बुधवार, 30 नवंबर 2011

एफ डी आई का प्रबल विरोध ,व्यापारियों ने भीख मांगने का पूर्व - अभ्यास.



देश के साथ सिर्फ शत्रुता......
आर्थिक उदारीकरण के नाम पर, सम्पन्न और अति सम्पन्न देशों के उद्योगपतियों और व्यापारियों को भारत बुला कर भारत के नागरिकों के उद्योग - धंधो , खेत - खलिहानों और रोजगार के अवसरों को छिनवा देने का कार्य देश के साथ सिर्फ और सिर्फ शत्रुता के अलावा और क्या कहा जा सकती है।

व्यापारियों ने भीख मांगने का पूर्व - अभ्यास.....
आज भारत के एक शहर में व्यापारियों ने कपडे उतार कर भीख मांगी और खुदरा क्षैत्र में एफ डी आई का प्रबल विरोध करते हुये कहा कांग्रेस और सोनिया गांधी की यह केन्द्र सरकार पूरे देश को भिखारी बनाने पर तुली है। आखिर आगे भीख मांगनी ही पढेगी,यह उसका पूर्व - अभ्यास है।
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रिटेल कंपनियां पहुंचाएंगी चार लाख को चोट
http://www.amarujala.com/state/Uttar-pradesh/43189-1.html

इलाहाबाद। रिटेल कारोबार में विदेशी कंपनियों की आहट जिले के कारोबारियों और उनसे जुड़े लोगों को डराने लगी है। वजह, सरकार ने तय किया है कि दस लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में बहुराष्ट्रीय कंपनियां मल्टी ब्रांड और सिंगल ब्रांड स्टोर खोल सकेंगी। कंपनियों के स्टोर से नफा-नुकसान को लेकर व्यापारियों में खौफ का माहौल है। दावा है कि जिले में खुदरा कारोबार से जुड़े लगभग चार लाख लोगों के पेट पर चोट पड़ेगी। इनमें लगभग 50 हजार व्यापारी, लगभग इतने ही लेबर और सेल्समैन, करीब 20 हजार डिलेवरीमैन तथा उनके परिवार के सदस्य हैं।

शहर में वालमार्ट या दूसरी कंपनियों के स्टोर कब खुलेंगे, अभी अनुमान लगा पाना मुश्किल है लेकिन शहर पहुंच चुकी बिग बाजार, पैंटालून, स्पेंसर, विशाल मेगा मार्ट के कारोबार को देखकर बड़ी कंपनियां संगम नगरी आने का मोह नहीं छोड़ सकेंगी। नतीजा है कि स्थानीय खुदरा व्यापारियों को दुकानदारी घटने, दुकान बंद होने और प्रतिस्पर्धी माहौल में न टिक पाने का खतरा सताने लगा है।

सरकार के दोहरे नियम इस डर को और बढ़ाते हैं। छोटे दुकानदार स्टॉक लिमिट से बंधे हैं। उल्लंघन पर धारा 3/7 में कार्रवाई होती है। बड़े रिटेल स्टोर इससे मुक्त हैं। साप्ताहिक बंदी के नियम भी उन पर लागू नहीं हैं। छोटे व्यापारियों में सरकार की इस नीति से काफी गुस्सा है। गल्ला तिलहन व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतीश केसरवानी का कहना है कि छोटे व्यापारी को जिंदा रहने के लिए कारोबार का तरीका बदलना होगा। प्रयाग व्यापार मंडल के महामंत्री विजय अरोरा एक लाख से नीचे की पूंजी वाले दुकानदारों की स्थिति को लेकर भयभीत हैं। उनका कहना है कि औसतन हर छोटी दुकान में भी एक नौकर रहता है। मालिक और नौकर का चार-चार का परिवार है तो हर दुकान से आठ लोगों के पेट पर चोट होगी। किराना कारोबारी गिरधारी अग्रवाल खुदरा कारोबार से जुड़े सेल्समैन, लेबर, डो-टू-डोर सेल्समैन, आर्डर बुकिंग सेल्समैन को लेकर चिंतित हैं। धंधा मंदा होने पर सभी प्रभावित होंगे।

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सस्ता और गुणवत्ता का दावा है झूठा

रिटेल कंपनियां ग्राहकों को सस्ता और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद देने का दावा करती हैं। परंतु इलाहाबाद डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के चेयरमैन मोहर्रम अली इससे सहमत नहीं हैं। उनकी राय में रिटेल कंपनियां एमआरपी पर बिक्री करती हैं। ज्यादातर छूट उन्हीं उत्पादों पर ग्राहकों को देती हैं जिनकी एक्सपायरी महीने-दो महीने बाद खत्म होने वाली होती है। इसके विपरीत स्थानीय रिटेलर फ्रेश उत्पादों की कीमत में भी पांच से 10 फीसदी की छूट दे रहे हैं।

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चाइनीज उत्पादों से भी नहीं सीखी सरकार

उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के नगर अध्यक्ष श्यामजी अग्रवाल सरकार की नीति पर खासे नाराज हैं। उनका कहना है कि चीन के खिलौने और इलेक्ट्रानिक्स उत्पादों ने देशी कुटीर उद्योगों को चौपट कर दिया है। विदेशी कंपनियां जहां सस्ता माल मिलेगा, खरीदेंगी और देशी बाजार में सस्ते में बेचेंगी। इससे स्थानीय कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ेगा।

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00 इलाहाबाद में

0 35 हजार दुकानें वाणिज्य कर विभाग में रजिस्टर्ड हैं। शेष करीब 10 से 15 हजार दुकानें ऐसी हैं जिन्होंने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है।

0 खुदरा कारोबार में सर्वाधिक दुकानें किराना, जनरल मर्चेंट, रेडीमेड गारमेंट्स, कपड़े और फुटवियर की हैं।

0 चाल लाख लोग प्रत्यक्ष रूप से इससे प्रभावित होंगे जबकि अप्रत्यक्ष तौर पर छह लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने का अनुमान है

0 अनुमान है कि जिले में प्रतिदिन का खुदरा कारोबार तीन से चार करोड़ रुपये का है। इसमें बड़ा हिस्सा एफएमसीजी (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) का है।

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बड़े रिटेल स्टोरों से उम्मीदें भी जवान

वालमार्ट, मेट्रो, केयर फोर, टार्गेट, टिस्को, कार्फो जैसी वैश्विक रिटेल कंपनियों से हर कोई निराश हो, ऐसा भी नहीं है। एक बड़ी रिटेल कंपनी के मैनेजर रहे मो. आदिल कहते हैं कि इससे ग्राहकों को फायदा होगा। एक छत के नीचे मनपसंद और गुणवत्तायुक्त खरीदारी का मौका मिलेगा। विदेशी उत्पाद प्रतिस्पर्धी दरों पर मिलेंगे, जो देशी खुदरा बाजार में संभव नहीं है।




भड़के व्यापारियों ने फूंका पुतला

इलाहाबाद। खुदरा कारोबार में विदेशी कंपनियों को उतरने की हरी झंडी देने के खिलाफ शहर के व्यापारी सड़क पर उतर पड़े हैं। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने चौक क्षेत्र में विधेयक की प्रतियां फूंककर विरोध जताया। साथ ही कटोरा लेकर भीख भी मांगा। प्रयाग व्यापार मंडल ने शनिवार को प्रदर्शन की चेतावनी दी है। कई अन्य व्यापारी संगठनों ने भी विरोध जताया है।

अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के मुन्ना भइया और भाजपा नेता रामजी केसरवानी की अगुवाई में व्यापारियों ने चौक में जुलूस निकाला। हाथ में कटोरा लेकर केंद्र के विधेयक का विरोध किया। व्यापारियों ने आशंका जताई कि इससे कुटीर उद्योग और फुटकर कारोबार चौपट हो जाएगा। प्रदर्शन में सफीकउल्ला, कृष्ण भगवान केसरवानी, शम्मी कपूर, प्रीतम सिंह, मो.राशिद, प्रीतम वर्मा, राजू लोचन, हसीब, मो. फारुख, श्याम केसरवानी, मनीष पुरवार आदि मौजूद रहे।

प्रयाग व्यापार मंडल की चौक घंटाघर में हुई बैठक में तय हुआ कि 26 नवंबर को विदेशी कंपनियों का चौक में पुतला फूंका जाएगा। तीन संगठनों की संयुक्त बैठक में मो. कादिर, ओंकारनाथ खन्ना, गुरुचरन अरोरा, अजीत सिंह, जोगिंदर सिंह, अनिल अरोरा, शिवशंकर सिंह आदि मौजूद रहे। इंसाफ मोर्चा के संयोजक डॉ कृष्ण मुरारी, सपा व्यापार सभा के प्रदेश सचिव सुभाष गुप्ता, सर्व समाज उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष हिमांशु खरबंदा, ऑल इंडिया किसान मजदूर सभा के राष्ट्रीय सचिव डॉ आशीष मित्तल, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के मीडिया प्रभारी अजय कुशवाहा, भाजपा महानगर इकाई के महामंत्री गणेश केसरवानी और सपा व्यापार सभा के जिलाध्यक्ष राजेश गुप्ता ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रोश जताया है।

मंगलवार, 29 नवंबर 2011

राहुल गांधी ने कहा : वंशवाद & भ्रष्टाचार .......

देश की राजनीतिक व्यवस्था में सर्वाधिक भ्रष्टाचार - कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी
जिम्मेवार कौन............?
देश पर कुछ मौंकों को छोड कर,ज्यादातर राज तो कांग्रेस का ही रहा है।


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कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने कहा- अब सिस्टम से चुनाव होगा। सबके लिए राजनीति के दरवाजे खुले होंगे। राजनीति में रिश्तेदारी नहीं चलेगी। हम वर्तमान स्थिति को बदलने की कोशिश करेंगे।
माफ करें !
वंशवादीयों के मुंह से यह शोभा नहीं देता...!!

