टैरिफ़ वार में आंतरिक मजबूती ही रामबाण उपाय – अरविन्द सिसोदिया
टैरिफ़ वार में आंतरिक मजबूती ही रामबाण उपाय – अरविन्द सिसोदिया
कोटा, 9 जनवरी। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्याशी एवं भारत–तिब्बत सहयोग मंच के प्रांतीय महामंत्री अरविन्द सिसोदिया ने अमरीकी टैरिफ़ वार और उसके द्वारा अपनाई जा रही स्वघोषित तानाशाही प्रवृत्तियों के संदर्भ में भारत की आंतरिक एकता और राष्ट्रीय मजबूती पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि " वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में देश के नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी की सरकार के साथ एकजुट होकर खड़े रहना ही समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।"
सिसोदिया ने कहा कि " देश, काल और परिस्थितियों के मद्देनजर हमें समसामयिक चुनौतियों की विशिष्टताओं को समझते हुए अपने कदम तय करने होंगे। " उन्होंने कहा कि " केवल बयानबाजी या भावनात्मक प्रतिक्रियाएं किसी भी राष्ट्र को सशक्त नहीं बनातीं। वास्तविक शक्ति वही होती है जो संकट की घड़ी में ठोस निर्णयों, अनुशासित कार्यप्रणाली और राष्ट्रीय हित में उठाए गए व्यावहारिक कदमों से सामने आती है। हमारी असली परीक्षा अनुशासन, साहस और हमारे कार्यों से होती है, न कि शब्दों से।"
उन्होंने कहा कि " आज न केवल पूरा विश्व, बल्कि स्वयं अमरीका भी गंभीर संकटों में फंसता जा रहा है। वहां आंतरिक उथल-पुथल, अनिश्चितता और अस्थिरता बढ़ रही है। वैश्विक व्यवस्था की पारंपरिक नैतिकताएं और मर्यादाएं कमजोर पड़ती दिखाई दे रही हैं। ऐसे में पूरी दुनिया स्तब्ध है और हर देश अपनी सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और संप्रभुता को लेकर नई चुनौतियों से जूझ रहा है।"
अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि "इस प्रकार की विषम परिस्थितियों में किसी भी राष्ट्र को परिस्थिति के अनुरूप विवेकपूर्ण और दूरदर्शी कदम उठाने होते हैं।" उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि " प्रधानमंत्री मोदीजी के नेतृत्व में भारत सरकार इन चुनौतियों का सामना पूरी मजबूती और सूझ-बूझ के साथ कर रही है तथा देश की संप्रभुता, आत्मनिर्भरता और दीर्घकालिक हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।"
उन्होंने कहा कि " भारत पिछले 11 वर्षों में वैज्ञानिक सोच और आधुनिक तकनीकी आधारों पर तीव्र गति से आगे बढ़ा है। आज भारत न केवल आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम बढ़ा रहा है, बल्कि विश्व अर्थव्यवस्था में एक उभरती हुई महाशक्ति के रूप में स्थापित हो रहा है। यह प्रगति, आत्मविश्वास और वैश्विक मंच पर बढ़ती भूमिका कुछ शक्तियों को असहज करती है। ऐसे में भारत की बढ़ती सामर्थ्य के प्रति कुछ प्रतिक्रियाएं आना स्वाभाविक है, लेकिन इन सबका सामना हमें संयम, रणनीति और राष्ट्रीय हित की दृष्टि से करना होगा।"
उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि " जब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने परमाणु परीक्षण किए थे, तब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक प्रतिबंध लगाए गए और भारत को अलग-थलग करने के प्रयास किए गए। लेकिन उस समय भारत ने अपनी आंतरिक एकजुटता, आत्मविश्वास और राष्ट्रीय संकल्प के बल पर न केवल उन चुनौतियों का सामना किया, बल्कि एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान भी स्थापित की।"
सिसोदिया ने कहा कि " आम जनमत की आंतरिक एकता ही इस सूझ-बूझ की सबसे बड़ी ताकत है। जब देश की जनता एकजुट होकर अपने नेतृत्व के साथ खड़ी होती है, तब कोई भी बाहरी दबाव राष्ट्र की प्रगति को रोक नहीं सकता। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।"
सिसोदिया ने कहा कि "आज भी हमें उसी भावना को जीवित रखने की आवश्यकता है। आंतरिक मजबूती, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान ही किसी भी बाहरी दबाव का सबसे प्रभावी उत्तर है। " उन्होंने " आमजन से आह्वान किया कि वे देश के नेतृत्व के साथ एकजुट रहकर सकारात्मक सोच, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान दें, क्योंकि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में यही भारत की सबसे बड़ी शक्ति और सबसे प्रभावी रामबाण उपाय है।"
भवदीय
अरविन्द सिसोदिया
9414180151
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