UGC के पीछे कौन...

सबसे बड़ा खेल हो गया इसके साथ ये है इंदिरा जय सिंह ये गई सुप्रीम कोर्ट और पहले से एक तरफा यूजीसी गाइड्लाइन को और सख्त बनवाने के मकसद से वैसे इसके एक एनजीओ को सरकार पहले ही FCRA licence रद्द कर चुकी है विदेशी सीक्रिट एजेंसी से जुड़े संस्थानों से फन्डिंग लेने और उसका सही हिसाब जमा ना करने के लिए 

अब इस मामले मे इसने रोहित वेमुला की मा और एक मुस्लिम महिला जिसके लड़के ने आत्महत्या की है उसको दोनों को याचिककर्ता बना के याचिका डाली की यूजीसी की गाइड्लाइन दुबारा बनाई जाए इसका तर्क था की उत्पीड़न के मामले 5 साल मे 182% बढ़ गए है और 125 के करीब से 5 साल मे 374 के करीब हो गए है यहा खेल खतरनाक था इसका इसकी मंशा थी एससी एसटी के साथ अल्पसंख्यक के नाम पे मुसलमानों को भी खास संरक्षण दे दिया जाए इस लिए एक मुस्लिम महिला की याचिका साथ लगाई....।

अब सामान्य प्रोसेस मे कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया और सुनवाई हुई तो कोर्ट ने यूजीसी को निर्देश दिए की गाइड्लाइन को सुधार करे....।

अब यहा खेल ये था की एक तरफ ये पक्ष था दूसरी तरफ सरकार थी तीसरा पक्ष यानि जनरल समाज की तरफ से कोई नहीं आया तो उनकी बात नहीं सुनी गई।

यहा कहानी ये हुई की मार्च मे अगली सुनवाई थी लेकिन यूजीसी से नई गाइड्लाइन जारी कर दी गई जबकि कायदे से नई गाइड्लाइन मार्च मे कोर्ट मे पेश करके कोर्ट की सहमति से जारी करनी चाहिए थी और यही इस पक्ष का खेल था की कोर्ट मे इस ड्राफ्ट गाइड्लाइन को बहस मे खीच के कोर्ट के आदेश से अपने कुछ एक्सपर्ट को कमिटी मे शामिल करवा के एससी एसटी के साथ अल्पसंख्यक के नाम पे मुस्लिम को भी इसमे शामिल करवा देंगे कोर्ट से मुहर लग जाएगी और फिर रास्ता खुलेगा एससीएसटी ऐक्ट मे भी मुस्लिम और अल्पसंख्यकों को शामिल करवाने का यानि काँग्रेस जो लक्षित हिंसा बिल लाना चाहती थी वो ऐसे हासिल किया जा सके।

अब इसमे सरकार ने यूजीसी से गाइड्लाइन बनवा के सीधा गज़ट मे डाल के लागू करवा दिया और ये पक्ष समझ ही नहीं सका अब इनके पास मार्च की कोर्ट की डेट थी जिसमे शायद ये शिकायत करते और गाइड्लाइन पे रोक लगवाते की जब कोर्ट के निर्देश पे गाइड्लाइन बनी थी तो बिना कोर्ट को बताए क्यू लागू की और कोर्ट इसका रिव्यू करे और उसमे ये अपनी मंशा पूरी करवा ले 
लेकिन इस सब के लिए मार्च तक रुकना था लेकिन अचानक नशे मे सोया हुआ सवर्ण समाज अचानक हरकत मे आता है और हंगामा शुरू हो जाता है अब पूरा विपक्ष का हाल ऐसा की काटो तो खून नहीं मानो इनकी साजिश नंगी हो गई।

