भाजपा भारतीय संस्कृति के गरिमामय वैश्विक उत्थान हेतु कृतसंकल्पित, विपक्ष की अङ्गेबाज़ी रोक नहीं सकती — अरविन्द सिसोदिया Ram Janmbhumi
भारत की गरिमा सनातन हिंदुत्व के अपनत्व, भाईचारे और बंधुत्व से - अरविन्द सिसोदिया
भाजपा भारतीय संस्कृति के गरिमामय वैश्विक उत्थान हेतु कृतसंकल्पित, विपक्ष की अङ्गेबाज़ी रोक नहीं सकती — अरविन्द सिसोदिया
कोटा, 21 जनवरी। भारतीय जनता पार्टी राजस्थान के मीडिया संपर्क विभाग के प्रदेश सह संयोजक अरविन्द सिसोदिया ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भव्य निर्माण की द्वितीय वर्षगांठ के अवसर पर कहा कि “भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी के लिए राष्ट्रप्रथम की भावना के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़ी सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण, संवर्धन और सनातन जीवन-मूल्यों के माध्यम से समाज का संस्कार निर्माण सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
उन्होंने कहा कि “भारत केवल एक भौगोलिक भू-भाग नहीं, अपितु देवभूमि है। यह वही पुण्य भूमि है जहाँ स्वयं भगवान ने अवतार लेकर मानवता को मर्यादा, प्रेम, करुणा और कर्तव्य का संदेश दिया। श्रीराम का जीवन मर्यादा, श्रीकृष्ण का उपदेश प्रेम और कर्मयोग, भगवान शंकर प्रकृति के साथ चलो, देवी देवता गण कोई न कोई श्रेष्ठता के प्रेरणादायक, ये सभी जीवन मूल्य इसी भारत भूमि से जन्मे और सम्पूर्ण विश्व को दिशा देने वाले बने।”
सिसोदिया ने कहा कि “‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्’, यह केवल एक श्लोक नहीं, बल्कि भारतीय चिंतन की आत्मा है। यही विश्वबन्धुत्व की अवधारणा है, जो संपूर्ण मानवता के कल्याण की कामना करती है।"
उन्होंने कहा कि “भारतीय संस्कृति विश्व को ज्ञान का पथ दिखाने वाली प्राचीनतम सभ्यता है। इसी संस्कृति ने मानवता को गणितीय बोध, वैज्ञानिक चेतना और तार्किक दृष्टि प्रदान की। अंकों, शून्य, दशमलव प्रणाली तथा पाई जैसी अवधारणाओं ने विश्व की गणना-पद्धति को दिशा दी। कालगणना, ज्योतिष, खगोल विज्ञान, ग्रह-नक्षत्र और अंतरिक्ष बोध का प्रथम सुसंगठित ज्ञान भारत ने ही विश्व को प्रदान किया।”
सिसोदिया ने कहा कि “औषधि, रसायन, चिकित्सा और शल्य चिकित्सा की समृद्ध परंपरा का उद्भव भारतभूमि पर ही हुआ। यह वही भूमि है जहाँ सभ्यता, कला भौतिक विकास और संस्कृति का जन्म हुआ और जिसकी सांस्कृतिक चेतना के प्रवाह के साथ विश्व निरंतर आगे बढ़ता गया।”
उन्होंने कहा कि “भारतीय संस्कृति दया, प्रेम, करुणा और मानवीय संबंधों पर आधारित है। यहाँ अपार विविधताओं के बावजूद कोई भेद नहीं, बल्कि प्रगाढ़ प्रेम और समरसता है। इस संस्कृति ने प्रेम, वात्सल्य और मानवता के जीवन-मूल्यों को पुष्ट किया है।”
अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि “भारत की विजय तलवार से नहीं, बल्कि अपनत्व, भाईचारे और बंधुत्व से हुई है। यहाँ नैतिक आदर्श जीवंत हैं। पुरुष में मर्यादा और नारी में गरिमा का संतुलन है। जन-मानस की पवित्रता, विनय और शालीनता ऐसी है कि शीश स्वतः नतमस्तक हो जाता है।”
उन्होंने कहा कि “प्रकृति के प्रति मातृत्व भाव भारतीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान है। नदियाँ माँ हैं, पत्थर में ईश्वर का वास है, पशु-पक्षी भी पूज्य हैं, यहाँ समस्त अस्तित्व के प्रति सम्मान का भाव है।”
सिसोदिया ने कहा कि “सनातन हिंदुत्व सृष्टि के प्रत्येक कण में श्रद्धा का संचार करता है। यहाँ केवल मानव ही नहीं, अपितु जड़-चेतन समस्त सृष्टि पूज्य है। आस्था और सम्मान जीवन की धड़कन हैं। भारतीय संस्कृति ज्ञान, प्रेम, नैतिकता, समावेशिता और प्रकृति-पूजन का वह अद्भुत समन्वय है, जो अनादिकाल से निरंतर विकसित होता हुआ, विश्व को प्रेरणा देता रहा है। इस गौरवशाली सांस्कृतिक धरोहर की धर्मध्वजा को आगे बढ़ाने का दायित्व भारतीय जनता पार्टी के प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए गर्व और गौरव की अनुभूति है।”
भवदीय
अरविन्द सिसोदिया
प्रदेश सह-संयोजक
मीडिया संपर्क विभाग, भाजपा राजस्थान
📞 9414180151
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