कविता: धैर्य बनाए रखना,इसमें बड़ी ताकत है
कविता: धैर्य बनाए रखना,इसमें बड़ी ताकत है
धैर्य बनाए रखना, इसमें बड़ी ताकत है,
शालीनता बनाए रखना, इसमें बड़ी ताकत है।
सागर की तरह शांत रहना, इसमें बड़ी ताकत है,
हवा की तरह निर्मल रहना, इसमें बड़ी ताकत है।
हर क्षण स्वयं से संवाद करना, इसमें बड़ी ताकत है।
=== 1 ===
जब जीवन की आँधियाँ सब कुछ तोड़ने आएँ,
जब अपने ही प्रश्न बनकर रास्ते रोकने आएँ,
तब टूटकर भी न बिखरना,
अंधकार में भी दिशा खोजना,
एक क्षण ठहर जाना, खूब सोचना, समझना,
मौन में छिपे उत्तर सुन लेना— इसमें बड़ी ताकत है।
=== 2 ===
अपमान को अनुभव बना लेना,
हार को सीख समझकर आगे बढ़ जाना,
गिरकर फिर उठने का साहस जुटाना,
हर परिस्थिति में उम्मीद को थामे रखना—
इसमें अपार ताकत है।
=== 3 ===
भीड़ में भी स्वयं से जुड़े रहना,
खुद से, खुद की बात करना,
अकेलापन कमजोरी नहीं,
खुद से मिलने का अवसर मानना।
आत्मचिंतन से भीतर विश्वास का दीप जलाए रखना,
यही आत्मबल, परम शक्ति का विस्फोट करता,
जीवन को सच्ची ताकत से भरता—
इसी ताकत को बनाए रखना।
=== 4 ===
सागर सब कुछ सहकर भी अपनी गहराई नहीं खोता,
गहराई बड़ी सयानी है, उथले को कर देती पानी-पानी।
हवा सबको छूकर भी किसी की कैद में नहीं रहती,
निर्मलता की कहीं कोई नहीं सानी।
सबसे संपर्क हो,
मगर विवेक को अपना साथी रखना।
=== 5 ===
ऐसी ही स्थिर, स्वतंत्र और सजग आत्मा
सबसे बड़ी ताकत है।
जब शब्द साथ छोड़ दें,
जब भाव बोझ बन जाएँ,
तब शोर नहीं, संतुलन चुनना,
सही रहकर भी सरल बने रहना—
यही महानता है।
=== 6 ===
धैर्य बनाए रखना, इसमें बड़ी ताकत है,
सहनशीलता बनाए रखना, इसमें बड़ी ताकत है।
जो बाहर से शांत, पर भीतर से अडिग हो,
जो परिस्थितियों से नहीं, अपने मूल्यों से चलता हो—
वही सच में शक्तिशाली है।
=== समाप्त ===
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