रशिक्षण से फल-सब्जियों में पोषण-औषधीय गुणों पर लोगों की चेतना बढ़ेगी।
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केंसर का फ्री इलाज......दोस्तो नमस्ते. आशा है आप सब ठीक से हैं. दो सप्ताह केलिये इंडिया जाना पड़ा. आपको मेने पहले बताया था की मेरे पिता जी को लन्ग केंसर था. दोस्तो राजेस्थान मे एक आश्रम है. व्हाँ केंसर का इलाज मुफ्त होता है. मेरे पिता जी को राजीव गाँधी केंसर हॉस्पिटल मे इलाज के समय 1 साल का समय दिया था. ये जो अश्रम मे बता
अतिरिक्त जानकारी रहा हूँ वहां इलाज बिल्कुल मुफ्त है. गले के नीचे का केंसर 6 महीने मे ओर गले से उप्पर का केंसर 9 महीने मे उनकी दवा से ठीक हो जाता है. ए हमारा अपना एकश्पीरियंस है. अगर किसी जानकार को ए स्मस्या हो तो कृपया भले के लिये जरूर बताएं. उनका पता है बाबा कमल नाथ आश्रम भिन्डुसी तिजारा राजेस्थान. ए अश्रम देल्ही से 125 किलोमीटर है .  

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केंसर का रामबाण इलाज है यह पौधा
तुलसी का पौधा कितना अनमोल है, यह इसी बात से पता चल जाता है कि इसे गुणों को देखकर इसे भगवान की तरह पूजा जाता है। यूं तो आज हर आदमी को किसी न किसी बीमारी ने अपने कब्जे में कर रखा है। लेकिन केंसर एक ऐसी बीमारी है जो लाइलाज कही जाती है।
तक इस बीमारी का कोई परमानेंट इलाज नहीं है। आज यह बीमारी तेजी से फैल रही है। वैसे तो केंसर का कोई परमानेंट इलाज नहीं है लेकिन फि र भी आर्युवेद ने तुलसी को केंसर से लडऩे का एक बड़ा तरीका बताया है। आर्युवेद में बताया गया है कि तुलसी की पत्तियों के रोजाना प्रयोग से केंसर से लड़ा जा सकता है। और इसके लगातार प्रयोग से केंसर खत्म भी हो सकता है।
- कैंसर की प्रारम्भिक अवस्था में रोगी अगर तुलसी के बीस पत्ते थोड़ा कुचलकर रोज पानी के साथ निगले तो इसे जड़ से खत्म भी किया जा सकता है।
-तुलसी के बीस पच्चीस पत्ते पीसकर एक बड़ी कटोरी दही या एक गिलास छाछ में मथकर सुबह और शाम पीएं कैंसर रोग में बहुत फायदेमंद होता है।
केंसर मरीज के लिए विशेष आहार- अंगूर का रस, अनार का रस, पेठे का रस, नारियल का पानी, जौ का पानी, छाछ, मेथी का रस, आंवला,लहसुन, नीम की पत्तियां, बथुआ, गाजर, टमाटर, पत्तागोभी, पालक और नारियल का पानी।  

कैंसर पैदा करने वाले तत्व हैं , विदेशी शीतल पेय





- अरविन्द सिसोदिया
  वाशिगटन की एक खबर ने भारतियों की आशंका को सच साबित  कर दिया  है की कोका - कला , पेप्सी और उस जैसे विदेशी शीतल पेय शारीर के लिए हानी कारक हैं .., विशेष   कर  आयुर्वेद , स्वदेशी जागरण मंच , राजीव दीक्षित और बाबा रामदेव व श्री श्री रविशंकर ने इन्हें नुकशान दायक पहले से ही बताया था ..! जो सच सवित हुआ .., एक रिसर्च ने इन से  केंसर होने का दावा करते हुए , इन्हें बंद करने की मांग की है !!!

वॉशिंगटन। कोल्ड ड्रिंक्स के हेल्थ पर खराब पर असर को लेकर चर्चा कोई नई बात नहीं है। अब यह बात सामने आ रही हैं कि कोका-कोला और पेप्सी में इस्तेमाल होने वाला तत्व की वजह से कैंसर तक हो सकता है। हेल्थ के क्षेत्र में काम करने वाली पावरफुल लॉबी ने इसे तुरंत बैन करने की मांग की है।


ब्रिटिश टैब्लॉइड ' डेली मेल ' के मुताबिक, रिसर्चरों का मानना है कि कोल्ड ड्रिंक्स में भूरा रंग लाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कलरिं एजेंट की वजह से हजारों लोगों को कैंसर हो सकता है। वॉशिंगटन डीसी के सेंटर फॉर साइंस इन द पब्लिक इंटरेस्ट (सीएसपीआई) ने कहा, 'कोका-कोला, पेप्सी और बाकी चीजों में इस्तेमाल किए जाने वाले दो केमिकल कैंसर पैदा कर सकते हैं और इन्हें बैन किया जाना चाहिए।'


