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आवश्यक सेवाओं के लिए आधार कार्ड होना जरूरी नहीं - सर्वोच्च न्यायालय

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आधार कार्ड बनाने की विधि तो बहुत अच्छी है, मगर इन्हे प्राईवेट ठेकेदार बना रहें हैं, उनके कमप्यूटर पर कम गुणवत्ता वाले आपरेटर हैं। अधिकतम कार्ड बनाने पर ही उन्हे फायदा है। इस कारण इनकी अहमियत संदिग्ध और कम वेल्यू की हो जाती है। जब इन्हे बनाने के लिये जिन दस्तावेजों की सूची है , उन दस्तावेजों के धारक के प्रमाण हैं । उन दस्तावेजों को नकार कैसे सकते हैं। वोटर आईडी नागरिकता का सबसे बड़ा सबूत है, राशनकार्ड जिला कलेक्टर द्वारा प्रदत्त है। बैंक खाते की पासबुक गंभीर जांच पर और एक तस्दीकसुदा खातेदार से बनती है। ठीक है आधारकार्ड के ठेकेदारों से किसी को कोई फायदा होगा, मगर इस संदिग्ध दस्तावेज को पक्के से अधिक महत्व देना अनुचित है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश उचित है। -------------------- 'आवश्यक सेवाओं के लिए आधार कार्ड होना जरूरी नहीं' ज़ी मीडिया ब्यूरो नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने एक फैसले में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि इस बात का ध्यान रखा जाये कि किसी भी अवैध नागरिक का आधार कार्ड न बने । इसके साथ ही अदालत ने ये भी निर्देश दिए हैं कि आवश्यक सेव...

विफलता सरकारों की: ठीकरा सोसल मीडिया पर

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राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक प्रधानमंत्री मनमोहनसिंहजी ने अभी - अभी सोसल मीडिया पर साम्प्रदायिकता की ठीकरा फोड़ा है। मगर वे यह भूल गये कि सोसाल मीडिया पर है कौन ? इस प्रश्न का उत्तर यदि वे खोजेंगे तो पायेंगे कि सोसाल मीडिया पर अधिकांशतः आम जनता है। वे लोग हैं जिनकी बात को प्रिंट मीडिया या चैनल्स तब्बजो नहीं देते हैं या उनकी बात जानने तक उनकी पहुंच नहीं है। सोसल मीडिया जनता का वह प्लेटफार्म है,जिस पर आमजन अपने विचारों को निर्विद्धन प्रगट कर सकती है। यह एक मात्र ओपन फील्ड भी जनता से कांग्रेस सरकार छीनना चाहती है। आज जब सोसाल मीडिया के कारण ही विश्व में हजारों छुपे सच उजागर हो रहे हैं , येशे में स्वंय सरकारों को आत्म निरिक्षण करना चाहिये कि वे कर क्या रहे हैं। समस्यायें सरकारों कर गलत और दमनकारी नितियों के कारण उत्पन्न होती हैं, ठीकरा सोसाल मीडिया पर क्यों भला ! --------------- हिंसा भड़काने में सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ibnkhabar.com | Sep 23, 2013 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को सांप्रदायिक हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई और कहा क...

10 सालों में खाना-पीना ढाई गुना से ज्यादा महंगा

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10 सालों में खाना-पीना ढाई गुना से ज्यादा महंगा टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Sep 20, 2013 http://navbharattimes.indiatimes.com सुबोध वर्मा नई दिल्ली।। यूपीए सरकार के दोनों कार्यकालों में महंगाई ने आम आदमी को पस्त करके रख दिया है। आंकड़े जो कहानी बयान करते हैं, वह चौंकाने वाली है। आंकड़ों पर गौर करें तो सन् 2004 से 2013 के बीच खाने-पीने की वस्तुओं के दामों में 157% बढ़ोतरी हुई है। गौर करने लायक बात है कि भारत दुनिया में सबसे अधिक साग-सब्जी पैदा करने के मामले में दूसरे स्थान पर है। बावजूद इसके, देश में सब्जियों के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई और यह 350 % तक जा पहुंची। 2004 से लेकर अब तक प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी 521% तक हुई। कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। इन दिनों एक बार फिर से देश के कई हिस्सों में प्याज की कीमतें 70-80 रुपए प्रति किलो हो गई है। यह सिर्फ प्याज के केस में नहीं है बल्कि ऐसा आलू के साथ भी देखा जा रहा है। 2009 के आखिरी महीनों में आलू की कीमतें 100 फीसदी बढ़ गई थीं। जनवरी 2010 में कहीं जाकर कीमतें कम हुई थीं। अन्य सब्जियों के दाम भी कभी बहुत ऊंचे हो जाते और कभी सा...

