पोस्ट

अगस्त 4, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अपहरण, गैंगरेप, जबरदस्ती धर्म परिवर्तन

Samarendra Singh : ताज्जुब है. चारों तरफ खामोशी है. जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो. कमाल की धर्मनिरपेक्षता है. गाजा में हुआ होता तो खबर बनती. सबका खून उबाल मारता. लेकिन मेरठ गाजा नहीं है. और जहां बलात्कार हुआ है वह मंदिर भी नहीं है. और जिसका बलात्कार हुआ और धर्म परिवर्तन कराया गया... वह मुसलमान नहीं है. इसलिए खबर नहीं है. कुछ साथी कह रहे हैं कि इस पर तीखी प्रतिक्रिया नहीं होनी चाहिए. यकीनन नहीं होनी चाहिए. लेकिन म्यांमार में और गाजा में और स्पेन में जो होता है उस पर यहां तीखी प्रतिक्रिया क्यों होती है? इस्लाम को विक्टिम के तौर पर पेश क्यों किया जाता है? ऐसे मुल्क में जहां पहले से ही धार्मिक कट्टरता चरम पर हो, वहां दुनिया के दो मुल्कों के बीच की लड़ाई को धर्म विशेष से जोड़ कर पेश किया जाना और लहुलूहान जिस्म को प्रदर्शित करना कहां तक जायज है? और अगर वह सब जायज है तो मेरठ कांड पर तीखी प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी जानी चाहिए? सलमान रुश्दी ठीक कहता है... इस्लाम के दिल में कुछ खोट है. अब इस खोट को दिल से बाहर निकालने की जिम्मेदारी तो इस्लाम के रहनुमाओं को ही उठानी पड़ेगी, वरना टकराव तो होगा ही.

नरेंद्र मोदी : भगवा वस्त्र...गले में रुद्राक्ष, मोदी ने की पशुपतिनाथ की पूजा

चित्र
भगवा वस्त्र...गले में रुद्राक्ष, मोदी ने की पशुपतिनाथ की पूजा http://www.livehindustan.com प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि वह यहां पशुपतिनाथ मंदिर में प्रार्थना कर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं। मोदी ने ट्वीट किया, ''पशुपतिनाथ मंदिर में सुबह प्रार्थना कर बेहद धन्य महसूस कर रहा हूं।'' प्रधानमंत्री ने मंदिर में प्रार्थना की और इसके परिसर में 400 बिस्तरों वाले धर्मशाला के निर्माण के लिए 25 करोड़ रुपये का अनुदान दिया और 2,500 किलोग्राम चंदन की लकड़ी भी अर्पित की। मोदी ने मंदिर में अपनी मौजूदगी की तस्वीर भी ट्विटर पर साझा की। प्रधानमंत्री मोदी की दो-दिवसीय नेपाल यात्रा का समापन सोमवार को हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल की अपनी पहली यात्रा के दूसरे और आखिरी दिन आज पांचवीं सदी के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। भगवान शिव के मंदिर में मोदी करीब 45 मिनट तक रहे। मोदी ने पशुपतिनाथ मंदिर में श्रावण महीने के सोमवार के दिन दर्शन किए, जिसका धार्मिक तौर पर काफी महत्व है। उन्होंने पशुपतिनाथ मंदिर ट्रस्ट को 2500 किलोग्र

नरेंद्र मोदी ने किया भगवान पशुपति का रुद्राभिषेक

चित्र
मोदी ने किया भगवान पशुपति का रुद्राभिषेक नवभारतटाइम्स.कॉम | Aug 4, 2014    काठमांडू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी नेपाल यात्रा के दूसरे दिन विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में विशेष पूजा की। पीएम मोदी सोमवार सुबह 9 बजे पशुपतिनाथ मंदिर पहुंचे और भगवान शिव के इस मंदिर में रुद्राभिषेक किया।यूनेस्को विश्व सांस्कृतिक विरासत स्थल की सूची में शामिल भगवान पशुपतिनाथ का मंदिर नेपाल में शिव का सबसे पवित्र मंदिर माना जाता है। पशुपतिनाथ मंदिर में पीएम मोदी की पूजा इस वजह से भी खास है, क्योंकि इससे पहले किसी राजनेता ने इस तरह की पूजा में हिस्सा नहीं लिया है। मोदी ने पशुपतिनाथ मंदिर की जिस पूजा में हिस्सा लिया, उसमें सिर्फ नेपाल राजघराने के लोग ही शामिल होते हैं। इस पूजा के दौरान राजघराने के लोगों के अलावा सिर्फ पुजारी होते हैं। राजघराने की ओर से सहमति जताने के बाद मोदी पूजा में शामिल हुए। नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर को भारत की ओर से 2501 किलोग्राम चंदन भेंट किया गया है। मंदिर में पूजा करने के बाद पीएम मोदी होटेल के लिए रवाना हो गए। पीएम का नेपाल के राष्ट्रपति रामबरन यादव से मुलाक

कोसी का कहर क्यों होता है ?

चित्र
सरस्वती की लुप्तता का रहस्य कोसी में  कोसी नदी के द्वारा अपना मार्ग बदल कर बिहार की तबाही करना आम बात हे। यही बात हमें विलुप्त सरस्वती महानदी के लुप्त होने के कारणों पर सोचनें की दिशा देती है। हमारे सामने एक तो कोसी का प्राकृतिक संकट सामने है कि पहाडो से बह कर आने वाली विशाल रेत की मात्रा जमते जमते बड़ा अवरोध बन कर नदी का मार्ग बदल देती हे। दूसरा सोच सुनामी की घटना का है कि आंतरिक प्लेटों की ऊंचाई नीचाई में बदलाव जमीन के ऊपर सब कुछ बदल सकता है। तीसारा सोच भूकम्पों का है जो दिशा और दशा बदलने में सक्षम है। कोसी तो मार्ग बदल कर फिरसे अपने रास्ते पर आ जाती हे। मगर सरस्वती अपना मार्ग बदलने पर अपने रास्ते पर नहीं आ सकी । अनुमान तो यही है कि शिवालिका पहाडि़यों से बह कर राजस्थान के रास्ते खंबात की खाडी में जाने वाली सरस्वती अब यमुना में ही मिल कर अपना अस्तित्व समाप्त कर चुकी हे। इलाहाबाद में सरस्वती की धारा का त्रिवेणीं में होने की मान्यता के पीछे भी यही तथ्य हे। हजारों हजारों वर्ष पूर्व कभी सरस्वती ने भी अपना तटबंध तोडा और बारास्ते यमुना वह गंगा में होते हुये बंगाल की खाडी पहुच गई। क्यों