'कोल्ड ड्रिंक्स और बाकी चीजों में भूरा रंग लाने के लिए चीनी को अमोनिया और सल्फाइट के साथ उच्च दबाव और तापमान पर मिलाया जाता है। इस केमिकल रिऐक्शन में दो तत्व 2-एमआई और 4-एमआई बनते हैं। सरकारी स्टडी यह बात पता चली है कि ये तत्व चूहों के फेफड़े, लीवर और थायरॉइड कैंसर का कारण बने हैं।'           अमेरिका के नैशनल टॉक्सिकोलॉजी प्रोग्राम ने कहा है कि इस बात के साफ सबूत हैं कि 2-एमआई और 4-एमआई, दोनों जानवरों में कैंसर पैदा करने वाले तत्व हैं इसलिए आदमियों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। सीएसपीआई के एग्जेक्युटिव डायरेक्टर माइकल जैकबसन ने अमेरिका के फूड रेग्युलेटर के पास इस बारे में कार्रवाई करने के लिए एक याचिका दाखिल की है। उनका कहना है, ' कैंसर पैदा करने वाले तत्वों को खाने में कोई जगह नहीं मिलनी चाहिए, खासतौर पर तब जब उनका इस्तेमाल केवल रंग के लिए किया जाता हो। '         
      अमेरिकी कानून में रंग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले चार तरह के कैरेमल में अंतर किया गया है। इनमें से दो अमोनिया के साथ बनते हैं और दो अमोनिया के बिना। सीएसपीआई अमोनिया के साथ बनने वाले दो कैरेमल पर बैन चाहती है। सीएसपीआई की बात का पांच बड़े कैंसर एक्सपर्ट समर्थन करते हैं। 
    कोल्ड ड्रिंक्स में इस्तेमाल किया जाने वाला तत्व कैरेमल 4 या अमोनिया सल्फाइट से प्रोसेस कैरेमल के नाम से जाना जाता है। सल्फाइट के बिना केवल अमोनिया के साथ बनाया जाने वाला कैरेमल 3 बियर, सोया सॉस और खाने की कई चीजों में इस्तेमाल किया जाता है। सीएसपीआई के मुताबिक जांच किए गए कोल्ड ड्रिंक्स में जितना 4एमआई पाया गया है, वह अमेरिका में हजारों लोगों में कैंसर फैला सकता है। सीएसपीआई की बात पर कोका-कोला और पेप्सी ने कुछ भी नहीं कहा है।
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नई दिल्ली : योग गुरु रामदेव ने क्रिकेटरों और फिल्म स्टारों से सॉफ्ट ड्रिंक्स की बिक्री बढ़ाने के लिए अपनी इमिज़ को नहीं बेचना चाहिए। उन्होंने कहा कि फिल्मी हस्तियों को सॉफ्ट ड्रिंक कंपनियों का ब्रैंड ऐंबैसडर नहीं बनना चाहिए। रामदेव ने कहा, ' किसी भी क्रिकेटर, फिल्मी हीरो या हीरोइन को महज पैसे के लिए खुद को नहीं बेचना चाहिए क्योंकि अगर आप दो-चार करोड़ रुपये के लिए खुद को बेच रहे हैं तो आप अपना विवेक बेच रहे हैं।' उन्होंने कहा कि देश में लोग क्रिकेटर और फिल्मी सितारों को पूजते हैं और इसके बदले में फिल्मी सितारों को अपने प्रशंसकों की सेहत का ख्याल रखना चाहिए। 
      रामदेव ने कहा, 'मुझे दुख होता है जब एक खिलाड़ी यह कहता है कि यह उसका व्यावसायिक हित है। आपके व्यावसायिक हितों से राष्ट्र हित प्रभावित होता है। अगर हम अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को नजरअंदाज करते हैं तो मुझे लगता है कि हम निदंनीय कार्य कर रहे हैं।' गौरतलब है कि क्रिकेटर एम. एस. धोनी पेप्सी का विज्ञापन करते हैं, ऐक्टर्स सैफ अली खान पेप्सी ग्रुप के चिप्स के लिए विज्ञापन करते हैं।
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  • (David McNew / Getty Images)

Center for Science in the Public Interest launches another attack -- this time against caramel coloring

February 16, 2011|By Mary Forgione, Tribune Health
If you’re not alarmed by caramel colorings, you soon might be. A consumer group has urged the FDA to ban some of them. One guess as to which group. Yes, the Center for Science in the Public Interest.
"The "caramel coloring" used in Coca-Cola, Pepsi, and other foods is contaminated with two cancer-causing chemicals and should be banned," the organization announced. Its news release helpfully links to the petition it filed with the FDA.
 

