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21वि सदी का काला कानून - साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक-2011

विनोद बंसल  अभी हाल  ही में यूपीए अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद द्वारा एक विधेयक का मसौदा तैयार किया गया है। इसका नाम सांप्रदायिक एव लक्षित हिंसा रोकथाम (न्याय एवं क्षतिपूर्ति) विधेयक 2011  [‘Prevention of Communal and Targeted Violence (Access to  Justice and Reparations) Bill,2011’]  है। ऐसा लगता है कि इस प्रस्तावित विधेयक को अल्पसंख्यकों का वोट बैंक मजबूत करने का लक्ष्य लेकर, हिन्दू समाज, हिन्दू संगठनों और हिन्दू नेताओं को कुचलने के लिए तैयार किया गया है। साम्प्रदायिक हिंसा रोकने की आड़ में लाए जा रहे इस विधेयक के माध्यम से न सिर्फ़ साम्प्रदायिक हिंसा करने वालों को संरक्षण मिलेगा बल्कि हिंसा के शिकार रहे हिन्दू समाज तथा इसके विरोध में आवाज उठानेवाले हिन्दू संगठनों का दमन करना आसान होगा। इसके अतिरिक्त यह विधेयक संविधान की मूल भावना के विपरीत राज्य सरकारों के कार्यों में हस्तक्षेप कर देश के संघीय ढांचे को भी ध्वस्त करेगा। ऐसा प्रतीत होता है कि इसके लागू होने पर भारतीय समाज में परस्पर अविश्वास और विद्वेष की खाई इतनी बड़ी और गहरी हो जायेगी जिस

विदेशी ताकतों से प्रेरित.. हिन्दुओं को समूल समाप्त करने की योजना !!

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-चम्पतराय संयुक्त महामंत्री-विश्व हिन्दू परिषद 1. भारत सरकार के सम्मुख प्रस्तुत किए गए इस बिल का नाम है ‘‘साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक – 2011’’ 2. इस प्रस्तावित विधेयक को बनाने वाली टोली की मुखिया हैं श्रीमती सोनिया गांधी और इस टोली में हैं सैयद शहाबुद्दीन जैसे मुसलमान, जॉंन दयाल जैसे इसाई और तीस्ता सीतलवाड़ जैसे धर्मनिरपेक्ष, इसके अतिरिक्त अनेक मुसलमान, इसाई और तथाकथित धर्मनिरपेक्ष हिन्दू हैं। सोनिया गांधी के अतिरिक्त टोली का कोई और व्यक्ति जनता के द्वारा चुना हुआ जनप्रतिनिधि नहीं है। विधेयक तैयार करने वाली इस टोली का नाम है ‘‘राष्ट्रीय सलाहकार परिषद’’। 3. विधेयक का क्या उद्देश्य है, यह प्रस्तावना विधेयक में कहीं लिखी नहीं गयी। 4. विधेयक का खतरनाक पहलू यह है कि इसमें भारत की सम्पूर्ण आबादी को दो भागों में बाँट दिया गया है। एक भाग को ‘‘समूह’’ कहा गया है, तथा दूसरे भाग को ‘‘अन्य’’ कहा गया है। विधेयक के अनुसार ‘‘समूह’’ का अर्थ है धार्मिक एवं भाषाई अल्पसंख्यक (मुसलमान व इसाई) तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के व्यक्ति, इसके अतिरिक्त देश की सम्पूर्ण आबादी ‘‘अन्य’’ है।

पकडे अन्ना-छोडे अन्ना,क्या मखौल है देश में।

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-मोहनलाल गालव (कोयला जिला बांरा,राजस्थान) पकडे अन्ना-छोडे अन्ना,क्या मखौल है देश में। धूर्तों का दिवाला निकला , खाकी वर्दी वेष में।। 1।। सरकार गृहमंत्रालय , देखो करते मनमानी। दूरदर्शिता बिलकुल नहीं है,बन गये ऐशे अभिमानी।। 2।। गांधीमार्ग कलंकित कर रहे , देखो आज संसद में। रावण की लंका में जैसे, पग रोपा हो अंगद ने।। 3।। ईमानदारी,सत्य,अहिंसा की, शपथ जो ये खाते है। घर भरने में नहीं चूकते,रिश्वत खूब कमाते हैं।। 4 ।। उपर से करते हैं थोथी बातें, भ्रष्टाचार मिटाने की। मंशा इनकी तीव्र होती है,कालाधन कमानें की ।। 5 ।। भ्रष्टाचारी कालेधन को , लेकर आवे देश में। देश समृद्धि की गणना हो,सम्पूर्ण विश्व में।। 6 ।। देशवासियों जागों अब तो, माता तृम्हे पुकारती। देख कर इनके करतब सारे,इनको वह दुत्कारती ।। 7।। भारतमाता - कालेधन पर परत पडी है,उसको में तुडवा दूंगी। तुम मुझे अहिंसा दो , में तुम्हे वैभव दूंगी।। 8 ।। अन्ना के लिये - कत्तव्य मार्ग पर अडे रहो, सत्य मार्ग मिल जावेगा। जीवन लक्ष्य प्राप्त करो तुम, काल कभी न आवेगा।। 9 ।।