एनजीओ : दाल में काला तो है



 दाल में काला तो है....
एनजीओ माफियाई भी एक बहुत बडा भ्रष्टाचार है........
विदेशी पैसा लेने वाले सभी एनजीओज की जांच होनी ही चाहिये.....
भारत में विदेशी पैसा लेकर उसके दुरउपयोग द्वारा अन्य निहित स्वार्थ साधना परम्परा बन गया है। इन स्वार्थ सिद्धियों के द्वारा देश को, व्यवस्था को , न्याय को और मानवता को जम कर नुकसान पहुचाया जाता है। धर्मामंतरण को धंधा बना दिया गया है। यह इसलिये संभव होता है कि सरकारें कभी यह देखती ही नहीं हैं कि पैसा आया किस लिये और खर्च कहां हो रहा है।यही कारण है कि एनजीओज चलाने वालों की जिन्दगी भी असरदार सम्पन्न व्यक्तियों की तरह होती है और मीडिया भी इनको वीआईपीओं की तरह महत्व देता है।

रविवार, 27 नवंबर 2011

चूहे की लड़ाई हाथी से ,खुदरा व्यापर क्षैत्र में बहुराष्ट्रीय व्यापार कंपनियों को प्रवेश






- अरविन्द सिसोदिया 
कई दशकों पहले एक गीत बजता था..दिए की लड़ाई हे तूफान से .., मगर सच यही हे की दिए की लड़ाई कभी तूफान से हुई ही नहीं ..,क्यों की मात्र एक छोंके ने ही दिए को बुछा दिया..., कोंगेस की वर्तमान केंद्र सरकार तो अब लगनें लगी हे की वह भारत की नहीं अमरीका की सरकार हे...! पहले भी यु पी ए १ में यही सरकार अमरीकी हितों के परमाणु बिल को पास करानें के लिए अपने ही गठबंधन से धोका करती हे..नोटों से सरकार बचाती हे...! इस बार इस सरकार ने अमरीकी और यूरोपीय हितों के लिए एकल ब्रांड में १०० प्रतिशत तक और मल्टी ब्रांड में ५१ प्रतिशत तक निवेश की अनुमति देकर देश को नए तरीके से गुलामी में फंसा दिया हे...यही कर्ण हे की पुरे भारत में एक सुर में खुदरा व्यापर क्षैत्र में बहुराष्ट्रीय व्यापार कंपनियों को प्रवेश दिए जाने का विरोध हो रहा हे..., वहीं अमरीका में भारत के इस कदम का स्वागत हो रहा हे ...यानीं की वे प्रशन्ना हें की भारतीय छोटे व्यापारियों के हितों को छिनने का अवसर मिलेगा. इन बहु राष्ट्रिय कंपनियों  का  आकर प्रकार और क्षमताएं इस तरह की  हें की छोटा व्यापारी या दुकानदार तो क्या कर पायेगा, भारत सरकार खुद असहाय हो जायेगी . इनका बजट तो कई सरकारों के बजट से भी ज्यादा का होता हे..ये देश की राजनीती को भी खरीद लेंगे...आम भारतियों का जम कर शोषण करेंगे...कुल मिला कर यह लड़ाई  हाथी  से चूहे के सामान हे...भारतीय खुदरा व्यापारी इनके आगे कहीं भी नहीं टिक पायेगा...समाज में व्यापार ही सब कुछ नहीं हे बल्कि संसाधनों का वितरण भी कोई चीज हे , खुदरा व्यापार को भारतियों से छीन कर विदेशियों को देना कौनसी  समझदारी हे..कोंग्रेस देश से कौनसी शत्रुता कर रही यह समझ से परे हे... 


लिंक .....
http://www.rajasthanpatrika.com
देशी बाजार में विदेशी दखल पर घमासान
नई दिल्ली। मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के विरोध में हंगामे के कारण शुक्रवार को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। इस विरोध ने भाजपा और वामदलों के अलावा सत्तारूढ़ यूपीए सरकार के घटक तृणमूल कांग्रेस को भी एक साथ ला खड़ा किया। सुबह लोकसभा अध्यक्ष मीराकुमार ने जैसे ही प्रश्नकाल शुरू करने की घोषणा की, समूचे विपक्ष ने एफडीआई पर सरकार के गुरूवार के फैसले के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ सदस्य आसन के नजदीक पहुंच गए। अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर तक स्थगित कर दी।
कार्यवाही 12 बजे फिर शुरू होने पर भी हंगामा नहीं रूका। कुछ सदस्यों ने अलग तेलंगाना राज्य के समर्थन में भी नारे लगाए। शोरशराबा नहीं थमता देख पीठासीन अधिकारी ने कार्यवाही सोमवार तक स्थगित कर दी। उधर, राज्यसभा में भी विपक्षी भाजपा, वाम, बीजद और सरकार को बाहर से समर्थन दे रही सपा, बसपा तथा यूपीए घटक तृणमूल के सदस्यों ने भारी हंगामा किया। एआईएडीएमके सदस्यों ने एक क्षेत्रीय अखबार की प्रतियां लहराईं। हंगामे के बीच विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने कुछ कहने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी बात शुरू नहीं कर पाए। बैठक एक बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।
निर्णय देश के लिए हितकर : सरकार : केंद्र ने एफडीआई के अपने फैसले को उचित ठहराते हुए कहा कि इसमें किसानों, छोटे दुकानदारों जैसे सभी पक्षों के हितों का ध्यान रखा गया है। यह फैसला देश के लिए हितकर है। इससे तीन वर्ष में एक करोड़ रोजगार सृजित होंगे। संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव शुक्ला ने कहा, एफडीआई का यह एकमात्र मामला नहीं है। इससे पहले भी कई क्षेत्रों में विदेशी निवेश हुए हैं, जो देश के लिए हितकर रहे हैं।'
खुदरा क्षेत्र में एफडीआई अनुमति देने से ईस्ट इंडिया कंपनी का दौर लौटने की कुछ दलों की आशंकाएं खारिज करते हुए शुक्ला ने कहा कि ऎसा संभव नहीं है। किसी भी क्षेत्र में पूंजी निवेश अच्छा ही होता है। खुदरा क्षेत्र की इन कंपनियों का संचालन भारतीय ही करेंगे। इस मामले में किसानों और छोटे दुकानदारों के हितों का ख्याल रखा गया है। साथ ही उनके संरक्षण की व्यवस्था की गई है।
तीन वर्ष में एक करोड़ रोजगार : केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि एफडीआई की अनुमति से तीन वर्ष में एक करोड़ रोजगार सृजित होंगे। घरेलू बाजार के किसी छोटे या खुदरा व्यापार पर इसका असर नहीं होगा। खुदरा कारोबारियों को घबराना नहीं चाहिए। सरकार ने घरेलू बाजार, किसान और उपभोक्ता सभी का ध्यान रखकर यह अहम फैसला किया है।
समवर्ती सूची में : शर्मा ने कहा कि एफडीआई समवर्ती सूची में है। जिस राज्य सरकार को लगता हो कि उनके यहां खुदरा कारोबार में इसकी अनुमति का विपरीत प्रभाव पडेगा, वह चाहे तो इसकी अनुमति नहीं दे। एफडीआई अनुमति का राजग के घटक अकाली दल ने स्वागत किया है। उसकी पंजाब में सरकार है। उधर, भाजपा नेता एसएस अहलूवालिया ने कहा इससे किसानों और छोटे दुकानदारों की कमर टूट जाएगी। सरकार ने एकतरफा ढंग से निर्णय लिया। विपक्ष से चर्चा नहीं की गई।
संसद की दो स्थाई समितियों ने इसके विरोध में विचार जताए थे। वहीं नील्सन शॉपर ट्रेंड इंडिया रिपोर्ट के अनुसार देश में आधुनिक व्यापारिक चलन बढ़ने के बावजूद परंपरागत किराना स्टोर मजबूत हो रहे हैं। इस मजबूती की वजह उनके पास पहुंच आसान होना, होम डिलीवरी की सुविधा तथा दुकानदार व स्थानीय ग्राहकों के बीच भरोसेमंद संबंध होना है।
तो वॉलमार्ट में लगा दूंगी आग : उमा 
भाजपा नेता उमा भारती ने लखनऊ में कहा, अगर यूपी में वॉलमार्ट का एक भी स्टोर खुला तो मैं अपने हाथों से उसमें आग लगा दूंगी। भले ही मुझे जेल हो जाए। प्रधानमंत्री ने यह कदम उठाकर सीधे-सीधे गरीबों की रोटी छीनने की कोशिश की है। मुझे प्रधानमंत्री और राहुल गांधी पर गुस्सा आ रहा है।
सरकार के तर्क
  फैसला देश के लिए हितकर। तीन वर्ष में एक करोड़ रोजगार पैदा होंगे। 
  खेती को सहारे के लिए आधारभूत ढांचा नहीं। भंडारण सुविधाएं भी नहीं। 
  किसानों को उपभोक्ता मूल्य में से मिलता है महज एक-तिहाई हिस्सा।
  कड़ी शर्तो के साथ मिलेगी बहुराष्ट्रीय कंपनियाें को इजाजत।
सरकार में विरोध
 यह गठबंधन सरकार है, किसी एक पार्टी का शासन नहीं है। हम इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं, लेकिन गठबंधन धर्म का उल्लंघन नहीं। हमें ऎसे निर्णय का विरोध करने का अघिकार है।  
सुदीप बंदोपाध्याय, स्वास्थ्य राज्यमंत्री व तृणमूल नेता
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http://visfot.com
रिटेल में पैर फैलाने का खेल
फैसला भारत सरकार का। देश में सड़क से लेकर संसद तक विरोध, लेकिन अमेरिका में स्वागत। वॉशिंगटन से जारी बयान में आधिकारिक तौर पर दलाली का काम करनेवाली अमेरिका-भारत बिजनेस परिषद ने मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) और सिंगल ब्रांड रिटेल में एफडीआई की सीमा 51 से बढ़ाकर 100 फीसदी किए जाने का स्वागत किया है। उसने केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा गुरुवार रात को लिए गए इस फैसले को ‘साहसिक’ बताया है और कहा है कि इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों और महंगाई में कमी आएगी। अमेरिका में बैठकर भारत की महंगाई की चिंता। कितनी महान आत्माएं हैं इस संसार में!!!
दूसरी तरफ शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में सरकार के फैसले के खिलाफ जमकर हंगामा हुआ और संसद की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। मुख्य विपक्षी दल बीजेपी ने खुदरा व्यापार को विदेशियों के खोलने के इस फैसले को राष्ट्रद्रोही करार दिया है। उसका कहना है कि इससे किसानों और छोटे दुकानदारों की कमर टूट जाएगी। राज्यसभा में बीजेपी के उपनेता एस एस अहलूवालिया ने कहा कि मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई के विषय पर सरकार ने एकतरफा निर्णय लिया है। इस विषय पर विपक्ष से विचार-विमर्श नहीं किया गया। संसद की दो स्थाई समितियों ने इसके विरोध में विचार व्यक्त किए थे।


यूपीए की सहयोगी पार्टी तृण मूल कांग्रेस के नेता व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने भी कहा कि इस फैसले पर पहले चर्चा की जरूरत थी। उन्होंने कैबिनेट की बैठक में इसका विरोध किया था। सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि जब संसद का सत्र चल रहा हो, तब कैबिनेट का इस तरह फैसला करना लोकतंत्र की मर्यादा के खिलाफ है। सरकार के इस कदम के खिलाफ बीजेपी नेता उमा भारती हिंसक तेवर अपनाती दिख रही हैं। उन्होंने लखनऊ में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “रिटेल क्षेत्र में विदेशी निवेश को बढ़ाने के खिलाफ मैं लखनऊ के अमीनाबाद में वॉलमार्ट का पुतला दहन करूंगी। अगर उत्तर प्रदेश में वॉलमार्ट का एक भी स्टोर खुला तो मैं अपने हाथों से उसमें आग लगा दूंगी। भले ही मुझे जेल हो जाए।”


उधर सरकार अपने फैसले को तार्किक और देश व किसानों के हित में बताने के लिए सफाई दर सफाई दिए जा रही है। संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव शुक्ला ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा कि इस मामले में किसानों और छोटे दुकानदारों के हितों का ख्याल रखा गया है और उनके संरक्षण की व्यवस्था की गई है। उन्होंने सरकार के इस फैसले से देश में ईस्ट इंडिया कंपनी का दौर लौटने की आशंकाओं को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा संभव नहीं है। किसी भी क्षेत्र में पूंजी निवेश अच्छा ही होता है और खुदरा क्षेत्र की इन कंपनियों का संचालन भारतीय ही करेंगे।


केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय ने अलग से सफाई दी है कि कैसे मल्टी ब्रांड रिटेल से किसानों से लेकर उपभोक्ता तक का फायदा होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। मंत्रालय का कहना है कि भारत दुनिया में फलों व सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। लेकिन कोल्ड स्टोरेज वगैरह की सुविधा न होने से इसका 35 से 40 फीसदी हिस्सा बरबाद हो जाएगा। मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई के साथ शर्त जोड़ी गई है कि रिटेलर इस तरह का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करेंगे। लेकिन सरकार ने इस बात का कोई जवाब नहीं दिया कि कोल्ड-चेन बनाने के लिए ऑटोमेटिव रूट से 100 फीसदी एफडीआई की इजाजत पहले से दी जा चुकी है तो अभी तक किसी विदेशी निवेशक ने इस काम में हाथ क्यों नहीं डाला?


