कविता - राशन भाषण चाटन सूं बात न बणगी रे



कविता - राशन भाषण चाटन सूं बात न बणगी रे

राशन भाषण चाटन सूं बात न बणगी रे,
थैं बताओ सात महल कसी ठणगी रे।
राशन भाषण चाटन सूं बात न बणगी रे,
थैं बताओ सात महल कसी ठणगी रे।
===1===
वोटां मांगै हाथ जोड़ कै, झुक-झुक आयो,
गादी मिलती ही नेता जी रंग बदलायो।
गांव री गल्ली भूल ग्यो, शहर मं रम ग्यो,
जनता रो दुख-दर्द सारा कागजां मं दब ग्यो।
राशन भाषण चाटन सूं बात न बणगी रे,
थैं बताओ सात महल कसी ठणगी रे।
===2===
बोलै ही बोलै, सुनै कोय नी रे,
गरीब री हांक समझै कोय नी रे।
उद्घाटन-भाषण, फीता-फोटो भारी,
पांच बरसां मं काम कर्यो बस माइक-मारी।
राशन भाषण चाटन सूं बात न बणगी रे,
थैं बताओ सात महल कसी ठणगी रे।
===3===
अब आयो चुनाव, दूरबीन हाथां लई,
टोळा-टोळा ढूंढै जनता किणी गई।
कार्यकर्ता गायब, नारा नी उठे,
जिंदाबाद बोलण वाला कोय नी दिखे।
राशन भाषण चाटन सूं बात न बणगी रे,
थैं बताओ सात महल कसी ठणगी रे।
===4===
जनता बोलै अब आंख खुल गी रे,
झूठी बातां सूं किस्मत नी धुल गी रे।
काम करोगो तो मान-सम्मान मिलसी,
नांई तो कुर्सी सपना बन कै रहसी।
राशन भाषण चाटन सूं बात न बणगी रे,
थैं बताओ सात महल कसी ठणगी रे।
===समाप्त===

टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

विष्णु के अवतार ' नरसिंह भगवान '

संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को अपमानित करने वालों पर रासुका जैसा कठोर एक्शन हो - अरविन्द सिसोदिया

कविता - युगों युगों में एक ही मोदी आता है - अरविन्द सिसोदिया

कविता - हम हिंदू वीर संतानें हैँ

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

'परिसीमन' और 'जाति जनगणना के नाम पर महिला आरक्षण अटकाये रखना चाहती है कांग्रेस

योगिराज श्यामा चरण लाहिरी महाशय Yogiraj Shyama Charan Lahiri Mahasaya