पोस्ट

मार्च 20, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अमर शहीद भगत सिंह तारीखों में ......

चित्र
- अरविन्द सिसोदिया      भगत सिंह का जन्म 2८ सितंबर, 1907 को लायलपुर ज़िले के बंगा में चक नंबर 105 (अब पाकिस्तान में) नामक जगह पर हुआ था। हालांकि उनका पैतृक निवास आज भी भारतीय पंजाब के नवांशहर ज़िले के खट्करकलाँ गाँव में स्थित है। उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था।, एक देशभक्त सिख परिवार में हुआ था, जिसका अनुकूल प्रभाव उन पर पड़ा था। भगतसिंह के पिता 'सरदार किशन सिंह' एवं उनके दो चाचा 'अजीतसिंह' तथा 'स्वर्णसिंह' अंग्रेज़ों के ख़िलाफ संघर्षरत होने के कारण जेल में बन्द थे । जिस दिन भगतसिंह पैदा हुए उनके पिता एवं चाचा को जेल से रिहा किया गया था , इस शुभ घड़ी के अवसर पर भगतसिंह के घर में खुशी और भी बढ़ गयी थी । भगतसिंह की दादी ने बच्चे का नाम 'भागां वाला' (अच्छे भाग्य वाला) रखा । बाद में उन्हें 'भगतसिंह' कहा जाने लगा । वे 14 वर्ष की आयु से ही पंजाब की क्रान्तिकारी संस्थाओं में कार्य करने लगे थे। डी.ए.वी. स्कूल से उन्होंने नवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। 1923 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद उन्हें विवाह बन्धन में

फिल्मी गीतों ने.. होली का भी खूब धमाल मचाया है ...

- अरविन्द सिसोदिया  ..अजी होली तो होली ही है .., जम कर मनाई..,गालों पर गुलाल .., ललाट पर ऊपर तक मसला., चेहरा पहचान जाएँ तो होली ही काहे की...! आतंक और अधर्म के पर्याय बनें हिरण्यकश्यप के राजतन्त्र से मुक्त होनें पर उनकी जनता ने इसी तरह खुशी मनाई थी ..! हमारे शासकों को अच्छी तरह  समझ लेना चाहिए यह जनता अधर्म और अनाचार कतई पसंद  नहीं करती  और वक्त जरूरत इसका जबाव भी देती हे ..!   फिल्मी गीतों ने हमारे त्यौहारों को खूब उभरा है , चाहे वीर रसा की बात हो या रक्षा बंधन.., होली का भी खूब धमाल मचाया है ...  कुछ यादगार गीत जो मस्ती में ला देते हैं ...  तन रंग लो जी मन रंग लो...(कोहिनूर) होली आई रे कन्हाई...(मदर इंडिया) अरे जा रे हट नटखट...(नवरंग) होली के रंग दिल खिल जाते हैं...(शोले) कुछ यादगार गीत जो मस्ती में ला देते हैं ... रंग बरसे भींगे चुनर वाली...(सिलसिला) अंग से अंग लगा ले सजन...(डर) आज न छोडेंगे हम हमजोली...(कटी पतंग) मल दे गुलाल मोहे...(कामचोर) कुछ यादगार गीत जो मस्ती में ला देते हैं . आई रे आई रे, होली आई रे...(ज़ख़्मी) ओ देखो होली आई रे...(मशाल) होरी खेले रघुवीरा अव

होली : नरसिंह अवतार,प्रह्लाद,हिरण्यकश्यप और होलिका.....

चित्र
होली की बहुत बहुत शुभ कामनाएं और बधाई ..! रंगों के इस त्यौहार का सन्देश स्पष्ट है  कि जिन्दगी बहुरंगी होनी चाहिए ..! एक रंग नीरसता को लाता है .. तो बहुरंगता विविधता के द्वारा नीरसता को तोड़ता है ..! जीवन को बहु रंगी बनायें .. जम कर होली मनाएं ..!  - अरविन्द सिसोदिया , कोटा , राजस्थान , भारत | 09414180151   blog - jai jai bharat   arvindsisodiakota .blogspot.com mail - sisodiaarvind @yahoo .com ------ संझिप्त  में होली की कथा .....  होली के प्रचलन की अनेक कथाओं में प्रमुख है भक्त प्रहलाद , उसके पिता , बुआ और भगवान की कथा। कहा जाता है कि प्राचीन काल में एक असुर था जिसका नाम था हिरण्यकश्यप। अपने बल और सामर्थ्य के अभिमान में वह स्वयं को ही भगवान मानने लगा था। उसका पुत्र प्रह्लाद बड़ा ईश्वर भक्त था।  हिरण्यकश्यप की  भारी व्यथा यह थी कि उसके घर में ही उसे विद्रोह के स्वर (धर्म-पालन और ईश्वर-भक्ति के वचन) सुनाई दे रहे थे। अर्थात प्रह्लाद की ईश्वर-भक्ति और धर्मपरायणता उसके ढोंग को नकार देते थे ..! जिससे  नाराज होकर हिरण्यकश्यप ने  प्रह्लाद को  विभिन्न प्रकार से दंड दिए । परंतु पुत्र