ओस की बूंदों सी होती हैं बेटियां - नन्द किशोर हटवाल

ओस की बूंदों सी होती हैं बेटियां
ज़रा भी दर्द हो तो रोती हैं बेटियां .
रोशन करेगा बेटा एक ही कुल को ,
दो-दो कुलों की लाज ढोती हैं बेटियां .
काँटों की राह पर 
यह खुद ही चलती रहेंगी
औरों के लिए फूल सी होती हैं बेटियां !
बोये जाते हैं बेटे और उग आती हैं बेटियां .
खाद- पानी बेटों में
और लहलहाती हैं बेटियां .
ऊंचाइयों तक ठेले जाते हैं बेटे
और चढ़ जाती हैं बेटियां .
रुलाते हैं बेटे और रोती हैं बेटियां
मुट्ठी भर नीर सी होती हैं बेटियां .
कई तरह से गिराते हैं बेटे ,
संभाल लेती हैं बेटियां !
विधि का विधान है ,
यही दुनिया की रस्म है ,
जीवन तो बेटों का है ,
और मारी जाती हैं बेटियां !!!
- नन्द किशोर हटवाल

टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

गोरक्षा आन्दोलन 1966 जब संतों के खून से नहाई थी दिल्ली, इंन्दिरा गांधी सरकार ने की थी गोलीबारी

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

बंगाल में भाजपा को जमाने में कैलाश विजयवर्गीय और दिलीप घोष का महत्वपूर्ण योगदान रहा....

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

जीवन मे कुछ करना है तो, मन को मारे मत बैठो

भगवान विष्णु के दस अवतार

भैरोंसिंह शेखावत : शेर - ए - राजस्थान Bhairon Singh Shekhawat : Sher-e - Rajasthan

ज्योति जला निज प्राण की, बाती गढ़ बलिदान की,