लोकतंत्र - लूटतंत्र : भ्रष्टाचार के नए मानक



- अरविन्द सीसोदिया 
विशाल बैतुले ने facebook पर लिखा है ....
1 लाख=1 पेटी,
1 करोड़= 1 खोखा,
500 करोड़= 1 मधुकोड़ा,
2 मधुकोड़ा =1 राडीया ,
10 राडिया= 1 कलमाड़ी,
10 कलमाड़ी = 1 राजा ,
100 राजा =1 शरद पवार ,
100 शरद पवार =1 सोनिया गाँधी
ये है आज के भ्रष्टाचार का समीकरण |
जब मेंने उनसे पूछा की भाई लालू जी और मुलायम , ललिता और सुखराम को क्यों छोड़ दिया तो उन्होंने कहा " इस तरह के बहुत से नेता हैं जो भ्रष्टाचार में लिप्त हैं .."
सच यही है की राजनीति में जिसका भी नाम चलने लगा उसी नें उससे कमाई शिरू कर दी , भूख इस तरह की है की सात पीढी का इंतजाम हो जानें पर यह सात गुणा और बड जाती है ...! कोई दल यह दावा नहीं कर सकता की उसके जनप्रतिनिधि कार्यकर्त्ता पूरी तरह से ईमानदार हैं ...! ईमानदार वही है जिसका वस नहीं चला ....!
नैतिक पतन के हालत यह हैं कि लोग यह जानते हुए कि वे चुनाव में बुरी तरह से हारेंगे ...,फिर भी चुनाव इस लिए लड़ते हैं कि चंदे का मोटा धंधा हो जायेगा !
  अब लोक तंत्र लूट तंत्र बन गया है , जिसका जहाँ बस चल रहा है वह वहां लूट रहा है !
जब नेता ही लूट रहे हैं तो बांकी चाहे प्रशासन हो , व्यापारी हो , नोकरशाह हो ...वे क्यों चूकें ....!

टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

‘फ्रीडम टु पब्लिश’ : सत्य पथ के बलिदानी महाशय राजपाल

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

गणगौर तीज शिव-पार्वती का पूजन gangour teej

"जननी जन्मभूमि स्वर्ग से महान है"।

‘‘भूरेटिया नी मानू रे’’: अंग्रेजों तुम्हारी नहीं मानूंगा - गोविन्द गुरू

सर्वप्रथम 27 दिसम्बर 1911 को गाया गया था राष्ट्रगान जन गण मन अधिनायक जय है jan-gan-man

महाराणा प्रताप कठे ? Maharana Pratap Kathe