कविता - शून्य से मत डरो,यह अस्तित्व की पहचान है।



कविता - शून्य से मत डरो

शून्य से मत डरो,
यह अस्तित्व की पहचान है।
पुरुषार्थ के लिए प्रेरणा ,
सफलता के लिए संघर्ष का नाम है।
===1===
यहीं से उठती है
कोशिशों की पहली आहट,
यहीं जन्म लेता है
खुद को साबित करने का साहस।
अंधेरों को चीरती हुई
विकास की यह किरण भरती उड़ान है 
===2===
जो शून्य में खड़ा रह सका,
वही ऊँचाइयों का अर्थ जानता है।
जो हार से आँख मिला सका,
वही जीत की भाषा पहचानता है।
याद रखो हर सफर शून्य से प्रारंभ होकर,
एक एक नया कीर्तिमान रचता है।
===3===
शून्य से मत डरो,
यह गिरने का नहीं,
उठने का नाम है।
शून्य से मत डरो,
यह अंत नहीं,
अस्तित्व की अनुसंधान है।
=== समाप्त===


 

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