कविता - सावधान हो सरकार,सावधान !
कविता - सावधान हो सरकार सावधान !
एक विपक्षी नेता विदेश जाता है,
देश विरोधी षड्यंत्र वहाँ से लाता है।
पूरा मजमा आराजकता का फैलाता है।
हर अड़ंगा देश हित के कामों में लगाता है।
इसका रखो जम कर ध्यान,
सतर्कता से करो समाधान।
सावधान हो सरकार सावधान ...!
==1==
जब जब वह विदेश गया,
शिकायतें फर्जी साथ ले गया,
वहाँ भारत को कटघरे में खड़ा कर,
शैतानी तालियों बजबाता है।
विदेशी मंचों पर झूठ के आँसू बहाता हैं,
देश की बदनामी का शौक इसे कुछ ज्यादा है।
सावधान हो सरकार सावधान ...!
==2==
अडानी - अंबानी रोज़ चिल्लाता,
पर विदेशी व्यापारियों की लूट पर,
हमेशा मौन साध जाता है।
राफेल पर अड़ंगा, पैगासस पर झूठा तूफान,
हिड्नेवर्ग से किया देश का भारी नुकसान।
जनता जिन्हे चुनती है,
उनके खिलाफ ये षड्यंत्र चलाता है।
सावधान हो सरकार सावधान...!
==3==
वंशवाद के आधार पर,
बिना चुने कुर्सी पाना चाहता है।
कुर्सी नहीं मिली तो,
देश को जलाना चाहता है।
इनके इरादे शत्रुओं जैसे हैँ,
शत्रुओं जैसी भाषा बोली इसकी,
इनके आराजकतावाद पर,
राष्ट्रहित में काबू पाना है।
सावधान हो सरकार,सावधान...!
==4==
कभी लोकतंत्र पर सवाल,
कभी संविधान पर बबाल,
कभी सेना पर झूठ का अत्याचार ,
हर राष्ट्रीय मुद्दे पर विदेशी एजेंडा लाता है,
पूरा मजमा अराजकता फैलाने का लगाता है,
हर बयान से ज़हर टपकाता है,
इनकी चाह देश टूटे या हों दंगे
सत्ता पानें के लिए, इनके षड्यंत्री धंधे।
सावधान हो सरकार,सावधान....!
==5==
सरकार से नहीं, देश से लड़ते हैं,
विदेशों में भारत बेचते हैं।
अब पहचानो इस चालाकी को,
विरोध के नाम पर गद्दारी को,
कुर्सी की भूख में जो भूल गए
राष्ट्रधर्म की जिम्मेदारी को।
सावधान हो सरकार,सावधान...!
==6==
काले कर्मों के अध्याय काले ही हैँ,
इतिहास इस कालिख को लिखेगा,
विदेशी हो रक्त जिनमें,
उनमें स्वदेशी हित कहां मिलेगा।
देश विरोधी इस भूमिका से,
देश को हर बार बचाना होगा,
प्रखर राष्ट्रवाद को प्रज्ज्वलित करें,
हर शत्रुता को हराना होगा।
हर शत्रुता की हराना होगा।
=== समाप्त ===
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