सरकार का कहना है कि इससे एग्रो प्रोसेसिंग, अनाजों की छंटाई, मार्केटिंग, लाने-ले जाने का प्रबंधन और फ्रंट-एंड रिटेल धंधे में भारी रोजगार के अवसर पैदा होंगे। अगले पांच सालों में फ्रंट-एंड कामों में 15 लाख और बैक-एंड कामों में 17 लाख रोजगार के अवसर पैदा होंगे। वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने 40 लाख से ज्यादा रोजगार के नए अवसरों की बात की। लेकिन इस तथ्य को काटने के लिए उनके पास कोई वाजिब जवाब नहीं था कि देश में कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोजगार रिटेल व्यापार ने दे रखा है। केपीएमजी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2007-08 में रिटेल सेक्टर ने 3.31 करोड़ लोगों को रोजगार दे रखा था। इसके सामने आनंद शर्मा जी का 40 लाख का आंकड़ा कहीं नहीं टिकता।


सरकार ने यह भी बताने की कोशिश की है कि चीन जैसे देश तक ने मल्टी ब्रांड रिटेल में 100 फीसदी विदेशी निवेश की छूट दे रखी है। वहां 1996 से 2001 के बीच 600 हाइपर मार्केट खुले। लेकिन इसी दौरान किराना दुकानों की संख्या घटने के बजाय 19 लाख से बढ़कर 25 लाख हो गई। साथ ही 1992 से 2001 के दौरान रिटेल व होलसेल सेक्टर में रोजगार कर रहे लोगों की संख्या 2.80 करोड़ से बढ़कर 5.40 करोड़ हो गई। बता दें कि चीन ने 1992 से 1996 तक चुनिंदा प्रांतों के विशेष इलाकों में मल्टी ब्रांड रिटेल में 49 फीसदी एफडीआई की इजाजत दी थी। इस प्रयोग के सफल होने के बाद 100 फीसदी एफडीआई की छूट दे दी गई। इस पर भारत सरकार का कहना है कि वह भी अभी केवल दस लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में ही मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई की अनुमति दे रही है। इस तरह ऐसे स्टोर मात्र 53 शहरों में ही खुल सकेंगे, जबकि देश में कुल 8000 से ज्यादा शहर हैं।


खैर, इस सारे शब्दजाल के पीछे असली बात यही है कि सरकार वॉलमार्ट से लेकर केयरफोर और इकिया जैसे विदेशी स्टोरों को भारत में मुनाफा कमाने का मौका देना चाहती है, जबकि परिवार की तरह बेहद खराब हालात में दुकानें चलानेवाले लोग परेशान हो गए हैं कि कहीं उनका धंधा-पानी न बंद हो जाए। नोट करने की बात यह है कि वामदलों ने बैंकों के कंप्यूटरीकरण का जबरदस्त विरोध इस आधार पर किया था कि इससे रोजगार के अवसर कम हो जाएंगे। लेकिन हकीकत में रोजगार के अवसर भी बढ़ गए और ग्राहकों को बेहतर सेवा भी मिलने लग गई।

शनिवार, 26 नवंबर 2011

26/11 , सच्ची श्रृद्धांजली : चाहिये अपराधी की फांसी



- अरविन्द सिसोदिया 

26/11 , सच्ची श्रृद्धांजली : चाहिये अपराधी की फांसी 
26 नवम्बर 2008 , आज की ही दिन में, मुम्बई में 10 पाक आतंकवादी हमलावर एके 47 हाथों में लिये हुये, कई घातक हथियारों के साथ घुसे और खून की होली खेली। जिसमें 164 लोगों की नृशंस हत्या हुई और 308 लोग घायल हुये। जबावी कार्यवाही में 9 आतंकवादी मारे गये एक जिंदा पकडा गया कसाव......!!! मगर तीन साल गुजरने के बाद भी अपराधी को सजा नहीं दे पाई सरकार !!!!! यह उन शहीदों के साथ अन्याय है जिन्होने प्राणों की बाजी लगाई थी। हलांकी श्रृद्धांजली की रश्म तो पूरी तरह निभाई गई मगर सच्ची श्रृद्धांजली के इंतजार में आंखे तरस रहीं है। जिन्हे चाहिये अपराधी की फांसी................


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लिंक
http://www.bhaskar.com/article


मुंबई हमलाः मुआवजा कसाब के खर्च से भी कम, विरोध करने पर पीड़ित हिरासत में
मुंबई. मुंबई हमले के तीन साल पूरे होने पर कम मुआवजे के विरोध में मार्च कर रहे करीब 50 हमला पीड़ितों को हिरासत में लिया गया है। ये लोग बीजेपी ऑफिस से मार्च पर निकले थे। हिरासत में लिए गए लोग कम मुआवजा मिलने के विरोध में शांति मार्च कर रहे थे। 
गौरतलब है कि मुंबई हमले के एकमात्र जिंदा बचे आतंकी अजमल आमिर कसाब की सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं पर 16 करोड़ रुपए से 100 करोड़ रुपए तक खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई हमलों में मारे गए 175 लोगों के परिवारों को मुआवजों के तौर पर कुल 13.73 करोड़ रुपए दिए हैं। यह अकेले कसाब पर खर्च हुई रकम से काफी कम है।  इसी के लेकर हमला पीड़ितों में रोष व्याप्त है। 
मुंबई हमले को तीन साल पूरे, धोनी-तेंडुलकर की शहीदों को श्रद्धांजलि
मुंबई हमले को आज तीन साल पूरे हो गए। इन हमलों में शहीद हुए सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा है। महाराष्‍ट्र के सीएम पृथ्‍वीराज चव्‍हाण, उनकी सरकार के कई नेताओं, क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर और टीम इंडिया के कप्‍तान महेंद्र सिंह धोनी ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी है। 
विदेश मंत्री एस एम कृष्‍णा ने कहा है कि पाकिस्‍तान 26/11 के दोषियों पर जल्‍द कार्रवाई करे। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया है, ‘26/11 की बरसी पर मुंबई हमले में मारे गए लोगों को हमें याद करना चाहिए और उग्र धार्मिक संगठनों के खिलाफ लड़ाई के लिए संकल्‍प लेना चाहिए।’ 
सबूतों को लेकर जारी है तकरार 
देश की आर्थिक राजधानी पर हुए अब तक के सबसे बड़े आतंकी हमलों को तीन साल बीत गए लेकिन इन हमलों से जुड़े सबूतों को लेकर भारत और पाकिस्‍तान के बीच तकरार अब भी जारी है। भारत का दावा है कि उसने इस बात के पर्याप्‍त सबूत पड़ोसी मुल्‍क को सौंप दिए हैं जिसमें यह साफ है कि हमले की साजिश पाकिस्‍तान की जमीन पर ही रची गई और वहीं से आए आतंकवादियों ने इन हमलों को अंजाम दिया। जबकि पाकिस्‍तान ने मुंबई हमले के आरोपियों के खिलाफ भरोसेमंद सबूत पेश करने को कहा है कि ताकि आरोपी अदालत से अपनी रिहाई हासिल नहीं कर सकें। 
पाकिस्‍तान के गृहमंत्री रहमान मलिक ने 26/11 की तीसरी बरसी से एक दिन पहले शुक्रवार को कहा, ‘भारत ने पाकिस्‍तान को जो सबूत उपलब्ध कराए थे उसके आधार पर जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद और मुंबई हमले के दूसरे आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई, लेकिन संदिग्ध छूट गए क्‍योंकि भारत ने जो जानकारी दी वह अस्पष्ट और नाकाफी थी।' 
मलिक के मुताबिक, 'भारत की सूचना के आधार पर पाकिस्‍तान कार्रवाई करने को तैयार है और ये सूचनाएं अदालत में भी जरूरी हैं।'

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लिंक...

