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अरुण जेटली : क्या हम ऐसे लोगों को समर्थन दे रहे हैं, जिनकी सोच ही इस देश के टुकड़े करने की है

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क्या हम ऐसे लोगों का समर्थन कर रहे हैं जिनकी सोच देश के टुकड़े करने की है : जेटली http://khabar.ndtv.com/arun-jaitley NDTVKhabar.com team , Last Updated: गुरुवार फ़रवरी 25, 2016 http://khabar.ndtv.com/news नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और माकपा नेता सीताराम येचुरी ने गुरुवार को राज्यसभा में जेएनयू विवाद और हैदराबाद में रिसर्च स्कॉलर रोहित वेमुला की खुदकुशी के मामले में बहस में भाग लिया। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राष्ट्रवाद पर हुई बहस में सवाल किया कि क्या हम ऐसे लोगों को समर्थन दे रहे हैं, जिनकी सोच ही इस देश के टुकड़े करने की है। क्या कोई कह सकता है कि मकबूल बट और अफजल गुरु को फांसी दिए जाने वाले दिन को याद करते हुए उनका शहीदी दिवस मनाया जाए। एचसीयू और जेएनयू में जिस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए गए, हमें उन्हें लेकर अपनी सोच स्पष्ट करनी चाहिए। जेटली ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, जेएनयू जाने से पहले आपको सोचना चाहिए था, आप तो काफी समय तक सत्ता में रहे हैं। हम तो नए-नए आए हैं। आपके दो नेताओं को आतंकवादियों ने मारा है, आपको इस मामले में हमस

करदाता का पैसा, देश के खिलाफ भड़काने के लिए खर्च नहीं किया जा सकता : अनुराग सिंह ठाकुर

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श्री अनुराग सिंह ठाकुरः यह कांग्रेस पार्टी को तय करना होगा कि वह जान लेने वालों के साथ हैं या जान बचाने वालों के साथ हैं। आज देश यही जवाब मांगना चाहता है। जे॰एन॰यू॰ की ग्राण्ट पिछले डेढ़ साल में कम नहीं हुई। लेकिन देश के करदाता का पैसा किसी को देश के खिलाफ भड़काने के लिए खर्च नहीं किया जा सकता हैं यदि करदाता पूछता है कि पैसा मेरा काटते हो, सब्सिडी वहां पर देते हो, लेकिन तिरंगे झंडे को अपमानित करने वाले, देश के सैनिकों को अपमानित करने वालों को क्या हम वहां इकट्ठा करके रखोगे। यह नहीं चलेगा और यही नहीं, वहां पर नारे क्या लगे थे, नारे लगे ‘कश्मीर की आजादी तक, जंग रहेगी। भारत की बर्बादी तक, जंग रहेगी। अगर इसी को अभिव्यक्ति की आजादी कहा जाता है तो दुर्भाग्य है, यह अभिव्यक्ति की आजादी नहीं है। कोई भी अपने देश को तोड़ने के लिए, ऐसी देशविरोधी ताकतों को आगे आने को कोई मौका नहीं देंगे। मैं कहना चाहता हूं कि भारत सरकार और भारत में अंतर है। भारत सरकार की आलोचना कीजिए। हमारी सरकार की नीतियों और हमारे कार्यक्रमों की आलोचना कीजिए लेकिन हमारे भारत की आलोचना मत कीजिए। वर्ष 2010 में दांतेवा