कविता - अगर तुमने वीरों का बलिदान छिपाया तो
कविता - अगर तुमने वीरों का बलिदान छिपाया तो
- अरविन्द सिसोदिया
अगर तुमने वीरों का बलिदान छिपाया तो,
कहां से लाओगे नेताजी सुभाष,
कहां से लाओगे वीर सावरकर,
कहां से लाओगे भगत सिंह – चंद्रशेखर,
कहां से लाओगे भावी वीर बलिदानी।
जिनकी ललकार से कांपी थीं सल्तनतें
जिनके स्वप्नों से जागा था सारा हिंदुस्तान,
जिनका जीवन ही रणघोष बना, युद्धभूमि सा सजा,
जिनका हर श्वास था राष्ट्र-प्राण। शौर्य को प्रणाम।
जिन्होंने फांसी को फूल समझा,
फंदों को मातृभूमि के लिए चूमा।
जिन्होंने कारागार को तीर्थ बनाया,
जिन्होंने यातनाओं को प्रसाद माना
जिन्होंने भारत माता के चरणों में,
हँसते-हँसते शीश चढ़ाये, आओ उनके गीत गायें।
यह केवल अतीत नहीं, यह चेतावनी भी है,
यह हुंकार है, यह आव्हान है, यह भविष्य का प्रकाश है,
अपने पुरषार्थ का स्मरण रहे राष्ट्र को,
वर्ना भविष्य भी लहूलुहान है।
अरे मत भुलाओ वीरों को,
नमन करो शहीदों को,
उनके त्याग को, उनके बलिदानों को,
राष्ट्र जीवन में उन्हें उतारो, सम्मानों से।
बताओ नई पीढ़ी को,
कि आज़ादी उत्सव नहीं, भविष्य का रक्षण है,
यह हर युग में रूप बदल कर युद्ध होता है,
यह हर पीढ़ी का उत्तरदायित्व आजादी की रक्षा है।
क्योंकि जिन रक्तधाराओं में बहेगा यह सत्य,
जिन हृदयों में धधकेगा यह स्वाभिमान,
उन्हीं में से तो उठेंगे फिर से,
नये सुभाष,नये भगत सिंह नये चंद्रशेखर महान।
उन्ही में से तो आएंगे राणा प्रताप,शिवाजी, गुरु गोबिंद सिंह
यही तो प्रगटाएंगे लक्ष्मी बाई,दुर्गावती, वीर दुर्गा भाभी...
सोगंध उठायें सच बतलाएंगे,
नई पीढ़ी की वीरता और बलिदान पढ़ाएंगे।
अग्निवीर से तेजस्वी, भारत मां के सपूत बनाएं.
अग्निवीर से तेजस्वी, भारत मां के सपूत बनाएं.
जय भारत, जय हिंद । 🇮🇳
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