http://www.dw-world.de/dw/article

26/11: ख़ौफ़ और ख़ून के वे 60 घंटे
मुंबई पर 26 नवंबर 2008 के हमलों को भला कौन भूल सकता है. किस तरह 10 हमलावरों ने मुंबई को ख़ून से रंग दिया था. हमलों में 160 से ज़्यादा लोग मारे गए थे, कई घायल हुए थे. क्या हैं सबक और अदालती कार्रवाई का ताज़ा हाल.
मुंबई हमलों की छानबीन से जो कुछ सामने आया है, वह बताता है कि 10 हमलावर कराची से नाव के रास्ते मुंबई में घुसे. इस नाव पर चार भारतीय सवार थे जिन्हें किनारे तक पहुंचते पहुंचते ख़त्म कर दिया गया. रात के तक़रीबन आठ बजे थे, जब ये हमलावर कोलाबा के पास कफ़ परेड के मछली बाज़ार पर उतरे. वहां से वे चार ग्रुपों में बंट गए और टैक्सी लेकर अपनी मंज़िलों का रूख किया. कहते हैं कि इन लोगों की आपाधापी को देखकर कुछ मछुवारों को शक भी हुआ और उन्होंने पुलिस को जानकारी भी दी. लेकिन इलाक़े की पुलिस ने इस पर कोई ख़ास तवज्जो नहीं दी और न ही आगे बड़े अधिकारियों या खुफिया बलों को जानकारी दी.
रात के तक़रीबन साढ़े नौ बजे मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर गोलीबारी की ख़बर मिली. मुंबई के इस ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन के मेन हॉल में दो हमलावर घुसे और अंधाधुंध फ़ायरिंग शुरू कर दी. इनमें एक मुहम्मद अजमल क़साब था जो हमलों के दौरान गिरफ्तार इकलौता हमलावर है. दोनों के हाथ में एके47 राइफ़लें थीं और पंद्रह मिनट में ही उन्होंने 52 लोगों को मौत के घाट उतार दिया और 109 को ज़ख़्मी कर दिया.
लेकिन आतंक का यह खेल सिर्फ़ शिवाजी टर्मिनस तक सीमित न था. दक्षिणी मुंबई का लियोपोल्ड कैफ़े भी उन चंद जगहों में था जो तीन दिन तक चले इस हमले के शुरुआती निशाने थे. यह मुंबई के नामचीन रेस्त्रांओं में से एक है, इसलिए वहां हुई गोलीबारी में मारे गए 10 लोगों में कई विदेशी भी शामिल थे जबकि बहुत से घायल भी हुए. 1871 से मेहमानों की ख़ातिरदारी कर रहे लियोपोल्ड कैफ़े की दीवारों में धंसी गोलियां हमले के निशान छोड़ गईं. 10 :40 बजे विले पारले इलाक़े में एक टैक्सी को बम से उड़ाने की ख़बर मिली जिसमें ड्राइवर और एक यात्री मारा गया, तो इससे पंद्रह बीस मिनट पहले बोरीबंदर में इसी तरह के धमाके में एक टैक्सी ड्राइवर और दो यात्रियों की जानें जा चुकी थीं. तकरीबन 15 घायल भी हुए.
लेकिन आतंक की कहानी यही ख़त्म हो जाती तो शायद दुनिया मुंबई हमलों से उतना न दहलती. 26/11 के तीन बड़े मोर्चे थे मुंबई का ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट होटल और नरीमन हाउस. जब हमला हुआ तो ताज में 450 और ओबेरॉय में 380 मेहमान मौजूद थे. ख़ासतौर से ताज होटेल की इमारत से निकलता धुंआ तो बाद में हमलों की पहचान बन गया.
हमलों की अगली सुबह यानी 27 नवंबर को ख़बर आई कि ताज से सभी बंधकों को छुड़ा लिया गया है, लेकिन जैसे जैसे दिन चढ़ा तो पता चला हमलावरों ने कुछ और लोगों को अभी बंधक बना रखा है जिनमें कई विदेशी भी शामिल हैं. हमलों के दौरान दोनों ही होटल रैपिड एक्शन फोर्ड (आरपीएफ़), मैरीन कमांडो और नैशनल सिक्युरिटी गार्ड (एनएसजी) कमांडो से घिरे रहे. एक तो एनएसजी कमांडो के देर से पहुंचने के लिए सुरक्षा तंत्र की खिंचाई हुई तो हमलों की लाइव मीडिया कवरेज ने भी आतंकवादियों की ख़ासी मदद की. कहां क्या हो रहा है, सब उन्हें अंदर टीवी पर दिख रहा था.
तीन दिन तक सुरक्षा बल आतंकवादियों से जूझते रहे. इस दौरान, धमाके हुए, आग लगी, गोलियां चली और बंधकों को लेकर उम्मीद टूटती जुड़ती रही और न सिर्फ़ भारत से सवा अरब लोगों की बल्कि दुनिया भर की नज़रें ताज, ओबेरॉय और नरीमन हाउस पर टिकी रहीं.
हमले के वक्त ताज में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर यूरोपीय संघ की संसदीय समिति के कई सदस्य भी शामिल थे, हालांकि इनमें से किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ. हमलों की जब शुरुआत हुई तो यूरोपीय संसद के ब्रिटिश सदस्य सज्जाद करीम ताज की लॉबी में थे तो जर्मन सांसद एरिका मान को अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर छिपना पड़ा. ओबेरॉय में मौजूद लोगों में भी कई जाने माने लोग थे. इनमें भारतीय सांसद एनएन कृष्णादास भी शामिल थे जो ब्रिटेन के जाने माने कारोबारी सर गुलाम नून के साथ डिनर कर रहे थे.
उधर, दो हमलावरों ने मुंबई में यहूदियों के मुख्य केंद्र नरीमन पॉइंट को भी कब्ज़े में ले रखा था. कई लोगों को बंधक बनाया गया. फिर एनएसजी के कमांडोज़ ने नरीमन हाउस पर धावा बोला और घंटों चली लड़ाई के बाद हमलावरों का सफ़ाया किया गया लेकिन एक एनएसजी कमांडो की भी जान गई. हमलावरों ने इससे पहले ही रब्बी गैव्रिएल होल्ट्जबर्ग और छह महीने की उनकी गर्भवती पत्नी रिवकाह होल्ट्जबर्ग समेत कई लोगों को मौत के घाट उतार दिया. बाद में सुरक्षा बलों को वहां से कुल छह बंधकों की लाशें मिली.
29 नवंबर की सुबह तक नौ हमलावरों का सफाया हो चुका था और अजमल क़साब के तौर पर एक हमलावर पुलिस की गिरफ्त में था. स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आ चुकी थी लेकिन लगभग 170 की बलि लेकर. जिंदगी कभी नही रुकती वाली बात की खातिर मुंबई 26 /11 के बाद भी चल रही है, लेकिन इस हमले के ज़ख्मों को भूल तो कतई नहीं सकती. 
अशोक कुमार (संपादनः महेश झा)

खुदरा क्षैत्र एफ डी आई की मंजूरी का मतलब,भारतीय खुदरा तथा फुटकर व्यापार और उत्पादन क्षैत्र की बली......




- अरविन्द  सिसोदिया 
खुदरा क्षैत्र एफ डी आई की मंजूरी का मतलब...
गरीबों के जले पर नमक.....
भारतीय खुदरा तथा फुटकर व्यापार और उत्पादन क्षैत्र की बली.......
देश के आम आदमी को मंहगाई से मारते - मारते अब मनमोहन सिंह एंड सोनिया गांधी सरकार भारतीय छोटे,खुदरा तथा फुटकर दुकानदारों , उत्पानकर्ताओं के धंधे की बली लेने पर उतारू है। यह सब यूरोप और अमरीका की बडी नामी कंपनियों को लाभ पहुचानें के लिये हो रहा है। पहले एक ईस्ट इण्डिया कंपनी आई थी जिसने सैंकडों वर्षों तक देश को गुलाम बना कर रखा, स्वदेशी व्यापार और उत्पादन प्रक्रिया को नष्ट कर दिया और संशाधनों को वे ब्रिटेन लूट ले गये। अब सैंकडों ईस्ट इण्डिया कंपनीयों जैसे वालमार्ट और दूसरी बडी कंपनियां आ रहीं है। जो हमारे देश के लघु व्यापार और उत्पादन को समाप्त कर देगी। वहीं इनके दुष्प्रभाव सें सामाजिक और सांस्कृतिक सहित राजनैतिक पराभव का आसन्न संकट आ खडा होगा । एफ डी आई की अनुमति रोकने के हर कार्यक्रम का समर्थन करना चाहिये । तमाम राष्ट्रहित चिन्तकों को एक जुट हो जाना चाहिये।
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1 http://business.bhaskar.कॉम

एफडीआई में रिटेल ? ना बाबा ना, व्यापारी करेंगे विरोध
देशभर के कारोबारियों ने मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई के फैसले का विरोध किया है। कारोबारियों ने इसके खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने 1 दिसंबर को पूरे देश में थोक और रिटेल कारोबार बंद रखने की घोषणा की है। कनफेडरेशन का कहना है कि इस फैसले से छोटे व मझोले कारोबारी खत्म हो जाएंगे। इस बीच कई राज्य सरकारों ने भी मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई का विरोध किया है। हालांकि पंजाब में सत्तारूढ़ और बीजेपी के सहयोगी अकाली दल ने इसे स्वागत योग्य कदम बताया है।
फेडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री (फोर्टी) ने इस फैसले के खिलाफ जयपुर के सभी उद्योग व व्यापार संगठनों की 29 नंवबर को बैठक बुलाई है। विरोध के लिए सकल व्यापार उद्योग संघर्ष समिति का भी गठन किया गया है। फोर्टी महामंत्री प्रेम बियानी ने बताया कि मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई को मंजूरी नहीं देने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र भी लिखा गया था। लेकिन व्यापारियों के इस आग्रह को दरकिनार कर दिया गया। इस तरह सरकार ने व्यापारियों को आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया है।
इस फैसले को लेकर शुक्रवार को भोपाल में भी विभिन्न व्यापारी संगठन और व्यापारी चर्चा करते रहे। इस संबंध में भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स आगे की रणनीति पर शनिवार को बैठक करेगा। भोपाल किराना व्यापरी महासंघ ने तय किया है कि केंद्र सरकार के निर्देशों की प्रतियां जलाकर वे इसका विरोध करेंगे।
इस बीच केरल में करीब दस लाख कारोबारियों ने मल्टीब्रांड में एफडीआई के खिलाफ 29 नवंबर को कारोबार बंद रखने का ऐलान किया है। केरल के व्यापारियों के शीर्ष संगठन ने कहा है कि ज्यादातर कारोबारी छोटे और मझोले स्तर के हैं और वे इस फैसले से प्रभावित होंगे।
मल्टीब्रांड रिटेल में विदेशी निवेश का कई राज्य भी विरोध कर रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विरोध कहा है कि सरकार का यह कदम देश में बेरोजगारी बढ़ाएगा और मैं इसका पूरी तरह से विरोध करता हूं। यह जहां देश में रिटेलरों को बर्बाद कर देगा वहीं दूसरी तरफ बेरोजगारी को भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ाने वाला साबित होगा। उन्होंने कहा, मैंने सेज का भी विरोध किया था लेकिन उस पर अमल किया गया। परिणाम आज सारे देश के सामने है। हमारा देश दूसरे मॉडलों के आधार पर तरक्की नहीं कर सकता।
हमें तरक्की का अपना मॉडल विकसित करना होगा।  अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल ने केंद्र सरकार द्वारा मल्टीब्रांड रिटेल क्षेत्र में एफडीआई के फैसले का समर्थन किया है। बादल ने कहा कि इससे पंजाब के किसानों और लोगों को जबर्दस्त लाभ मिलेगा। गौरतलब है कि शिरोमणि अकाली दल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का एक महत्वपूर्ण घटक है। सप्लाई चेन में निवेश होने से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा।
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2 http://www.amarujala.com
रिटेल में एफडीआई से 'गुलाम' हो जाएगा देश
रिटेल क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के केंद्र सरकार के फैसले का उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने कड़ा विरोध किया है। मायावती ने एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि सरकार के इस फैसले से देश आर्थिक रूप से गुलाम हो जाएगा। उत्तर प्रदेश में किसी भी विदेशी रिटेल कंपनियों के खुदरा कारोबार करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
मायावती ने साफ किया कि बहुजन समाज पार्टी सरकार के इस फैसले के खिलाफ संसद में भी विरोध जताएगी। उन्होंने केंद्र सरकार से तुरंत इस निर्णय को वापस लेने की अपील की।
कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा कि राहुल ने विदेशी सोच के ‌चलते ही इस प्रस्ताव को मंजूर करने में मदद की।
रिटेल क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ सियासी भूचाल आ गया है। सरकार के घटक दल तृणमूल कांग्रेस के साथ समूचे विपक्ष ने शुक्रवार को संसद में इस मसले पर संप्रग सरकार पर निशाना साधा।


गुरुवार, 24 नवंबर 2011

शरद पंवार के थप्पड,कोई आश्चर्य नहीं




शरद पंवार के थप्पड.....
कोई आश्चर्य नहीं .......
इस कृषिमंत्री ने जनता का जीना मुश्किल कर रखा है।
गोदामों में अनाज सड़ रहा है और जनता को जबरदस्त मंहगाई छेलनी पड रही है। उसका जीना हराम हो रहा है।
घटना- दिल्ली में कृषिमंत्री शरद पवार को एक शख्स ने थप्पड़ मारा और पवार के साथ धक्कामुक्की भी की. पवार एनडीएमसी सेंटर में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने गए पहुंचे थे.समारोह के दौरान हरविंदर सिंह नाम के एक शख्स ने पवार को थप्पड़ मारा.युवक बढ़ती महंगाई और पूरी व्यवस्था से नाराज था. 

