कविता - आओ एकजुट हो जाएं दुश्मन चारों ओर खड़े हैं,अपनी-अपनी जाल बिछाये , देश धर्म की सावधानी से, हर जाल को काट दिखाना है। आओ एकजुट हो जाएं,भारत को हम फौलादी बनाएं। =====1==== स्वदेशी का दीप जलाएं हम, अपने श्रम का मान बढ़ाएं हम, घर-घर आत्मनिर्भरता लाकर, भारत का गौरव लाएं हम। झूठ, फरेब और भ्रमों से, सजग विवेक जगाएं हम, सोशल मीडिया के रण में भी,सत्य का ध्वज लहराएं हम। =====2==== जाति-पंथ के विषयों से ऊपर, राष्ट्र प्रथम अपनाएं हम, भाषा, प्रांत, विचार भिन्न हों,फिर भी राष्ट्र एक हमारा । सीमा पर जो प्रहरी जाग रहे,उनके परिवारों को दुलार हमारा, सेना, किसान और श्रमिक मिलकर, राष्ट्र स्वाभिमान बन जाएँ. =====3==== कर का ईमानदारी से भुगतान, कर्तव्य मार्ग अपनाएं हम, भ्रष्ट आचरण छोड़-छाड़ कर,नवभारत का मान बढ़ाएं हम। स्वच्छता को संस्कार बनाकर, नदियों का श्रृंगार करें, जल, जंगल और धरती माता का,मिलकर सब उद्धार करें। =====4==== नारी का सम्मान सुरक्षित हो, ऐसा समाज बनाएं हम, बेटी को शिक्षा, शक्ति देकर,नवयुग का दीप जलाएं हम। अनुशासन को शक्ति बनाकर,समय का मूल्य समझायें हम, योग, संयम और सदाचार से...
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