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आरोप और गिरफतारी में भी घोटाला : जेपीसी की मांग जायज और जरुरी

- अरविन्द सीसोदिया       पूर्व संचार मंत्री ए. राजा की गिरफ्तारी और उन पर लगाये गये आरोपों के बाद इस बात की और भी दरकार हो गई है कि इस सारे मामले की जांच , सही हो , पूरी हो और उसके सही और सम्पूर्ण सच से देश परिचित हो ...! अभी राजा की गिरफ्तारी के बाद मात्र २२ हजार करोड़ के ही आरोप लगाये गये हैं ..., अर्थात आरोप  और गिरफतारी में भी घोटाला ...!! यह होना भी था क्यों की सीबीआई सरकारी संस्था है , सरकार के विरुद्ध खड़ी होनें की हिम्मत  इसमें है ही नहीं ...! बहुत ही कमजोर स्तर के जांच अधिकारी इसमें होते हैं जो राजनीति कि बड़ी हस्तियों के खिलाफ कुछ भी नहीं कर पाते  , कुल मिला कर डर जाते  हैं ..! आरुषी ह्त्या काण्ड में इसका सच सामनें आ चुका है....! इसीलिए जेपीसी की मांग जायज और जरुरी हो गई है ! सीबीआई के आधे अधूरे आरोप ....       सीबीआई ने राजा पर मात्र २२ हजार करोड़ के आरोप लगाते हुए , उसे मात्र दो कंपनियों को लाभ पहुचानें का दोषी माना  है ..,यह सीवीसी के १.७६ लाख के आकलन से बहुत कम है...! ज्ञातव्य रहे कि २ जी  स्पेक्ट्रम लायसेंस आबंटन में स्वान और यूनिटेक कंपनियों नें लायसेंस  हांसिल करनें