बुधवार, 23 नवंबर 2011

अब शक्कर की मंहगाई........




अब शक्कर की मंहगाई........
प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह सरकार आम नागरिक के प्रति कितनी संवेदनशील है, इसका उदाहरण है मंगलवार को मंत्रीमंडलीय समूह के द्वारा,10 लाख टन शक्कर के निर्यात की अनुमति देना। पहले ही शक्कर मंहगी हो रही थी, इससे शक्कर और मंहगी होगी। शरद पंवार के रहते खाद्य पदार्थें के बिचैलिये मजे में हैं। माल जमा करते हैं और सरकार से मिल कर मूल्यवृद्धि करवा लेते हैं और मोटा मुनाफा बसूलते हैं। भुगतना जनता को पडता है।


चीनी के दस लाख टन निर्यात की मंजूरी.....
नई दिल्ली , 22 नवम्बर 2011। कन्द्र सरकार के मंत्रीमण्डलीय समूह की हुई बैठक में, 10 लाख टन चीनी निर्यात की मंजूरी दे दी गई है। चीनी व्यापारियों पर से स्टाक लिमिट भी हटा ली गई है। सरकार के फैसले से चीनी 2 रूपये किलो मंहगी होने की आशंका है।


09 November 2011
बड़े पैमाने पर चीनी निर्यात होनी चाहिए : पवार....
केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा है कि इस साल देश में खपत से कहीं ज्यादा चीनी का उत्पादन होने की संभावना है। इस वजह से चालू मार्केटिंग सीजन में बड़े पैमाने पर चीनी का निर्यात किया जाना चाहिए। इससे विश्व बाजार के ऊंचे मूल्य से चीनी उद्योग को लाभ होगा।
पिछले अक्टूबर से शुरू हुए नए मार्केटिंग वर्ष 2011-12 के दौरान देश में 250-260 लाख टन चीनी का उत्पादन होने की संभावना है जबकि घरेलू मांग करीब 220 लाख टन रहेगी। चालू सीजन के लिए सरकार को चीनी के निर्यात के बारे में नीति तैयार करनी है। बीते सीजन के दौरान सरकार ने 26 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। इसमें से 15 लाख टन चीनी ओ जी एल के तहत निर्यात करने की मंजूरी दी गई थी।
पवार ने एक कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं को बताया कि देश में अतिरिक्त चीनी उपलब्ध होगी। इस वजह से चीनी निर्यात की अनुमति देनी चाहिए। इससे गन्ना उत्पादकों को भी इसका लाभ मिलेगा। चीनी मिलों के संगठन इस्मा ने सरकार से 40 लाख टन चीनी निर्यात करने की अनुमति देने की मांग की है। विदेशी बाजार में इस समय चीनी का भाव 670-680 डॉलर प्रति टन चल रहा है। 

सोमवार, 21 नवंबर 2011

" प्रताप गौरव केंद्र "







वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति उदयपुर


महाराणा प्रताप के यशस्वी जीवन और अन्य शौर्य पूर्ण घटनों पर आधारित " प्रताप गौरव केंद्र  " की स्थापना राजस्थान के  उदयपुर में की जा रही हे|  अनुमानित लगत १०० करोड़ रूपये मानी गई है | यह जनता के द्वारा दान तथा जन सहयोग किये जानें वाले धन से बनेगा | 


http://www.bhaskar.com/article
मेवाड़ की भक्ति और शक्ति के इतिहास का यहां होगा अनोखा संगम!


उदयपुर.शहर के टाइगर हिल क्षेत्र में 25 बीघा क्षेत्र में निर्माणाधीन प्रताप गौरव केंद्र म्यूजियम के पहले चरण का काम पूरा हो चुका है।
इसका लोकार्पण प्रताप जयंती पर होगा। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति उदयपुर की ओर से तैयार करवाए जा रहे इस म्यूजियम पर एक अरब रुपए खर्च किए जाएंगे। संपूर्ण निर्माण वर्ष 2020 तक पूरा होना है। मेवाड़ की भक्ति और शक्ति के इतिहास की जीवंत जानकारी देने वाला यह विराट केंद्र होगा।
योजना का मुख्य उद्देश्य
पर्यटन नगरी में आने वाले सैलानियों को मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराना है। यहां आने वाले व्यक्ति को बप्पारावल से महाराणा राजसिंह तक के इतिहास की जानकारी मिल सकेगी। मेवाड़ और प्रताप के इतिहास के शोधार्थियों के लिए भी मददगार होगा।
घटनाओं का जीवंत अहसास
केंद्र में दर्शकों को महाराणा प्रताप व उनके जीवन से जुड़ी 25 घटनाओं के बारे में जीवंत जानकारी मिलेगी। मैकेनाइज्ड मॉडल्स ऐतिहासिक घटनाओं का जीवंत अहसास कराएंगे। इनमें पन्नाधाय का बलिदान, हाड़ी रानी का त्याग, मीरा बाई की भक्ति, रानी पद्मिनी का जौहर आदि घटनाएं मॉडल्स के रूप में प्रदर्शित होंगी।
केंद्र में होंगे ये आकर्षण
प्रताप गौरव केंद्र  
: महाराणा प्रताप की 57 फीट ऊंची प्रतिमा
: 300 विशिष्ट चित्रों की प्रदर्शनी
: राष्ट्रीय गौरव दीर्घा
: मेवाड़ की प्रमुख जीवंत झांकियां
: मेवाड़ शोध केंद्र
: लाइट एंड शो कार्यक्रम
: प्रताप गौरव केंद्र का भव्य मॉडल
: मेवाड़ के भक्तिधाम
: भारत माता का मंदिर और ध्यान कक्ष
: शस्त्रागार व हल्दीघाटी युद्ध का चित्रण






























महाराणा प्रताप गौरव केंद्र के लिए चित्र लिक .....
http://rssjaipur.blogspot.com/2011/11/blog-post_19.हटमल
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महाराणा प्रताप की जयंती
http://arvindsisodiakota.blogspot.com/2011/06/blog-post.html
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महाराण प्रताप : सूरवीर राष्ट्रभक्त
http://arvindsisodiakota.blogspot.com/2011/05/blog-post_3843.html
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वीर सपूत महाराणा प्रताप
http://arvindsisodiakota.blogspot.com/2011/05/blog-post_30.html
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शनिवार, 12 नवंबर 2011

सी डी की आँख मिचोली ख़त्म,सरकार का नोटिस गलत : नारी मर्यादा का ध्यान सभी को रखना चाहिए








सरकार का नोटिस गलत : नारी मर्यादा का ध्यान सभी को रखना चाहिए...
१० और ११ नवम्बर को P - ७ न्यूज चेनल  ने महिपाल मदेरणा और भंवरी के संबंधों की सी डी दिखा कर, लम्बे समय से चल रही सी डी की आँख मिचोली अर्थात सस्पेंस को ख़त्म कर दिया ... में राजस्थान के  ब्यूरो चीफ  श्रीपाल सिंहजी शक्तावत को बधाई देता हूँ ...उन्होंने मदेरणा और सी बी आई को मजबूर कर दिया कि वे हाँ भरें ....  P - ७ न्यूज चेनल ने अपने मिडिया धर्म का पालन किया ..मगर इसके कुछ दृश्य आपतिजन  थे उन्हें दिखाए बिना भी काम चल सकता था | अच्छा होता की देर रात उसे दिखाते.....  मगर सरकार का  भी इस  मामले में नोटिस देना गलत इसलिए हे कि आप अनेकों सीरियलों  में , फिल्मों में भी बहुत कुछ अश्लील परोसनें की अनुमति दे रहे  हो....नारी मर्यादा का ध्यान सभी को रखना चाहिए.


सवाल यह नहीं है की महिपाल मदेरणा के  भंवरी से अनेतिक या अबैध संबंध थे...बल्कि सवाल यह है कि राजनेतिक रसूख के द्वारा, मनचाहा उपयोग कर उसे मौत  के हवाले कर दो ....!! राजनीती , माडलिंग और फिल्मो में अबैध संबंध तो आम हैं, बगेहर कम्प्रोमाइज  के बिरला ही आगे बड पाता है........,
मगर सवाल हत्या का है...अपहरण  का है...भगबान करे भंवरी  जिन्दा हो...! 
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मूल लेख का लिंक http://visfot.com/home



भंवरी की सीडी खोजनेवाले चैनल को नोटिस
राजस्थान में भंवरी देवी का भंवर गहराता ही जा रहा है. एक ओर राजस्थान की राजनीति में तूफान आया हुआ है तो दूसरी ओर दिल्ली में कांग्रेस की केन्द्रीय सरकार राजस्थान का दामन उजला बनाने में जुट गई है. जिस पी7न्यूज ने भंवरी देवी की गुप्त सीडी सार्वजनिक किया था उसे सूचना प्रसारण मंत्रालय ने नोटिस भेजा है. पी7न्यूज के साथ ही सहारा समय को भी यह नोटिस भेजा गया है.
चैनल से जुड़े सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का नोटिस आया है लेकिन साथ में चैनल में इस बात को लेकर नाराजगी भी है कि जिस खबर के लिए उन्हें प्रशंसा मिलनी चाहिए उसी खबर पर उन्हें नोटिस दिया जा रहा है. चैनल ने भंवरी देवी की कथित सीडी सार्वजनिक करके एक तरह से सीबीआई की भी मदद की है जो कि भंवरी का लाकर खोजने के बाद भी उस संदिग्ध सीडी को नहीं खोज पाई थी जिसमें आपत्तिजनक अवस्था में राजस्थान के मंत्री मदेरणा मौजूद हैं.
उधर दूसरी ओर चैनल ने इन बातों का भी खंडन किया है कि उसे सीडी किसी लाबिस्ट ने या अन्य स्रोत से उपलब्ध करवाई गई है. चैनल के एसोसिएट एडिटर अनुराग पुनेठा का कहना है कि यह सीधे हमारे राजस्थआन के ब्यूरो चीफ की कड़ी मेहनत का परिणाम है कि सीडी हमारे पास उपलब्ध है और हमने उसके कुछ हिस्से जनता के सामने सार्वजनिक किये हैं. पी7न्यूज के राजस्थान ब्यूरो चीफ श्रीपाल शक्तावत ने यह सीडी खोजी है जिसे चैनल ने सार्वजनिक किया है.
बहरहाल इस बीच चाहे सरकार का दबाव हो या फिर दर्शकों का पी7न्यूज की वेबसाइट बंद हो गई है.

