कविता - जागरूक बन जाओ भारत, जागरूक बन जाओ

कविता - जागरूक बन जाओ भारत, जागरूक बन जाओ।
- अरविन्द सिसोदिया 
जागरूक बन जाओ भारत, जागरूक बन जाओ।
जागरूक रहते तो ना बंटता हिंदुस्तान,
जागरूक रहते तो ना बनता पाकिस्तान,
जागरूक होते तो अपना होता संविधान,
जागरूक होते तो न होते तमाम व्यवधान,
जागरूक बन जाओ भारत, जागरूक बन जाओ।
===1===
दुश्मन आये बन आक्रमणकारी,
आजादी में भी उन्होंने ही बाज़ी मारी,
जान-बूझकर रखा हमें अपरोक्ष गुलाम,
कुर्सी की खातिर गईं अखंडता,
लालच में बेच दिया गया स्वाभिमान,
सोता रहा जन जन, जागता रहा शैतान,
जागरूक बन जाओ भारत, जागरूक बन जाओ।
===2===
इतिहास बदला, सच को छुपाया,
वीरों के बलिदान को झुठलाया,
गुलामी की सोच को अमृत बताया,
अपनों ने ही अपनों को भरमाया,
धर्म, जाति में देश को बाँटा,
सत्ता ने हर बार सच को काटा,
जागरूक बन जाओ भारत, जागरूक बन जाओ।
===3===
मंदिर टूटा, संस्कृति रोई,
माँ भारती की आँखें धोईं,
काग़ज़ों में न्याय सिमट गया,
सच बोलने वाला ही मिट गया,
शिक्षा से चेतना दूर की गई,
पीढ़ी दर पीढ़ी भूल बोई गई,
जागरूक बन जाओ भारत, जागरूक बन जाओ।
===4===
अब भी समय है आँख उठाने का,
झूठे जाल से मन छुड़ाने का,
न इतिहास से मुँह मोड़ो तुम,
न ही भविष्य को यूँ छोड़ो तुम,
पहचानो षड्यंत्र, पहचानो चाल,
देश पहले, फिर हर सवाल,
जागरूक बन जाओ भारत, जागरूक बन जाओ।
===5===
जब जन जागेगा, तंत्र बदलेगा,
हर गद्दार खुद ही संभलेगा,
सच की मशाल जब हाथों में होगी,
तब भारत की रात न होगी,
एकता, साहस, सत्य अपनाओ,
सोए भारत को फिर से जगाओ,
जागरूक बन जाओ भारत, जागरूक बन जाओ।
=== समाप्त ===

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