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हिन्दुन्व की जय जनचेतना की महाक्रांति: गोस्वामी तुलसीदास

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तुलसी जयंती एवं पुण्य तिथि पर विशेष: श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी ( 6 अगस्त 2011) - अरविन्द सीसौदिया चन्दन है इस देश कि माटी, तपोभूमि हर ग्राम है । हर बाला देवी कि प्रतिमा, बच्चा बच्चा राम है । इन पंक्तियों को किसी ने वास्तव में अपने कर्म - कौशल से सिद्ध किया है तो उस महान राष्ट्रभक्त का नाम पूज्य श्रीगोस्वामी तुलसीदास जी है, श्रीरामचरित मानस वह ग्रंथ जिसने, मुगलों के आततायी हिंसक साम्राज्य में अपने अस्तित्व की लडाई लड़ रहे हिन्दुओं में नये विश्वास और नई ऊर्जा का संचार किया था, वह मौन धर्म क्रांति जो कलम से लिखी गई, सहास व आत्मोत्थान की अखण्ड ज्योती थी, जो सम्पूर्ण विश्व को आज भी प्रकाशमान किए हुये है। जिसनें हिन्दुत्व को नई तेजस्विता प्रदान की। करोडों-करोड योद्धाओं जैसा काम उन्होने अकेले अपने बलवूते पर कर दिखाया। विश्व साहित्य में गोस्वामी तुलसीदास की विशिष्ट पहचान,एक जनचेतना और लोक शिक्षण के महान कवि के रूप में है। उनके समकक्षता की बात तो बहुत दूर की है, कहीं कोई अन्य नजर ही नहीं आता। जब-जब होई धर्म की हानी,बाढ़ैं पाप असुर अभिमानी। तब तब प्रभु धरि सर

रामचरित मानस - हनुमान चालीसा के रचियता : गोस्वामी तुलसीदास

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* गोस्वामी तुलसीदास ने रामभक्ति के द्वारा न केवल अपना ही जीवन कृतार्थ किया वरन्‌ समूची मानव जाति को श्रीराम के आदर्शों से जोड़ दिया। संवद् 1554 को श्रावण शुक्ल पक्ष की सप्तमी को अवतरित गोस्वामी तुलसीदास ने सगुण भक्ति की रामभक्ति धारा को ऐसा प्रवाहित किया कि आज गोस्वामी जी राम भक्ति के पर्याय बन गए। *  गोस्वामी तुलसीदास की ही देन है जो आज भारत के कोने-कोने में रामलीलाओं का मंचन होता है। कई संत राम कथा के माध्यम से समाज को जागृत करने में सतत्‌ लगे हुए हैं। वे रामचरित मानस के ही नहीं अपितु .., विश्व में सबसे ज्यादा पड़ी जानें वाली प्रार्थना हनुमान चालीसा के भी रचियता थे ...!! * उत्तर प्रदेश में चित्रकूट के राजापुर में तुलसीदास की जन्मस्थली में आज भी उनके हाथ का लिखा राम चरित मानस ग्रंथ का एक भाग अयोध्या कांड सुरक्षित है। इसके दर्शन के लिये पूरी दुनिया से लोग आते हैं। तुलसीदास की 11वीं पीढी के लोग एक धरोहर की तरह संजो कर रखे हुये हैं। कभी अपने परिवार से ही उपेक्षित कर दिये गये अबोध राम बोला आज पूरे विश्व में भगवान की तरह पूजे जाते हैं। *  संत तुलसीदास चित्रकूट