गुरुवार, 10 नवंबर 2011

राजस्थानी एलबमों की अभिनैत्री भवंरीदेवी






आज दिनांक १० नवम्बर २०११ की , 
अभी ई टीवी राजस्थान पर, राजस्थानी एलबमों की अभिनैत्री भवंरीदेवी और राजस्थान सरकार में मंत्री रहे महीपाल मदेरणा की सीडी के अंश दिखाये जा रहे हैं और सीडी के सार्वजनिक होने की खबर दी जा रही है।  
भंवरी को सिर्फ मामूली नर्स बिकाऊ मीडिया के द्वारा प्रचारित करवाया जा रहा है जो की गलत है वह राजस्थानी फिल्मों / एलवमों की अभिनेत्री भी थी और प्रशिद्ध थी ....


लिंक http://hindi.webdunia.com/news-regiona

भंवरी देवी के 'एलबम' की मांग बढ़ी
बाडमेर/जयपुर, रविवार, 18 सितंबर 2011
सूर्यनगरी जोधपुर से नर्स भंवरी देवी के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने और उससे जुड़ी चर्चाओं की वजह से हाल के दिनों में जहां एक ओर राजस्थान की राजनीति में हलचल मची हुई है वहीं दूसरी ओर लोक संगीत के बाजार में यकायक उनके एलबम की मांग बढ़ गई है।
बाडमेर के म्यूजिक स्टोर विक्रेता कन्हैयालाल खोसाणी ने बताया कि बाडमेर में पहले भंवरी के वीडियो एलबम की कोई खास मांग नहीं थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से ग्राहक उसके वीडियो एलबम मांगने लगे हैं और मांग इतनी बढ़ी है कि इन वीडियो एलबम का स्टाक खत्म हो गया है।
उन्होंने कहा कि ग्राहकों की मांग को देखते हुए जोधपुर से भंवरी देवी के एलबम भेजने का ऑर्डर दिया गया लेकिन वहां से पता चला है कि उनके पास भी स्टाक खत्म हो गया है।
ऑडियो और वीडियो सीडी के एक विक्रेता ने बताया कि लोगों में भंवरी देवी प्रकरण को लेकर खासी उत्सुकता है। यही कारण है कि लोग भंवरी देवी के एलबमों की मांग कर रहे है।
उन्होंने बताया कि कुछ माह पहले तक लोक संस्कृति पर बनी भंवरी देवी की सीडी के खरीदार कभी कभार आते थे पर अब तो भंवरी देवी के एलबम खरीदने वालों की भीड़ लग गई है।
जोधपुर के बिलाडा गांव की लापता नर्स भंवरी देवी के पति द्वारा अपनी पत्नी के लापता होने में राज्य के एक काबिना मंत्री का हाथ होने की बात कहे जाने के बाद राजस्थान की राजनीति के गलियारों में जबरदस्त हलचल है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री महिपाल मदेरणा के अनुरोध पर इस मामले की जांच केन्द्रीय जांच ब्योरा को सौप दी है। मदेरणा ने लापता नर्स भंवरी देवी प्रकरण में मीडिया में खुद का नाम सामने आने पर गृहमंत्री शान्ति धारीवाल से मामले की सीबीआई से जांच करवाने का अनुरोध किया था।
जोधपुर के बिलाडा की भंवरीदेवी ने लोक संगीत से जुडे कई वीडियों एलबमों में काम किया है। भंवरी के लापता होने के बाद से उसके एलबम भी सुखिर्यों में है। पश्चिमी राजस्थान के इस इलाके में लोक देवताओं पर बने वीडियो एलबमों का बड़ा क्रेज है।
एक म्यूजिक स्टोर पर भंवरीदेवी का वीडियो एलबम खरीदने आए खियाराम ने कहा पिछले कई दिनो से अखबरों मे भंवरीदेवी के बारे में छप रहा है। ऐसे में, मैं भी एलबम खरीदने आया ह्रूं। खियाराम के मुताबिक उसने भंवरी देवी के दो-तीन एलबम के बारे में सुना था लेकिन बाडमेर में एक ही मिला है।
जोधपुर पुलिस संदिग्ध परिस्थितियों में लापता भंवरी देवी के पति की ओर से दर्ज करवाई गई गुमशुदगी रिपोर्ट पर अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
पुलिस के कई दल उत्तरप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली समेत अन्य कई राज्यों में भंवरी देवी की तलाश में गए हुए हैं, लेकिन अभी तक उनका सुराग नहीं लगा है।
इधर, राजस्थान के जन स्वास्थ्य मंत्री महिपाल मदेरणा से इस बारे में सम्पर्क करने के कई प्रयास करने के बावजूद उनसे बातचीत नहीं हो सकी। हालांकि उन्होंने गत गुरुवार को जारी लिखित बयान में कहा कि राजनीतिक कारणों से मुझे इस मामले में फंसाने का षड़यंत्र रचा जा रहा है। (भाषा)


यूपीए की अल्पमत सरकार को बचाने के लिए सांसदों को खरीदा गया -आडवाणी




जोधपुर। भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की जनचेतना यात्रा का आगाज राजस्थान में बुधवार को मारवाड़ आंचल के केन्द्र जोधपुर से हुआ। इस अवसर पर हुई जनसभा में आडवाणी व प्रतिपक्ष की नेता वसुन्धरा राजे से लेकर अनेक भाजपा नेताओं ने  कांग्रेस की आलोचना की और जन  भावना जताई कि महंगाई, भ्रष्टाचार व कालेधन जैसे मुद्दों पर अब जनता कांग्रेस से त्रस्त है और परिवर्तन चाहती है। यहां गांधी मैदान में हुई आम सभा में आडवाणी ने जहां प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह व कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी को ललकारते हुए कालेधन पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की।
जोधपुर व बाद में जैतारण, ब्यावर व अजमेर में सभाओं में आडवाणी ने  कहा कि संसद के आगामी सत्र में सरकार ने काले धन पर श्वेत पत्र जारी नहीं किया तो जनता परिवर्तन करने में देर नहीं लगाएगी। उन्होंने सांसद खरीद फरोख्त काण्ड का जिक्र करते कहा कि कांग्रेस ने पूरे लोकतंत्र को कलूषित किया है।
पूर्व उप प्रधानमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने बुधवार को गांधी मैदान से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि हिम्मत है तो दोनों देश की जनता को सच बताएं कि 2008 में यूपीए की अल्पमत सरकार को बचाने के लिए कैसे व कितने करोड़ रु. में  सांसदों को खरीदा गया।आडवाणी राजस्थान में जनचेतना यात्रा की शुरुआत के अवसर पर जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह देश को कलुषित करने वाला कांड था। इस अपराध के लिए देश उनको माफ नहीं कर सकता।

आडवाणी ने दोनों को चुनौती देते हुए कहा, ‘वे जानते हैं कि यह कैसे किया, लेकिन दोनों ने चुप्पी साध ली। यह तो भाजपा के तीन सांसद थे, जिन्होंने सारी दुनिया के सामने टेलीविजन पर दिखाया कि विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में यह क्या हो रहा है।
राष्ट्रपति ने सोनिया व मनमोहन सिंह से कह दिया था कि बहुमत प्रमाणित किए बिना आगे सरकार नहीं चल सकती। इसके बाद तारीख तय हो गई कि किस दिन बहुमत का प्रस्ताव रखा जाएगा। फिर कांग्रेस सक्रिय हो गई।’ आडवाणी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के लोगों व कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कहा गया कि विपक्ष के सांसद जितने पैसों में खरीदे जा सकते हैं, उन्हें दो, चार, पांच या दस करोड़ रुपए देक खरीदो। 

भ्रष्टाचार में घिरे कांग्रेस के सभी मंत्रियों को दंडित नहीं किया जाएगा तब तक देशवासियों को संतुष्टि नहीं मिलेगी। कालाधन देश में वापस आएगा तो भारत के सभी गांवों का विकास होगा।
सभा को प्रतिपक्ष की नेता वसुन्धरा राजे . प्रदेशाध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी, पूर्व वित्त मंत्री जसवंत सिंह जसोल, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश माथुर, पूर्व केन्द्रीय मंत्री अनंत कुमार सहित कई अन्य पदाघिकारियों ने संबोघित किया।



बुधवार, 9 नवंबर 2011

पाकिस्तान में महा चरमपंथ का राज



अति कट्टरवाद ...
पाकिस्तान का निर्माण ही साम्रदायिक आधार पर हुआ , उसमें रहने वालों और शासन करने वालों की मानसिकता भी वही रही ... विश्व के अन्य देशों को उस पर कठोर नियंत्रण रखना चाहिए था.., मगर अमरीका, ब्रिटेन  सहित तम देशों ने उसकी हर नाजायज बात का पक्ष लिया , अमरीका और ब्रिटेन के कुछ कुछ भुगता है ...!!! मगर अब इन्होनें ठीक से पाकिस्तान पर सिकंजा नहीं कसा तो , बड़े नुकशान को उठाना  पडेगा...   
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"पाकिस्तान में चरमपंथ का राज"
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जर्मनी की ग्रीन पार्टी की करीबी संस्था हाइनरिष बोएल में काम करने वाले ग्रेगर एन्स्टे पाकिस्तान में पांच साल रहे. उन्होंने जो महसूस किया, उसे डॉयचे वेले के साथ एक इंटरव्यू में साझा किया. ग्राहम लूकस से बातचीत के अंश.
पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान में चरमपंथ बहुत बढ़ गया है. पिछले तीन दशकों में हजारों धार्मिक स्कूल खुल गए हैं, जो युवाओं में पश्चिम के खिलाफ भावनाएं भरने का काम कर रहे हैं. उनका पहला लक्ष्य धार्मिक आधार पर राष्ट्र चलाना है. पाकिस्तान में आतंकवाद पनपाने वाली संस्थाएं काफी सालों से बड़े धड़ल्ले से काम कर रही हैं. उन्हें कभी कभी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का समर्थन हासिल रहता है. समझा जाता है कि आईएसआई का तालिबान से भी संबंध है. हाल में धर्मनिरपेक्ष छवि वाले पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर की हत्या कर दी गई. उन्होंने ईशनिंदा कानून का विरोध किया था और हैरत की बात है कि उनके कथित हत्यारों को भी पाकिस्तान में अच्छा खासा समर्थन मिला.


डॉयचे वेलेः आपने पांच साल पाकिस्तान में बिताए हैं. आप उस देश के भविष्य के बारे में क्या कहना चाहते हैं.


