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Shaheedi Jor Mela : Shahidii jori Baba Zorawar Singh ji and Baba Fateh Singh ji,

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Shaheedi Jor Mela From Wikipedia, the free encyclopedia Shaheedi Jor Mela is organised every year in December at Gurdwara Fatehgarh Sahib, in the Fatehgarh Sahib district of Punjab to pay homage to the martyrdom of Baba Zorawar Singh ji and Baba Fateh Singh ji, the youngest of the tenth guru of sikhs Guru Gobind Singh's four sons.                                       Fatehgarh Sahib, Punjab, India Contents     1 Supreme sacrifice     2 Gurudwara Fatehgarh Sahib     3 Mela Schedule     4 People participation Supreme sacrifice Both Sahibzada's defied all attempts of then Governor of Sirhind Wazir Khan's offers of treasure and easy lives if they would only convert to Islam. Holding steadfast in their will to die as Sikhs, they were first entombed alive by being bricked into a wall, but mere bricks and mortar could not hold the young Sahibzadas, for the wall collapsed and fell to the ground. Then, on 26 December 1705, Baba Fateh Singh ji was cruelly and merc

वीर क्रांतिकारी शहीद ऊधम सिंह

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http://bharatdiscovery.org अमर शहीद ऊधम सिंह भारत डिस्कवरी प्रस्तुति अमर शहीद ऊधम सिंह (जन्म- 26 दिसंबर, 1899, सुनाम गाँव, पंजाब; मृत्यु- 31 जुलाई, 1940, पेंटनविले जेल) जलियाँवाला बाग़ में निहत्थों को भूनकर अंग्रेज़ भारत की आज़ादी के दीवानों को सबक सिखाना चाहते थे, जिससे वह ब्रिटिश सरकार से टकराने की हिम्मत न कर सकें, किन्तु इस घटना ने स्वतंत्रता की आग को हवा देकर बढ़ा दिया। जन्म ऊधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 में पंजाब के संगरूर ज़िले के सुनाम गाँव में हुआ। ऊधमसिंह की माता और पिता का साया बचपन में ही उठ गया था। उनके जन्म के दो साल बाद 1901 में उनकी माँ का निधन हो गया और 1907 में उनके पिता भी चल बसे। ऊधमसिंह और उनके बड़े भाई मुक्तासिंह को अमृतसर के खालसा अनाथालय में शरण लेनी पड़ी। 1917 में उनके भाई का भी निधन हो गया। इस प्रकार दुनिया के ज़ुल्मों सितम सहने के लिए ऊधमसिंह बिल्कुल अकेले रह गए।     इतिहासकार वीरेंद्र शरण के अनुसार ऊधमसिंह इन सब घटनाओं से बहुत दु:खी तो थे, लेकिन उनकी हिम्मत और संघर्ष करने की ताक़त बहुत बढ़ गई। उन्होंने शिक्षा ज़ारी रखने के साथ ही आज़ादी की लड़ाई मे