इटली का सच : प्रधानमंत्री का सैक्स स्केंडल

- अरविन्द सिसोदिया 



यह इटली का सच है की उसने यूरोप को नैतिकता नहीं दी.., इसका दर्पण वहां के प्रधान मंत्री जी स्वंय बने हुए हैं ...... 
अय्यास पी एम् को नहीं है सैक्स स्कैंडल की चिंता   
 भास्कर . कॉम की यह खबर १७-०२-११ की है ......
        रोम. इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी ने कहा है कि नाबालिग लड़की के साथ यौन सम्बंध बनाने के कथित मामले को लेकर वो ज़रा भी चिंतित नहीं हैं। बर्लुस्कोनी ने राजनीतिक विश्लेषकों की उस राय को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार पतन के कागार पर है। समाचार एजेंसी एकेआई के मुताबिक सेक्स स्कैंडल के मामले में मिलान की एक अदालत में छह अप्रैल से सुनवाई शुरू होने के सवाल पर बर्लुस्कोनी ने बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "इस मामले में ऐसा कुछ नहीं है जिससे चिंतित होने की आवश्यकता है।"
       अभियोजन पक्ष का आरोप है कि बर्लुस्कोनी ने मारेक्को नाइटक्लब की डांसर करीमा अल महरौग से उस समय पैसा देकर यौन सम्बंध स्थापित किया था, जब वह मात्र 17 वर्ष की थी। अभियोजन पक्ष ने साथ ही यह भी आरोप लगाया है कि चोरी के मामलों से बचाने के लिए उनके कार्यालय ने पुलिस पर दबाव डाला था।
     अल मेहरौग (18) ने हालांकि इस बात से इन्कार किया है कि उसने बर्लुस्कोनी के साथ यौन सम्बंध स्थापित किया था, लेकिन उसने हजारों यूरो, ऑडी कार, गहने और अन्य तरह के उपहार लेने की बात स्वीकार की है।
उधर, बर्लुस्कोनी ने मेहरौग या किसी अन्य महिला को पैसा देकर यौन सम्बंध बनाने से इंकार किया है। बर्लुस्कोनी ने कहा कि उन्होंने सिर्फ किशोरी की मदद करने की कोशिश की थी।गौरतलब है कि 74 वर्षीय बर्लुस्कोनी गबन, भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोपों का सामना कर रहे हैं लेकिन उन्होंने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है।

--- http://www.bhaskar.com/article/INT-berlusconi-to-stand-trial-in-prostitution-case%E2%80%8E-1859174.html

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१७-०२-११
एतिहासिक किले में सैक्स करता था अय्यास पीएम 
http://www.bhaskar.com/article/INT-prime-minister-silvio-berlusconi-1858990.html
रोम. इतालवी प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी रोम के बाहर एक ऐतिहासिक किले में हफ्ते में 2-3 बार सेक्स  करने के लिए जाते थे। मिलान के अभियोजकों द्वारा बर्लुस्कोनी की फोन कॉल्स की जांच के दौरान पता चला है कि वह 15वीं सदी के बने कैस्टीलो डी टोर क्रिसेंजा किले में हफ्ते में 2-3 बार युवा लड़कियों के साथ डिनर करने जाते थे।
      मालूम हो कि बर्लुस्कोनी पर धन के बदले नाबालिग के साथ सेक्स करने के आरोप में मुकदमा चलने वाला है। उन पर लगे इन ताजा-तरीन आरोपों ने उनकी छवि को और ज्यादा बिगाड़ा है। बर्लुस्कोनी के लिए कैस्टीलो डी टोर क्रिसेंजा किले में पार्टियों का आयोजन उनकी पीपुल ऑफ फ्रीडम पार्टी की सांसद मारिया रोजेरिया रोसी करती थी।
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२४-१-११
लंदन. इटली के अय्याश प्रधानमंत्री बर्लुस्कोनी के मिलान स्थित हरम में रहने वाली मॉडलों में से एक ने स्वीकार किया है कि उसने बर्लुस्कोनी के साथ सेक्स कर उनका शुक्रिया अदा किया।

मारिया इस्टर गार्सिया बर्लुस्कोनी की 14 बुंगा-बुंगा गर्ल्स में से पहली है जिसने यह मान लिया है कि वो उनके साथ सेक्स करती थी। हालांकि डोमिनिकन रिपब्लिक से आकर इटली में रह रही इस शोगर्ल मारिया पोलांको ने इस बात से इंकार कर दिया कि उसने बर्लुस्कोनी के साथ पैसों के लिए सेक्स किया।

पोलांको कहती है कि उसने बर्लुस्कोनी का शुक्रिया अदा करने के लिए उनके साथ सेक्स किया। क्योंकि बर्लुस्कोनी ने उसकी पांच साल की बेटी का इलाज कराया था और उसकी नौकरी खोजने में भी मदद की थी। 74 वर्षीय बर्लुस्कोनी के साथ सेक्स करने वाली यह मॉडल आजकल द हॉट चिक एंड द डॉर्क नाम के टीवी शो में काम कर रही है।