ग्रेगर एन्स्टेः मैं किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाया हूं. मैं सिर्फ एक बात कह सकता हूं, दुर्भाग्यपूर्ण है कि पाकिस्तान गलत रास्ते पर जा रहा है. मैं यह बात भारी मन से कह रहा हूं. लेकिन अभी वहां अफरा तफरी नहीं मची है, जैसा अहमद रशीद ने अपनी ताजा किताब में लिखा है. लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि वह धार्मिक कट्टरवादी समाज की ओर बढ़ रहा है. ऐसा समाज, जहां उदारवादी लोगों के लिए जगह घट रही है, खुलेपन की जगह घट रही है और दुर्भाग्य से ऐसा समाज बन रहा है, जहां का राजनीतिक धड़ा अपना ही विरोध कर रहा है.


डॉयचे वेलेः सलमान तासीर की हत्या के बाद आपने लोगों में क्या प्रतिक्रिया देखी.


ग्रेगर एन्स्टेः मुझे सदमा पहुंचा. बहुत बड़ा सदमा. खास तौर पर पढ़े लिखे युवाओं ने जिस तरह से प्रतिक्रिया दी. मुझे जो लगा कि लाहौर यूनिवर्सिटी जैसी जगहों पर भी युवाओं के दिमाग में कट्टरवादी सोच भरी जा रही है. जो दूसरी खतरनाक बात मैंने महसूस की, जो दो साल पहले वकीलों के संघर्ष के रूप में पाकिस्तान में उम्मीद की किरण दिख रही थी, जो पाकिस्तान में कानून का राज स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे, जो पाकिस्तान में लोकतंत्र का समर्थन कर रहे थे, वे लोग तासीर के हत्यारे पर फूल की पत्तियां न्योछावर कर रहे थे.


इसलिए मेरे जैसे शख्स के लिए यह एक सदमा था, जिसने पांच साल पाकिस्तान में बिताए, जिसने पाकिस्तान को एक दोस्त की तरह अलविदा कहा, निजी दोस्त की तरह. मुझे समझ नहीं आया कि पाकिस्तान के समाज ने ऐसी प्रतिक्रिया क्यों दी.


डॉयचे वेलेः क्या आपको लगता है कि पाकिस्तान की सरकार चरमपंथ पर काबू पाने के लिए पर्याप्त कदम उठा रही है.


ग्रेगर एन्स्टेः नहीं, निश्चित तौर पर नहीं. और मुझे इस बात का डर है कि कहीं पाकिस्तान के अंदर के इस दुश्मन के खिलाफ कदम उठाने में बहुत देर न हो जाए. पाकिस्तान के अंदर जो दुश्मन है वह लोगों का कट्टरपंथी होना है. चरमपंथी कट्टरवादियों के कहे अनुसार काम करना है. एक चरमपंथी अल्पसंख्यक बहुसंख्यक पर राज कर रहा है. और पाकिस्तान सरकार निश्चित तौर पर बहुत नहीं कर रही है. मैं आपको एक उदाहरण देता हूं. पिछले साल जब मैं पाकिस्तान में था और लाहौर में काम कर रहा था, तो मैंने देखा कि बड़े चौराहों और जंक्शनों पर अहमदिया मुसलमानों के खिलाफ बड़े पोस्टर लगाए जा रहे थे, जिनमें कहा गया था कि अहमदिया मुसलमान नहीं हैं और उन्हें मार दिया जाना चाहिए. लाहौर के बड़े चौराहों पर लगाए गए इन पोस्टरों को पाकिस्तानी लोग और वहां का प्रशासन बर्दाश्त कर रहा था. वे निश्चित तौर पर बहुत नहीं कर रहे थे. उसके बाद क्या हुआ? एक बम धमाका, अहमदिया समुदाय की एक मस्जिद पर हमला, जिसमें 60-70 लोग मारे गए और समाज से बेहद खराब प्रतिक्रिया. मीडिया से बेहद खराब प्रतिक्रिया. मैं इसे मौन साजिश का रूप समझता हूं.
दूसरे, मैं पंजाब के पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएलएन) सरकार की बात करता हूं. उस घटना के एक दो महीने पहले पंजाब के चुने हुए मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बयान में पाकिस्तानी तालिबान तहरीके तालिबान को संबोधित करते हुए कहा, "मेरे प्यारे भाइयो, आप हम पर हमला क्यों कर रहे हैं. आखिर में तो हम एक ही देश के हैं और एक ही दुश्मन से मुकाबला कर रहे हैं. हम पश्चिमी सीमा पर अमेरिका से जंग कर रहे हैं." मैं इसे पाकिस्तान के अंदर आतंकवाद के खिलाफ सही जंग नहीं मानता.
मैं एक और बयान की बात करता हूं. मुंबई पर हुए आतंकवादी धमाके के फौरन बाद, जहां निश्चित तौर पर आईएसआई के समर्थन से एक संस्था ने मुंबई के होटलों पर हमला किया था. इसके बाद एक दो हफ्तों तक इस बात पर चर्चा चलती रही कि भारत के साथ कैसे बात करनी है. उस वक्त पीएलएमएन के मुखिया नवाज शरीफ का एक बयान आया कि जब पूर्वी सीमा पर हमारे असली दुश्मन से जंग की बात आएगी, तो तालिबान हमारा साथ देगा. मैं यह कहना चाहता हूं कि वहां आतंकवाद से निपटने और चरमपंथ के खिलाफ बहुत कमजोर प्रतिक्रिया है.
डॉयचे वेलेः इसका मतलब कि पाकिस्तान के संभ्रांत लोग भारत विरोधी भावना से इस कदर प्रभावित हैं कि वे इन सब बातों को बर्दाश्त कर रहे हैं.
ग्रेगर एन्स्टेः दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि यह सही है. मैं ऐसा ही समझता हूं.
इंटरव्यूः ग्राहम लूकस
संपादनः ए जमाल/आभा एम

पाकिस्तान में फिर हिन्दुओं की हत्या




भारत सरकार की लगातार , हिन्दू विरोधी निति का नतीजा यह निकला की पाकिस्तान सहित दुनिया में कहीं भी , कोई भी हिन्दू को कुछ  तो  भी बोल देता है , कोई भी अपराध कर देता है.., खरगोश के शिकार की तरह हिन्दू का कहीं भी कोई भी कुछ भी कर ले , कोई न बोलने बाला न कोई विरोध करने वाला .., आज पाकिस्तान में हिन्दू मात्र २ प्रतिशत क्यों रह गया ....? कोई जवाब देगा...?
 मेरा मन है की भारत सरकार को हिदुओं के मानव अधिकारों के सन्दर्भ  में प्रखरता से बात रखनी चाहिए...जो की अभी तक कभी भी देखनें में नहीं आई.........
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पाकिस्तान में चार हिंदू डॉक्टरों की हत्या
पाकिस्तान के दक्षिणी सिंध प्रांत में बंदूकधारियों ने चार हिंदू डॉक्टरों की हत्या कर दी है जिसके बाद अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय में दहशत है. यह घटना सोमवार को प्रांतीय राजधानी कराची से 400 किलोमीटर दूर चक कस्बे में हुई.
प्रांतीय असेंबली के पूर्व सदस्य और पाकिस्तान हिंदू परिषद के संरक्षक डॉक्टर रमेश कुमार ने पुष्टि की है कि डॉक्टर अशोक, डॉक्टर नरेश, डॉक्टर अजीत और डॉक्टर सत्य पॉल की हथियारबंद लोगों ने हत्या कर दी है. वारदात के वक्त ये डॉक्टर अपने क्लीनिक पर काम कर रहे थे.
डॉक्टर कुमार ने पीटीआई को बताया, "यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह हमारे समुदाय के लोगों को निशाना बनाने की घटना हुई है. चिंता वाली बात तो यह है कि कानून लागू करने वाली एजेंसियां ऐसे अपराधों में लिप्त लोगों का साथ देती हैं."
पुलिस का कहना है कि इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है. बाकी लोगों की धरपकड़ के लिए तलाशी अभियान चल रहा है. डॉ. कुमार कहते हैं, "चक में हिंदू की 50,000 की बड़ी आबादी है, तो वहां ऐसी घटना का होना गलत है. सरकार को इसका नोटिस लेना चाहिए और अल्पसंख्यकों को सुरक्षा दी जानी चाहिए."
डॉक्टरों की हत्या की निंदा करते हुए पाकिस्तान हिंदू परिषद ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, चीफ जस्टिस इफ्तिखार चौधरी और सेना प्रमुख अश्फाक कयानी से अपील की है कि सिंध के अलग अलग हिस्सों में हिंदुओं पर हो रहे हमलों को रोका जाए. पाकिस्तान की 17.5 करोड़ की आबादी में हिंदुओं की संख्या दो प्रतिशत से भी कम है. पाकिस्तान की 95 फीसदी आबादी मुसलमानों की है. वहां हिंदुओं के अलावा अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय के खिलाफ हमले और भेदभाव की खबरें अकसर आती रहती हैं.
रिपोर्टः पीटीआई

मंगलवार, 8 नवंबर 2011

भंवरी का भंवर ...इन्द्रा के आरोप...


