भोपाल गैसत्रासदी वरसी : प्रथम दृष्टया दोषी भारत सरकार है
- अरविन्द सीसोदिया यूनीयन कार्बाइड के जहरीले कारखानें को भोपाल में सातवाँ स्थान पर बनाए जानें की अनुमती नहीं दी जा रही थी...! मध्यप्रदेश की सरकार संभवतः भोपाल के लोगों के जीवन से खिलवाड़ नहीं करना चाहती होगी ..! मगर जा आपातकाल लगा और प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी जी सर्वे भन्तु सुखिना हुईं तो.., अमेरिकन यूनीयन कार्बाइड को साख यह मिला की उन्हें यूनीयन कार्बाइड कारखाना भोपाल में लगानें कि सुविधा मिल गई..! जो १९८४ में भोपाल में महान और अत्यंत दर्दनाक दुखान्तकी बनीं ..! बात यह है की किसी भी बड़ी कंपनी को कहीं भी कोई भी इजाजत उसके श्रमिकों से जुड़े रिकार्ड को देखकर ही दी जानीं चाहिए...! इस कंपनी का यह रिकार्ड देख ही नहीं गया ..! उन्हें अनुमती नियमानुसार नहीं राजनैतिक प्रभाव में दी गई और उसे भुगता भोपाल नें ..!! यह एक बुरी कंपनी थी .., इस का रिकार्ड ठीक नहीं था..! हनन कभी भी यह ध्यान नहीं किया कि इसके ख़तरना उत्पादनों से जन सुरक्षा को कैसे सुरक्षित रखा जाए..! सच तो यह है की आज तक वह जहरीला कचरा वहीं है और हटानें तक की हिम्मत नहीं की गई ..!! एक ब्ल...