मंगलवार, 21 दिसंबर 2010

संघ ; हिन्दुओं के लिए पोप की तरह पवित्र और आदरणीय

- अरविन्द सीसोदिया 
        बुरारी में हुए कांग्रेस के ८३ वें अधिवेशन से बुराई ही बुराई सामनें आई हैं , पूरा अधिवेशन सिर्फ और सिर्फ हिन्दुओं को कोसनें में ही ब्यतीत किया गया ..! यदी इस समय का उपयोग  रचनात्मक  दृष्टिकोण  से किया होता तो देश को भी और कांग्रेस को भी नया रास्ता मिलता ...! मगर अनुभव हीन और निरंतर राजकाज में अनुतीर्ण हो रही कांग्रेस ने पुराना ढर्रा ही सामने रखा , घरमें बुरे दिन हो तो पडौसी से लड़ने लगो ..! 
      हिन्दू आमतौर पर शांत और अभडकाऊ व्यक्तित्व है , इसी कारण तो :-
१- राम राम जाप कर गांधीजी ने हिंदुओंकी दम पर स्वतंत्रता आन्दोलन चलाया और जब जब हिन्दू हित की बात आई कांग्रेस मुकर गई , देश का विभाजन किसने स्वीकार किया ..? ये दुष्कर्म भाजपा ने तो नहीं किया ..!
२- हिन्दुओं के  आराध्य श्री राम वर्षों तक तालें में बंद रहे , सिखों के पवित्र धर्म स्थल पर आप टैंक लेकर जा पहुंचे..! श्री लंका में वहां कि सिहल उन्हें वैध्य अधिकार भी नहीं दे रहे , उनके साथ दुर्भाग्यतम नाइंसाफी हो रही है , आप शांती सेना के नाम से उन्हें मारने जा पहुचें...?  इस तरह का व्यवहार और किसी पंथ के खिलाफ करके कांग्रेस नहीं दिखा सकती ..!  हिन्दू ही दिखता रहता है जिसपर जो चो वह जुल्म किये जाओ ..! 
३- ईसाईयों की विश्व भर में हजारों संस्थाएं हैं मुख्य केंद्र के रूप में  रोम के राष्ट्राध्यक्ष पोप हैं ! हर धर्म , पंथ , सम्प्रदाय और समाज को अपनी उन्नति और हितों के लिए सामाजिक संस्थाएं बनाने का अधिकार है | उसी तरह हिन्दुओ का सामाजिक संस्था संघ है ..! वह राष्ट्र हित और हिन्दू हित के लिए सेवा रत है ..! इसमें क्या बुराई है ? संघ पर आप तीन वार प्रातिबंध लगा चुके मगर समाज ने उअताना ही उसे स्वीकार किया और समर्थन दिया ..! 
४- इसाई संस्थाएं संचालित हो सकती हैं , इस्लामिक संस्थाएं संचालित हो सकती है , मगर हिन्दू संस्थाएं संचालित नहीं हो सकती ..येशा  क्यों भई? इसाई मिसनारियां जो गैर ईसाईयों का मिसनरी के नाम पर धर्मंतार्ण कर रही हैं , भारत में भी इस कृत्य में अनाप-सनाप धन और मिशनरियां व्यस्त हैं .., उन्हें कोसनें की हिम्मत तो है नहीं ..! येशा ही इस्लाम  और कम्युनिज्म से हो रहा है उसे आप रोक नहीं सकते ..! एक हिन्दू समाज है जिस पर कांग्रेस टूटी  पड़ी  है ..येशा भी क्या ..?

         ईसाईयों नें मुसलमानों के विश्व स्तरीय धर्म गुरु खलीफा के पद को समाप्त करवाया , मगर न तो इस्लाम समाप्त हुआ न ही उनकी एकता को कोई समाप्त कर पाए ..! इसी तरह हिन्दुओं को भी ये षड्यंत्र न तो समाप्त कर सकते और न नुकशान पहुच सकते, बल्की ये हल्के किस्म की बक बक और इस तरह के आक्रमण,  उसे एक जुट करने में सहायक होंगे !

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