सीबीआई का राजनैतिक दुरउपयोग
अब साफ लगने लगा है कि भंवरी को बदनाम कर उसकी हत्या को जायज ठहराने के मकसद पर सीबीआई जुट गई है......? वह 15 वर्ष से लगातार राजस्थानी भाषा की एलबमों की अभिनेत्री है भंवरी की सम्पन्नता में उसका भी बडा हाथ है। मगर उसे मामूली एएनएम बताया जा रहा है। जो - जो बातें उसके खिलाफ जा सकती हैं उन्हे मीडिया में लीक कर छपवाया जा रहा है। मगर उन सीडीयों में राजस्थान सरकार के मंत्रियों की और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका क्या - क्या हैं उन्हे आसानीं से ढांकां जा रहा है। यह सीबीआई का राजनैतिक दुरउपयोग है। 
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http://www.bhaskar.com/article/NAT-bhanwari-devi-sex-cd-2549594.html
भंवरी सेक्स सीडी केस : तस्वीरों में देखें भंवरी के कई रूप
दैनिक भास्कर - ‎
कुछेक हजार की सरकारी नौकरी करने वाली भंवरी देवी के कारण राजस्थान की राजनीति में बवाल आया हुआ। दावा किया जा रहा है कि कई मंत्रियों और अधिकारियों से निकट के संबंध के कारण उसका पहले अपहरण हुआ और फिर हत्या। भंवरी कहां है? किसी को नहीं पता। यह मानकर चला जा रहा है कि उसकी हत्या हो चुकी है। लेकिन भंवरी के कारण एक बार फिर से यह साफ हो गया है कि अति महत्वाकांक्षा की कीमत एक महिला को कैसे चुकानी पड़ सकती है।
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दैनिक भास्कर - ‎
जोधपुर. लूणी विधायक मलखान सिंह विश्नोई की बहन इंद्रा विश्नोई ने खुद को बेकसूर बताते हुए दावा किया है कि लापता एएनएम भंवरी देवी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की थी और पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा की अश्लील सीडी के बारे में भी उन्हें बताया था। इस पर उन्होंने मदेरणा को भंवरी से मिलकर सुलह करने को कहा था। इंद्रा ने सोमवार को भास्कर से बातचीत में यह खुलासा किया। इसकी वीडियो रिकॉर्डिग भास्कर के पास है।
भंवरी के साथ ऑडियो कैसेट में सीडी के बारे में बातचीत करने की वजह से इंद्रा जांच के दायरे में है। इंद्रा ने बताया कि भंवरी उसकी भी परिचित थी। भंवरी ने उसे अश्लील सीडी के बारे में बताया था। इंद्रा ने कहा कि भंवरी व उसकी ऑडियो टेप करीब एक साल पुरानी है। 
सांसद बद्री जाखड़ को पता था 
इंद्रा ने बताया कि भंवरी को पाली के सांसद बद्रीराम जाखड़ ने मुंहबोली बेटी बना रखा था। जाखड़ को इस सीडी के बारे में पता चलने पर वे उससे सीडी लेना चाहते थे। बाद में भंवरी ने बताया कि सौदा नहीं बैठा। पैसे कम थे।  
५ करोड़ थारा, अर २ करोड़ म्हारा
उल्लेखनीय है कि अब यह बयान देने वाली इंद्रा से भंवरी की बातचीत का जो ऑडियो टेप आया है उसमें खुद भंवरी इंद्रा से कहती है कि पांच करोड़ थारा, अर दो करोड़ म्हारा। लेकिन इंद्रा ने यह भी कहा कि बातचीत किसने टेप की उसे पता नहीं है, जबकि ऑडियो टेप में खुद भंवरी इंद्रा पर फोन टेपिंग का आरोप लगाते हुए उसे अपशब्द कहती है। 
ब्लैकमेलिंग का बदला सीडी 
इंद्रा के अनुसार भंवरी ने उसे बताया था कि मदेरणा उसे ब्लैकमेल कर रहे थे। इसलिए बाद में भंवरी ने मदेरणा की सीडी बना ली। इंद्रा ने कहा कि सीबीआई एक ऑडियो टेप के आधार पर मुझसे तो पूछताछ कर रही है, मगर असली गुनहगारों को आज तक नहीं बुलाया। पूछताछ करनी है तो लीला और महिपाल मदेरणा से करें। उसने कहा- किसी दबाव के कारण मुझे फंसाने की साजिश की जा रही है।  
भंवरी ३१ दिसंबर को मेरे घर आई थी : इंद्रा
इंद्रा ने कहा कि आखिरी बार पिछले ३१ दिसंबर को भंवरी मेरे घर आई थी। उसके बाद हम नहीं मिले। इंद्रा ने दावा किया कि भंवरी के मुख्यमंत्री से मिलने के बाद मदेरणा ने जोधपुर में रेजिडेंसी रोड स्थित एक होटल के पास भंवरी से मुलाकात की और उसे कार में बिठाकर ले गए थे।
ध्यान नहीं कि भंवरी मुझसे मिली थी : गहलोत
मुझसे हर रोज हजारों लोग मिलते हैं। मुझे तो ध्यान नहीं कि भंवरी कभी मुझसे मिली होगी। मेरे लिए तो यह (इंद्रा का बयान कि भंवरी ने मुख्यमंत्री को अश्लील सीडी की जानकारी दी थी) न्यूज है। 
-अशोक गहलोत, मुख्यमंत्री
मैं तो दिल्ली गया हुआ था। आज ही लौटा हूं। मैंने इंद्रा की बात नहीं सुनी है। इसलिए कुछ नहीं कह सकता।
-मलखान सिंह, विधायक
मेरे पास गैस एजेंसी मांगने आई थी : जाखड़
सांसद बद्रीराम जाखड़ ने कहा कि भंवरी से मेरा बेटी-वेटी का कोई रिश्ता नहीं था। मैं उसे जानता भी नहीं। एक बार दिल्ली में मेरे पास गैस एजेंसी मांगने आई थी। मैंने कहा- मैं तुम्हें जानता ही नहीं तो एजेंसी कैसे दिलवा दूं। उसने कहा- मैंने चुनाव में काम किया था तो मैंने कहा- मुझे नहीं पता।
लॉकर खोलने की कहानी झूठी निकली
सीबीआई ने प्रेस नोट जारी कर कहा है कि अजमेर के एक बैंक लॉकर से 150 सीडी मिलने की खबर गलत है। इसमें नाममात्र भी सत्यता नहीं है। सीबीआई ने सोमवार को इंद्रा से फिर पूछताछ की। बोरुंदा के निलंबित, पुलिस चौकी प्रभारी लाखाराम से भी पूछताछ की गई। इस बीच पूर्व उप जिला प्रमुख सहीराम की तलाश में कई जगह छापामारी की गई। ब्यूरो को गैस एजेंसी संचालक घनश्याम चौधरी और नर्स कुसुम की भी तलाश है।




रविवार, 6 नवंबर 2011

भंवरी: आधुनिक राजनैतिक भोग विलास



भंवरी कांड पर अब बहुत जल्द, सारे पर्दे उठाने का दावा होने वाला है।
मगर अभी तक तो इसी बात पर अधिक बल दिया जा रहा है कि..,
भंवरी चरित्रहीन थी भंवरी ब्लेक मेल कर रही थी। 
भंवरी के पास इतनी सम्पत्ती कहां से आई।
भंवरी की सम्पती की आज कीमत इतनी है। 
आदि आदि... भंवरी राजस्थानी एलबमों में काम करती थी सो पैसा तो उस पर पहले से ही था वह राजस्थान की एक क्षैत्रीय अभिनैत्री थी।।
मगर यह कोई नहीं कह रहा कि राजस्थान के मंत्रियों को फिसलने को किसने कहा था ? राजस्थान के प्रसाशनिक अधिकारियों को किसने कहा कि तुम भंवरी के नजदीक जाओ ?? भंवरी ने मौज उडाई या उसे मजबूर किया.....??? भंवरी कौन है, कहां की है, किस तरह की है, यह तो सब पूर्व बिदित था!!!! उस पर मेहरवानी करने की अतिरिक्त चिंता मंत्रीजी ने क्यों की ......????? गिरेवान में आधुनिक राजवाडों को झांकना ही होगा कि हम तो मनोवृति से आज भी सामंतशाही से ही ग्रस्त हैं।
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3 मंत्रियों,3 आईएएस अफसरों से हैं भंवरी के रिश्ते!
 bhaskar news   |   06/11/2011
जोधपुर.करीब दो माह के अनुसंधान एवं चर्चाओं से यह साफ हो रहा है कि पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा के अलावा तीन और मंत्रियों, तीन आईएएस अधिकारियों, परसराम विश्नोई सहित कांग्रेस के दो पूर्व पदाधिकारियों तथा दो पूर्व विधायकों का भंवरी से संबंध रहा है।
हालांकि, सीबीआई सूत्रों ने इसकी पुष्टि नहीं की है। यह अलग बात है कि अब अनुसंधान इसी ओर बढ़ रहा है कि भंवरी को फाइनेंस करने वाले बड़े लोग कौन थे और एएनएम के अपहरण में उनकी क्या भूमिका रही?
पुलिस और सीबीआई के अनुसंधान में यह सामने आ चुका है कि मलखान, महिपाल, परसराम विश्नोई, पूर्व उपजिला प्रमुख सहीराम विश्नोई, मलखान की बहन इन्द्रा विश्नोई, ठेकेदार सोहनलाल, बिलाड़ा प्रधान कुसुम और शहाबुद्दीन का भंवरी से नजदीकी रिश्ता रहा है। 
एएनएम से रिश्ता रखने वालों में तीन आईएएस अफसर, दो और मंत्रियों, कांग्रेस के पूर्व पदाधिकारी और दो पूर्व विधायकों के नाम भी चर्चा में हैं, लेकिन ये हैं कौन? इसके बारे में न पुलिस ने आज तक खुलासा किया न ही अब सीबीआई कर रही है। 
चर्चा यह भी है कि भंवरी को गायब करवाने में किसी बड़े नेता का तो हाथ नहीं है। संदेह की सुई इस वजह से भी इन बड़े लोगों की तरफ है कि अब तक भंवरी से जुड़े तीन ऑडियो बाहर आए हैं जिनमें साफ लग रहा है कि भंवरी की महत्वाकांक्षा बहुत बढ़ गई थी। इनमें एक जगह यह बात सामने आई है कि नई दिल्ली की एक पार्टी से भंवरी व सोहनलाल को सात करोड़ रुपए मिलने वाले थे?
सीबीआई के साथ सब जानना चाहते हैं कि ये पैसे दे कौन रहा था और क्यों? यह साफ है कि इतनी बड़ी रकम देने वाला कोई साधारण आदमी नहीं हो सकता। 
भंवरी को कौन-कौन करता रहा फाइनेंस 
एएनएम की नौकरी और करोड़ों की चल-अचल संपत्ति, बोरुंदा में आलीशान मकान। अजमेर में 70 लाख की कीमत का भूखंड। दो कार और जोधपुर में प्रोपर्टी। सीबीआई अब इसकी पड़ताल कर रही है कि आखिर एएनएम भंवरी देवी के पास इतनी संपत्ति आई कैसे? उसे फाइनेंस करने वालों में कौन-कौन बड़े लोग शामिल रहे हैं? अथवा इसके स्रोत क्या है? 
इसकी तहकीकात के पीछे वजह यह बताई जा रही है कि भंवरी से ताल्लुकात रखने वाले किसी नेता का ही साथ उसे गायब करने में तो नहीं है। इसके लिए जोधपुर एवं अजमेर में भंवरी की संपत्ति के बारे में पूरी छानबीन की जा रही है। 
शहाबुद्दीन को जेल, सहीराम भगोड़ा घोषित 
लापता एएनएम भंवरी देवी के मामले में 22 अक्टूबर को अदालत में आत्मसमर्पण करने वाले आरोपी शहाबुद्दीन को अपर मुख्य मजिस्ट्रेट जोधपुर महानगर (सीबीआई मामलात) जगदीश प्रसाद जाणी ने शनिवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 
वह समर्पण किए जाने के बाद से ही रिमांड पर था। रिमांड अवधि पूरी होने पर शनिवार को उसे अदालत में पेश किया गया था। इसके साथ ही इस मामले में फरार एक अन्य आरोपी पूर्व जिला प्रमुख सहीराम को भगोड़ा घोषित करने का आवेदन न्यायालय ने स्वीकार कर लिया। 
एएनएम की नौकरी, पर करोड़ों की संपत्ति कैसे? 
भंवरी एएनएम थी, लेकिन उसके पास करोड़ों की चल-अचल संपत्ति है। बोरुंदा में आलीशान मकान, अजमेर में 70 लाख की कीमत का भूखंड। दो कार और जोधपुर में प्रॉपर्टी।  
सीबीआई अब इसकी पड़ताल कर रही है कि आखिर उसके पास इतनी संपत्ति आई कैसे? उसे फाइनेंस करने वालों में कौन-कौन बड़े लोग हैं या इसके स्रोत क्या हैं? इसकी तहकीकात के पीछे वजह यह बताई जा रही है कि भंवरी से ताल्लुकात रखने वाले किसी नेता का ही साथ उसे गायब करने में तो नहीं है। इसके लिए जोधपुर एवं अजमेर में भंवरी की संपत्ति के बारे में पूरी छानबीन की जा रही है।