आज तक : मुजफ्फरनगर दंगों पर सनसनीखेज खुलासा, ऑपरेशन दंगा पार्ट-2

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EXCLUSIVE: मुजफ्फरनगर दंगों पर सनसनीखेज खुलासा, ऑपरेशन दंगा पार्ट-2 अरुण सिंह/हरीश शर्मा/दीपक शर्मा | मुज़फ्फरनगर, 18 सितम्बर 2013 स्टिंग ऑपरेशन, ऑपरेशन दंगा में अब तक दिखाया गया कि मुज़फ्फरनगर कैसे सियासत की भेंट चढ़ गया. मुलायम सिंह और अखिलेश के अफसरों ने मुज़फ्फरनगर दंगों का पूरा का पूरा सच खोलकर सामने रख दिया. और ऑपरेशन दंगा पार्ट-2 से जानिए कि कैसे मुज़फ्फरनगर में दंगा जंगल में आग की तरह फैलता चला गया. सच्चाई शुक्रवार 30 अगस्त और 31 अगस्त की, जब शहर में धारा 144 लगी हुई थी, और नेता सरेआम कानून की धज्जियां उड़ा रहे थे, खुलासा अखिलेश सरकार के अफसर कर रहे हैं. ऑपरेशन दंगा पार्ट-2 शुक्रवार की दोपहर 30 अगस्त को एक सभा ने मुज़फ्फरनगर में माहौल गर्मा दिया था. ये सभा जिसमें सियासत के रोटियां सेंकी गईं, दरअसल ग़ैरकानूनी थी. शहर में दफा 144 लगी थी, लेकिन ऐसी दफाएं और धाराएं तोड़कर लोग चौराहों पर इकट्ठा होने लगे, और फिर लाउडस्पीकर और माइक पर ऐसी तकरीरें की गई, कि शहर का पारा चढ़ने लगा. अगले दिन यानी 31 अगस्त को सियासत का एक दूसरा रंग शहर ने देखा, जब एक और खास मकसद से, एक और सभा...

'ऑपरेशन दंगा' के खुलासों पर घिरी अखिलेश सरकार : राष्ट्रपति शासन ही एक मात्र विकल्प है

'ऑपरेशन दंगा' के खुलासों पर घिरी अखिलेश सरकार, बर्खास्त करने की मांग तेज आज तक वेब ब्यूरो [Edited By: संदीप कुमार सिन्हा] | नई दिल्ली, 18 सितम्बर 2013 http://aajtak.intoday.in 'ऑपरेशन दंगा'...मुजफ्फरनगर दंगों पर आजतक के सबसे बड़े खुलासे के बाद सियासी हलकों में हड़कंप मच गया है. उत्तर प्रदेश सरकार सवालों के घेरे में आ गई है. बीजेपी और बीएसपी की मांग है कि अखिलेश सरकार को बर्खास्त किया जाए और सूबे में राष्ट्रपति शासन लागू हो. वहीं कांग्रेस स्टिंग ऑपरेशन में हुए खुलासे की जांच कराने की मांग कर रही है. आजतक के खुलासे के बाद उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री आजम खान ने सफाई दी. उन्होंने कहा है कि उन्हें मुजफ्फरनगर दंगों के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता. उन्हें बदनाम करने की साजिश हो रही है और यूपी के किसी भी दंगे में उनका हाथ नहीं है. दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश प्रशासन भी हरकत में आ गया है. दंगा भड़काने के आरोप में 9 नेता सहित कुल 16 लोगों के खिलाफ वारंट जारी किया गया है. इसमें बीजेपी, बीएसपी और कांग्रेस के नेता शामिल हैं. कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह दिग्विजय सिंह ने ...

आजम खान ने करवाए मुजफ्फरनगर के दंगे : न्यूज चैनल 'आज तक'

आजम खान ने करवाए मुजफ्फरनगर के दंगे...! बुधवार, 18 सितंबर 2013 नई दिल्ली। मुजफ्फरनगर नगर दंगों के बाद वोटों की सियासत हो रही है। राजनीतिक दल के नुमाइंदे दंगा पीड़ित लोगों के पास जाकर उनका दर्द बांटने की कोशिश कर रहे हैं। वे दर्द के तवे पर वोट की रोटियां सेंक रहे हैं। मुजफ्फरनगर के दंगों पर नया सच सामने आया है। न्यूज चैनल 'आज तक' के स्टिंग ऑपरेशन में यह पुलिस अफसरों ने दंगों की सचाई का खुलासा किया है। इस स्टिंग ऑपरेशन में जो खुलासा हुआ है, उसके अनुसार अखिलेश सरकार को कठघरे में खड़ा किया गया है। इसमें यह सामने आया है कि पुलिस अफसर पर दबाव डालकर दंगा करने वाले दोषियों को जेल से छुड़वाया गया। स्टिंग ऑपरेशन के दौरान फुगाना थाने के एसएचओ ने कहा कि सरकार से जुड़े किसी आजम खान नाम के व्यक्ति ने फोन कर कहा था कि जो हो रहा है, होने दो। स्टिंग के दौरान खुफिया कैमरे में प्रशासन के अधिकारी और पुलिस अधिकारी सरकार की सरकार की लेटलतीफी और नाकामी बताकर इन दंगों को राजनीति का खेल करार दे रहे हैं।  सभी का कहना है कि वोटों की राजनीति के कारण मुजफ्फरनगर में इतना बड़ा तनाव हुआ। एक अधिकारी ख...

