रविवार, 8 मार्च 2015

महिला सशक्तिकरण अथवा बेटी बचाओ अभियान हेतु सुझाव

                               महिला सशक्तिकरण अथवा बेटी बचाओ अभियान हेतु सुझाव
                                                  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

    जनसंख्या के आंकडे बडे ही डरावनें हैं। प्रति हजार पुरूषों पर महिलाओं की संख्या तेजी से कम हो रही हे। कहीं 1000 पर 900 तो कहीं 800 की स्थिती की तरफ हम बड़ रहे हें। अर्थात हर 1000 पर 100 / 200 लोग आजीवन कुआरें रहेंगें ? अर्थात यह असंतुलन समाज में किस कदर आराजकता, अपराध और अद्योपतन की स्थिती उत्पन्न कर देगा, यह सोच कर ही रूह कांप जाती है। फिर भी अभी तक इस असंतुलन को रोकने के लिये ठोस कुछ नहीं हो पाना हमारी व्यवस्था पर भी और क्षमता पर भी सवाल खडे करता है।
    विज्ञान निश्चित रूप से प्रगतिशीलता का द्याोतक है मगर इसमें लाभ के साथ साथ हॉनी भी तय है। आज गर्भ में बेटी है यह विज्ञान के द्वारा दी गई हॉनी ही है, जिसका लोभ में फंसे चिकित्सक वर्ग दुरउपयोग कर रहे हैं। दुर्भाग्य देखिये की बेटी की हत्या में वे लोग लगे हें जो सबसे अधिक शिक्षित और सम्पन्न हैं। समाज में बेटी के साथ जुडी व्यवस्थाओं के कारण यह समस्या है। मगर इसे वास्तविक समस्या का रूप तो अतिशिक्षित एवं सम्पन्न लोग ही दे रहे हैं। जरासी दृड़ता इस महापाप को रोक सकती है। आप सोचिये कि गर्भ समापन में बालिका की हत्या क्या देवी भगवती की हत्या से कम है ? हमारी संस्कृति तो बालिका में देवी दर्शन कर उसे नव दुर्गा के रूप में पूजती है। कुछ रूपये कमानें की लालसा उसकी हत्या का रास्ता खोल देता हैं।
    बेटी बचानें और उसे आगे बढ़ानें के लिये हम कई तरह के उपायों को वर्षों से करते आ रहे हें मगर परिणाम कुछ भी नहीं हैं। आज भी एक बिग जीरो को हम सामने देखते हैं और महिला दिवस पर उन्ही घिसी पिटी बातों को फिर से दोहरा कर इतिश्री कर लेते हैं।

छोटी छोटी बातों को नजर में रख कर काम कीजिये, जैसे कि:-
1.    बेटी की हत्या का मुख्य कारण हमारे देश की विवाह पद्यती है, इसमें दहेर्ज आैर खर्चा उसे जन्म लेने से पहले ही मार देता है। सरकार कठोरता से नियम बनाये कि एक विवाह समारोह में 50 लोगों से अधिक लोग शामिल नहीं होंगे और 50 हजार से अधिक खर्चा नहीं होगा। अपव्यय भी बचेगा और बेटी भी बचेगी।
2.    विवाह का पंजीयन अनिवार्य होगा । विवाह का पंजिका पटवारी स्वंय घर जाकर भरेगा।  
3.    विवाहिता को उसके सुसराल से बाहर किसी भी परिस्थिती में नहीं निकाला जा सकेगा। क्यों कि वह उसका घर है।
4.    विवाह के तुरंत बाद से ही पति की सम्पती में वह बरावरी की अधिकारी हो जानी चाहिये।
5.    जहां भी दो संतान आधारित कानून हैं, चाहे वे चुनाव के हों अथवा सरकारी , अर्द्ध सरकारी सेवाओं के हों, 9,18,27 के वेतनमानों के हों। सभी जगह दो संतानों की गणना में बालिका चाहे जितनी हों उनकी गणना सिर्फ एक के रूप में होनी चाहिये।
6.    विद्यालय चाहे कोई भी हो, महिला बेंचों का 50 प्रतिशत आरक्षण होना चाहिये । क्यों कि समाज को कम से कम 50 प्रतिशत महिलायें चाहिये। यदि ये 50 फीसदी सीटें नहीं भरती हैं तो एक निश्चित दिनांक के बाद उन्हे पुरूषों से भर दिया जाये।
7.    जहां भी न्यूनतम अंकीय व्यवस्था हों वहां कम से कम 5 प्रतिशत की छूट महिलाओं को होनी चाहिये, क्यों कि यह छूट उसकी विपरीत परिस्थिती के कारण मिलनी चाहिये।
8.    सरकारी और गैर सरकारी क्षैत्र की सेवाओं में 40 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं का होना चाहिये। कुछ सेवायें महिलाओं के पक्ष में रिजर्व कर देनी चाहिये। रोजगार का 50 प्रतिशत महिलाओं के पक्ष में किया जाना उसे उन्नत और सक्षम बनाता है।
9.    महिलाओं के विरू़द्ध किये गये अपराध संज्ञेय होंगे। कम से कम 15 दिन से पहले किसी में भी जमानत नहीं होगी। जजों को स्वतंत्ररूप से अपराधी का पुर्न परिक्षण करवानें एवं साक्ष्य एकत्र करवानें का अधिकार होगा।
10.    भारत में विधवा एवं परित्यक्ता होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण होता है। इस कुरीति से बाहर निकले हेतु पुर्न विवाह को सरकारी प्रोत्साहन दिया जायेगा तथा विशेष परिस्थिती छोड कर,विवाह के सात वर्ष से पूर्व किसी भी तलाक प्रकरण की मंजूरी नहीं दी जायेगी। भरण पोषण राशी नहीं देने पर सम्बंधित को तुरंत जेल भेजने के प्रावधान होंगें। विधवाओं को सरकारी सेवा में 10 प्रतिशत पद आरक्षित रखें जायेंगे। उन्हे सिर्फ विधवा होने के आधार पर नौकरी पानें का अधिकार होगा।

कुल मिला कर जब आप महिलाओं को अपने बराबर चलायेंगे, अवसर देंगे तो समाज में यह असन्तुलन स्वतः समाप्त हो जायेगा। इसके लिये शिक्षा,संपत्ति और रोजगार में वरीयता प्रदान करना ही प्रमुख सुधार के बिन्दु हें। मगर इसे पाने के लिये साहस पूर्वक समाज में बदलाव के महती कदम उठाने होंगे। लगता तो नहीं कि यह सभी अभी हो पायेगा। मगर इतना तो तय है कि मेरी जो बातें सामनें हें। उन तक एक ना एक दिन समाज और सरकारों को पहुंचना ही होगा।

आपका
अरविन्द सिसोदिया
09509559131/9414180151

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