पहलीवार किसान को पद्यमश्री



सिंचाई करने 5000 फीट नहर काटकर बनाया 
42 फीट ऊंचा बांध, मिला पद्मश्री
Bhaskar NewsJan 26, 2016,

रांची/नई दिल्ली. झारखंड के पर्यावरण संरक्षक सिमोन उरांव को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। सीमोन ने जल संचयन के लिए अकेले छह गांवों में तालाब खुदवाए और पेड़ लगाकर एक अनोखी मिसाल पेश की। अब इन गांवों में साल में तीन फसलें उपजाई जा सकती हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए सिमोन को पद्मश्री दिया गया है।
पांच हजार फीट नहर काटकर बनाया 42 फीट ऊंचा बांध...
सिमोन ने 1955 से 1970 के बीच बांध बनाने का अभियान जोरदार ढंग से चलाया था। जब उन्होंने यह काम शुरू किया तो 500 लोग भी उनसे जुड़कर जल संरक्षण का काम करने लगे। सिमोन ने पांच हजार फीट नहर काटकर, 42 फीट ऊंचा बांध बनाकर 50 एकड़ में सिंचाई की सुविधा की। उन्होंने भी यह महसूस किया कि बांध बनाने से बहुत मदद मिल रही है।
तीर-धनुष लेकर पेड़ों की कटाई का विरोध किया
रांची से सटे बड़ों के रहने वाले सिमोन जल संरक्षण, वन रक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करते हैं। उन्होंने अनपढ़ होते हुए भी गांव में आठवीं क्लास तक पढ़ाई शुरू कराने में सफलता पाई।सिमोन जमीन पर गांव वालों का अधिकार मानते हैं। उन्होंने तीर-धनुष लेकर पेड़ों की कटाई का विरोध किया। पर्यावरण संरक्षण के मकसद को पूरा करने के लिए दो बार जेल जा चुके हैं और दोनों बार अदालत ने उन्हें समाजिक कार्यकर्ता बताकर रिहा कर दिया।
सिमोन को पर्यावरण संरक्षण के लिए पहले भी कई पुरस्कार मिले हैं-
-उन्हें अमेरिकन मेडल ऑफ ऑनर लिमिटेड स्टा्राकिंग 2002 पुरस्कार के लिए चुना गया।
-विकास भारती विशुनपुर से जल मित्र का सम्मान मिला।
-झारखंड सरकार की तरफ से सम्मान
-अब उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा जा रहा है। इससे पहले भी कई बार उनके नाम की सिफारिश की जा चुकी है।

अवॉर्ड किसानों को समर्पित
पद्मश्री मिलना मेरे और झारखंड के लिए गौरव की बात है। भास्कर से ही सबसे पहले यह जानकारी मिली है। यह अवार्ड मैं उन तमाम किसानों को समर्पित करना चाहूंगा, जिनके सहयोग से मुझे यह मुकाम हासिल हुआ है।
- सिमोन उरांव, पर्यावरण सरंक्षक

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