गणपति जी की आरती

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गणपति जी की आरती गणपति की सेवा मंगल मेवा सेवा से सब विध्न टरें | तीन लोक तैंतीस देवता द्वार खड़े सब अर्ज करे || ऋद्धि-सिद्धि दक्षिण वाम विरजे आनन्द सौं चंवर दुरें | धूप दीप और लिए आरती भक्त खड़े जयकार करें || गुड़ के मोदक भोग लगत है मूषक वाहन चढ़े सरें | सौम्य सेवा गणपति की विध्न भागजा दूर परें || भादों मास शुक्ल चतुर्थी दोपारा भर पूर परें | लियो जन्म गणपति प्रभु ने दुर्गा मन आनन्द भरें || श्री शंकर के आनन्द उपज्यो, नाम सुमरयां सब विध्न टरें | आन विधाता बैठे आसन इन्द्र अप्सरा नृत्य करें || देखि वेद ब्रह्माजी जाको विध्न विनाशन रूप अनूप करें पग खम्बा सा उदर पुष्ट है चन्द्रमा हास्य करें | दे श्राप चन्द्र्देव को कलाहीन तत्काल करें || चौदह लोक में फिरें गणपति तीन लोक में राज करें उठ प्रभात जो आरती गावे ताके सिर यश छत्र फिरें | गणपति जी की पूजा पहले करनी काम सभी निर्विध्न करें | श्री गणपति जी की हाथ जोड़कर स्तुति करें ||

एकात्म मानववाद :आधुनिक बनाम प्राचीन [02]

- अरविन्द सिसोदिया आधुनिक बनाम प्राचीन ये सिध्दान्त हमारे धर्म में संगठित है कि एक बच्चा प्रकृति के अनुसार झूठ नहीं बोल सकता है। अक्सर अभिभावक अपने बच्चों को झूठ बोलना सिखाते हैं। जब बच्चा किसी भी चीज की मांग करता है और यदि अभिभावक उसे नहीं देना चाहते है तो वे वस्तु को छुपा देते हैं एवं बच्चे से कहते है कि वस्तु गुम हो गयी है। बच्चा कुछ समय के लिए मूर्ख बन सकता है परन्तु जब वह वास्तविकता को समझ लेता है तब वह झूठ बोलना सीख जाता है। इसका अर्थ यह हुआ कि मनुष्य प्राकृतिक रूप से सत्यवादी होता है जो कि एक नियम है जिसकी खोज हो चुकी है। नीतिशास्त्र के कुछ ऐसे सामान्य सिध्दान्तों की भी खोज की गई। इन सिध्दान्तों को किसी भी व्यक्ति द्वारा स्वरूप प्रदान नहीं किया गया है। भारत में यह सिध्दान्त जीवन के नियम ''धर्म'' के रूप में जाने जाते हैं। वे सभी सिध्दान्त मानव जीवन में मैत्री, शांति एवं प्रगति लाते हैं। इसे ''धर्म'' में शामिल किया गया है। ''धर्म'' के मजबूत आधार में हमें अन्तर्गत रूप से जीवन का विश्लेषण करना चाहिए। जब प्रकृति धर्म के सिध्दान्...

एकात्म मानववाद : भारतीय संस्कृति एकात्म है [01]

अरविन्द सीसोदिया एकात्म मानववाद: भारतीय समाज व्यवस्था का मूलभूत अध्ययन भारतीय जनता पार्टी का दर्शन, एकात्म मानववाद पहली बार पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा मुम्बई में 22 से 25 अप्रैल, 1965 को चार व्याख्यानों के रूप में प्रस्तुत किया गया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितम्बर, 1916 को राजस्थान के जयपुर के निकट रेल्वे स्टेशन  धान्क्या गाँव में हुआ । उनका पैतृक गाँव   उत्तरप्रदेश के मथुरा जिले में नंगला चन्द्रभान गांव में हुआ था। उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए अजमेर से उत्तीर्ण की एवं दो स्वर्ण पदक प्राप्त किए। उन्होंने पुन: इन्टर की परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त करते हुए दो स्वर्ण पदक प्राप्त किए। उन्होंने अंकगणित में प्रथम श्रेणी में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। पंडित जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 1937 में शामिल होने वाले पहले कुछ स्वयंसेवकों में से तथा अन्तत: संयुक्त प्रान्तीय प्रचारक बने। वे जनसंघ में 1952 में सम्मिलित हुए एवं 1967 में पार्टी का अध्यक्ष बनने तक महासचिव के पद पर नियुक्त रहे। डा. श्यामा प्रसाद मुख...