मैंने पहले भी कहा की यूजीसी की गाइड्लाइन ऐसे बनाई गई थी की देखने मे जाती वाले क्लॉज़ मे बस सवर्ण समाज को आपत्ति थी क्युकी सिर्फ उनको ही बाहर रखा गया था लेकिन बाकी की गाइड्लाइन मे सब जगह हितधारक कह के बात की गई काही एससी एसटी ओबीसी को खास वर्ग के रूप मे नहीं लिखा गया मतलब अगर इसको लागू करना पड़े तो इसका दूसरा मतलब निकल सके की सभी क्षात्र हितधारक है कोई भी किसी की भी शिकायत कर सकता है और दूसरी तराफ कुछ बाते आपत्ति जनक भी लगे और फिर झूठी शिकायत पे कार्यवाही करने वाला क्लॉज़ भी हट गया।

अब दो नतीजे निकले एक सवर्ण समाज को भले अधूरा ही सही खतरा समझ आ गया और दूसरा ये की इस मामले मे सवर्ण समाज की तरफ से इस वेमुला केस मे शामिल होने की शुरुवात हो गई और विष्णु शंकर जैन को सवर्ण समाज की तरफ से कोर्ट मे याचिका डालने भेजा गया कोर्ट ने याचिक स्वीकार करके गाइड्लाइन पे रोक लगा दी और अब विष्णु शंकर मार्च मे इंदिरा जय सिंह के खिलाफ तीसरा पक्ष बन के खड़े होंगे और ऐसे मे कोर्ट भी संभाल के फैसला करेगी क्युकी सवर्ण समाज की नाराजगी उनको भी दिख रही है।

तो कुल मिला के अब खुद सोचिए अगर सरकार इसमे जनरल वालों का ध्यान नहीं रखती तो ये गाइड्लाइन मार्च मे कोर्ट मे जाती और वहा से इसमे सुधार करवाया जाता इसको और खतरनाक बना दिया जाता और फिर कोर्ट के आदेश की ताकत से इसको लागू किया जाता और सरकार मजबूर हो जाती और उस स्थिति मे आंदोलन सवर्ण करते तो एससी एसटी ओबीसी और अल्पसंख्यक भी सामने होते यानि गृह युद्ध जैसी हालत आराम से बन जाती  अब समझ आया विदेशी सीक्रिट सर्विस क्यू साल के की करोड़ देती है कुछ चुनिंदा वकीलों को 

आज भारत की सरकार से सबसे ज्यादा दिक्कत है अमेरिका को वो किसी भी हद तक जाएंगे सरकार को और भारत को अस्थिर करने के लिए और सरकार भी हर तरह से इसको नाकाम करेगी 
अब शायद आपको खुद समझ आएगा की विरोध भड़कता गया सरकार खामोश क्यू रही ताकि दुनिया को दिखे के कई दिनों से देश मे एक वर्ग हंगामा कर रहा है और लोकतंत्र मे दुनिया का नियम है की कोई भी सरकार अपने समर्थक वर्ग को कभी नाराज नहीं करती और सरकार ने इस नाराजगी को इस्तेमाल किया है बखूबी और इसीलिए विपक्ष चुप बैठ के देखता रह गया तमाशा और अब उनका आगे का खेल खराब हो गया क्युकी अब सवर्ण पक्ष भी इस मुकदमे का हिस्सा बन गया अब ये लोग अकेले कोर्ट मे कुछ भी दलील नहीं चला पाएंगे क्युकी अब सबकी नजर इस मामले की हर पेशी पे होगी।

हरीश सालवे ने कहा था की काँग्रेस कोर्ट के माध्यम से सरकार चलाएगी अब सरकार ने वो रास्ता भी बंद कर दिया है 
हालांकि इस सब मे धर्मेन्द्र प्रधान बेचारे मुफ़्त मे गाली खाए 
हा इस पोस्ट पे कमेन्ट करने के पहले इसको दो बार पढ़ ले सोच ले समझ ले न समझ आए तो किसी से समझ ले क्युकी राजनीति आसानी से समझ नहीं आती सब को..।।

जय श्री राम

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