सुभाष जी का सच, सामने आना चाहिए ....!!












 - अरविन्द सीसोदिया 
जवाहरलाल  नेहरु  के  शव  के  पास  सुभाष जी का होना माना जाता है ... 
http://uchcharandangal.uchcharan.com/2010/08/blog-post_18.html
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक द्वारा लिख गया लेख यथावत संलग्न है ...
1- ब्रिटिश पार्ल्यामेंट  में मि. एटिली (तत्कालीन प्रधानमंत्री) ने 18 अगस्त, 1945 में कहा था कि उनका भारतीय नेताओं से समझौता हो चुका है कि  नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के पकड़े जाने पर उन्हें ब्रिटिश सरकार के हवाले कर दिया जायेगा!
2- 1948 में मास्को में दार्शनिक सम्मेलन में भाग लेने गये (पूर्व राष्ट्रपति) भारत के प्रख्यात दार्शनिक सर्वपल्ली राधाकृष्णन की मुलाकात नेता जी सुभाष चन्द्र बोस  से हुई थी!
3- नेता जी सुभाष चन्द्र बोस तिब्बत में एकनाथलाता के रूप में 1960 में रहे!
4- श्रीमती विजयलक्ष्मी पण्डित की मुलाकात 1948 में रूस में नेता जी सुभाष चन्द्र बोस  से हुई थी! उस समय वे भारत की विदेश मंत्री थी! शांताक्रूज हवाई अड्डे पर उन्होंने यह घोषणा की थी कि वह भारतवासियों के लिए एक अच्छी खबर लाई हैं परन्तु नेहरू जी के दबाव में आकर उन्होंने जीवनभर अपनी जबान नहीं खोली!
5- नेता जी सुभाष चन्द्र बोस 1960 से 1970 तक शारदानन्द के रूप में प.बंगाल में शौलमारी आश्रम में रहे!
6- नेता जी 1964 में नेहरू जी की मत्यु के बाद उनके शव के साथ देखे गये थे!

7- नेता जी सुभाष चन्द्र बोस 1971 में काँग्रेस कार्यसमिति की बैठक में इन्दिरा जी के साथ देखे गये!

8- नेता जी सुभाष चन्द्र बोस गुमनामी बाबा के रूप में फैजाबाद में 1985 तक रहे!
9- तेरह मई,1962 को नेहरू जी ने नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के बड़े बाई श्री सुरेशचन्द्र बोस को पत्र क्रमांक-704, पी.एम. / 62 में लिखा था कि हमारे पास  नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु का कोई प्रमाण नही है!
10- कस्बा पूरनपुर जनपद-पीलीभीत में 15 फरवरी 2009 को भारतीय सुभाष सेना के संस्थापक परम पूज्य महान संत सम्राट सुभाष जी द्वारा यह घोषणा की गई थी कि वे ही  नेताजी सुभाषचन्द्र बोस हैं
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परिचय
नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 को उड़ीसा के कटक शहर में हुआ था। उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माँ का नाम प्रभावती था। जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वकील थे। पहले वे सरकारी वकील थे, मगर बाद में उन्होंने निजी प्रैक्टिस शुरू कर दी थी। उन्होंने कटक की महापालिका में लंबे समय तक काम किया था और वे बंगाल विधानसभा के सदस्य भी रहे थे। अंग्रेज़ सरकार ने उन्हें रायबहादुर का खिताब दिया था। प्रभावती देवी के पिता का नाम गंगानारायण दत्त था। दत्त परिवार को कोलकाता का एक कुलीन परिवार माना जाता था। प्रभावती और जानकीनाथ बोस की कुल मिलाकर 14 संतानें थी, जिसमें 6 बेटियाँ और 8 बेटे थे। सुभाषचंद्र उनकी नौवीं संतान और पाँचवें बेटे थे। अपने सभी भाइयों में से सुभाष को सबसे अधिक लगाव शरदचंद्र से था। शरदबाबू प्रभावती और जानकीनाथ के दूसरे बेटे थें।

टिप्पणियाँ

  1. Mitro inme se kai baate sahi nahi ho sakti . Kyuki Netaji me deshbhakti Itni bhari hui thi ki Vo desh ke tukde bardasht nahi kar sakte the aur agar vo purna swastha hote to Khud Dusri kranti Bharat me kar sakte the . unke anuyayio ki aaj bhi kami nahi hai. Agar aswastha hote hue bhiunke anuyayio ko pata chalta to unke naam se vaise hi kranti ho jaati

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  2. देवेन्द्र शर्मा जी आपकी बात सही नहीं है !

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