प्रतिनिधि प्रणाली का सबसे बडा दोष है......भ्रष्टाचार..!!!

-अरविन्द सीसौदिया
एक तरफ पूरा देश अन्ना की जीत के जश्न में ढूबा है....!! दूसरी तरफ राजस्थान में कृषि उपज मण्डी समितियों के 11 संचालकों के लिये चुनाव के लिये हुये...., कृषक वर्ग के 8 वार्डों के लिये मतदाता पंचायतीराज के जनप्रतिनिधि थे.....!!! पंच से लेकर जिला परिषद सदस्य तक..., कृछ चुनाव लडने वाले मेरे मित्र भी थे..!! उन्होने बताया कि वोट के लिये जम कर खरीद फरोफत हुई..., एक वोट पर खर्चा 20 हजार रूपये तक हुआ ।...कहीं 55 - 60 वोट थे तो कहीं 150 के लगभग ....!! 
वोट हुए 25 अगस्त को ,गिनती हुई 29 अगस्त को .., अध्यक्ष का चुनाव 14 सितम्बर को ..., यानी खरीद फरोख्त अब चुने संचालकों की होगी....., बोली लगेगी...!! जैसी मण्डी वैसी बोली...!!!
इसी तरह से कुछ दिन पहले चम्बल के सिंचाई तंत्र के अध्यक्ष के चुनाव थे..!! न जिलावाद चला .., न क्षैत्रवाद चला.., न पार्टीवाद चला..., अध्यक्ष वहां का बना जंहा के सबसे कम वोट थेकृ।। क्यों कि भारी बोली में जिसने 50 लाख खर्च किये वह पद ले गया....!!! 
प्रतिनिधि प्रणाली का यह सबसे बडा दोष है कि मुखिया चुनने का सौदा होता है। मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री चुनने के बदले डी एम के ने दूरचसंचार विभाग लिया और उसमें मनचाहा भ्रष्टाचार किया...!! पी एम को जानकर भी खामोश रहना पडा....!! क्यों कि यह समर्थन की कीमत थी..!!
मगर यदि जनता को ही मुखिया चुनने का अधिकार दे दिया जाये तो यह फुटकर बिक्री तो बंद हो...!! जब तक नेता बिक्री होती रहेगी..., तब तक भ्रष्टाचार नहीं मिटेगा...!! नेता बिक्री पर रोक के लिये हमें चुनाव प्रणाली बदलनी होगी....!!!!
       

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