राखी और भद्रा rakhi or bhdra
हिंदू विधि के अनुसार, लाखों वर्षो से सूर्योदय में जो तिथि रहती है, वही तिथि दिन भर मानी जाति है, काम करती है। इस मान्यता के हिसाब से 30 अगस्त को पूर्णिमा है ही नहीं और 31 अगस्त का सूर्योदय पूर्णिमा का है इसलिए 31 अगस्त को ही पूर्णिमा मानी जाएगी। यह सरकारी गैर जिम्मेवारी और कंप्यूटरिकृत ज्योतिषीयों की उपज है। समाज को स्वयं तय करना है कि वे कब पूर्णिमा को मानते हैं। अन्यथा हिंदू पद्धति का तो सत्य यही है कि 31अगस्त को ही पूर्णिमा है और पूरे दिन पूर्णिमा को माना जाएगा ऐसी मान्यता से भी है, जो कि सभी दोषों से मुक्त भी है। यूँ तो रक्षाबंधन की राखी, रक्षाबंधन के 5-7 दिन पहले से लेकर के और जन्माष्टमी तक मानाई जा सकती है। रक्षा सूत्र कभी भी बांधा जा सकता है, कहीं भी बांधा जा सकता है। इसका कोई मनाही नहीं। यह एक प्रकार का संकल्प है। किंतु जब कोई विषय आ रहा है, कि फला समय अशुभ है, फला समय भद्रा है। इस तरह के अशुभ समय को टालने में कोई बुराई नहीं है, यह समझदारी ही होगी। ----- क्या होता है भद्रा काल ? ( What is Bhadra Kaal? ) भद्रा शनि देव की बहन का नाम है. जो भगवान सूर्य...