चार नॉमिनी बनाने की व्यवस्था से झगड़े और बढ़ेंगे - अरविन्द सिसोदिया

चार नॉमिनी बनाने की व्यवस्था से झगड़े और बढ़ेंगे - अरविन्द सिसोदिया 
कोटा 8 जनवरी। सामाजिक समस्याओं के प्रति जागरूक, राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं भारत तिब्बत सहयोग मंच प्रांतीय महामंत्री अरविन्द सिसोदिया नें बैंकिंग व्यवस्था में नॉमिनी बनाने की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त करने की मांग करते हुये कहा है कि " इससे परिवार में धोखाधड़ी और आपराधिक विवाद बड़े हैँ। वास्तविक मालिकों का धन नॉमिनी लूट लेता है और उस धन का उपयोग और उपभोग नॉमिनी करता है वहीं वास्तविक उत्तराधिकारी लंबी अदालती लड़ाई में उलझें रहते हैँ। और बड़ी हानी को प्राप्त होते हैँ।"

सिसोदिया नें माननीय प्रधानमंत्री महोदय, माननीय गृह मंत्री , माननीय वित्त मंत्री ,माननीय वाणिज्य मंत्री एवं विधि एवं क़ानून मंत्री भारत सरकार तथा रिजर्व बैंक के गवर्नर को मांगपत्र भेज कर मांग की है कि " नॉमिनी मात्र धन संभालने वाला ट्रस्ट्री होता है, उसे मालिकाना हक प्राप्त नहीं है। नॉमिनी को बैंक से प्राप्त राशि को वास्तविक उत्तराधिकारीयों को संभलाना होता है। इस प्रकार एक की जगह चार नॉमिनी तक़ बढ़ाने की व्यवस्था से कोई लाभ नहीं है बल्कि होगा। बल्कि इससे चार गुना विवाद बढ़ेंगे।

सिसोदिया ने कहा कि " हाल ही में बैंको में अपने खाते में चार नॉमिनी तक़ बनाने की व्यवस्था की गईं है, इससे विवाद चार गुना ओर अधिक बढ़ेंगे और उत्तराधिकार क़ानून का जबरिया उल्लंघन, क़ानून के संरक्षण प्राप्त होगा गया है " । उन्होंने कहा कि " कुल मिला कर एक चोर जैसी व्यवस्था से ही लोग दुखी थे,अब नये संसोधन से चार चोरों का गिरोह खड़ा करना पूरी तरह अनुचित है। यह अधकचरी व्यवस्था कल्याणकारी कम और विवाद उत्पन्नकर्ता ज्यादा साबित होगा।"

इसके साथ ही अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि " आम नागरिकों को नॉमिनी और वास्तविक उत्तराधिकारी के बीच के अंतर की स्पष्ट जानकारी नहीं होने के कारण, इस बैंकिंग व्यवस्था का लगातार दुरुपयोग हो रहा है। नॉमिनी केवल धन का संरक्षक (ट्रस्टी) होता है, मात्र कास्डिटोयन होता है। उसका उस धन पर स्वामित्व अधिकार भी नहीं होता, इसके बावजूद अनेक मामलों में नॉमिनी द्वारा प्राप्त राशि से वास्तविक वारिसों को उनके वैधानिक अधिकार से बंचित कर दिया जाता है। जिससे परिवारों में धोखाधड़ी,आपराधिक प्रवृत्तियां, लंबे समय तक चलने वाले न्यायिक विवाद, मानसिक तनाव और आर्थिक शोषण जैसी गंभीर स्थितियां उत्पन्न हो रही हैं।"

उन्होंने कहा कि " हाल ही में एक की जगह चार नॉमिनी बनाने की जो व्यवस्था की गई है, वह उत्तराधिकार कानून का उल्लंघन एवं सामानान्तर व्यवस्था है। जिससे समाधान के बजाय विवाद चार गुना बढ़ेंगे। "

सिसोदिया ने मांग की है कि " बैंकिंग सिस्टम को उत्तराधिकारीयों को सीधे राशि भुगताना करने की व्यवस्था करनी चाहिए । सामने उत्तराधिकारी खड़ें हैँ और भुगतान नॉमिनी को कर दिया जाना अनैतिक एवं समाज विरोधी है। इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करते हुए उत्तराधिकार कानून के अनुरूप पारदर्शी, न्यायसंगत और सरल प्रणाली लागू की जानी चाहिए। जिससे परिवारों में सौहार्द बना रहे और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी अथवा आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा न मिले।"

भवदीय
अरविन्द सिसोदिया
9414180151

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