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बेटी

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Roaming Journalist अगर बेटा वारस है, तो बेटी पारस है l अगर बेटा वंश है, तो बेटी अंश है l अगर बेटा आन है, तो बेटी शान है l अगर बेटा तन है, तो बेटी मन है l अगर बेटा मान है, तो बेटी गुमान है l .... अगर बेटा संस्कार, तो बेटी संस्कृति है l अगर बेटा आग है, तो बेटी बाग़ है l अगर बेटा दवा है, तो बेटी दुआ है l अगर बेटा भाग्य है, तो बेटी विधाता है l अगर बेटा शब्द है, तो बेटी अर्थ है l अगर बेटा गीत है, तो बेटी संगीत है l Komal Shrivastava अगर बेटा वंश है, तो बेटी अंश है l अगर बेटा तन है, तो बेटी मन है अगर बेटा आन है, तो बेटी शान है l अगर बेटा मान है, तो बेटी गुमान है l अगर बेटा संस्कार, तो बेटी संस्कृति है Komal Shrivastava Maa Durge, Maa Ambe, Maa Jagdambe, Maa Bhawani, Maa Sheetla, Maa Vaishnao, Maa Chandi, Mata Rani meri aur apki manokamna puri karey.. JAI MATA DI. Kamlesh Kumar Dwivedi जा बेटी जगमग तू कर दे , घर आँगन हर कोना , कहीं बना दे सीता प्यारी , कहीं राम भरत व् कान्हा , जग जननी तू जीवन ज्योति , जितने नामकरण सब कम हैं , सभी कर्म या सभी धरम हों ,

भगत सिंह की आशंका सही निकली ... मुक्त कंठ से बोल .. वन्दे मातरम ..!

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- अरविन्द सिसोदिया         भगत सिंह के एक भाई की मृत्यु हो गई थी , दो भाई कुलवीर सिंह और कुलतार सिंह तथा तीन बहनें अमर कौर , सुमित्रा कौर और शकुंतला कौर थीं | उन्हें अपनी माँ से बहुत प्यार था | उन्होंने एक बार अपनी माँ को एक पत्र लिखा " माँ , मुझे इस बात में बिलकुल भी शक नहीं की एक दिन मेरा देश आजाद होगा | मगर मुझे दर है की 'गोरे साहबों'  की खाली हुई कुर्सियों पे काले  / भूरे साहब बैठनें जा रहे हैं |  " उनका शक सही निकला ,आज भारत का सिंहासन चंद काले अंग्रेजों और उनकी हाँ में हाँ मिलाने वाले राजनैतिज्ञों के हाथ की काठ पुतली बन चूका है |       लोग कहते हैं की भगत सिंह नास्तिक थे मगर सच यह था की वे आस्तिक थे | अनावश्यक कर्मकांड के लिए उनके पास समय जरुर नहीं था | जब उनके वकील प्राणनाथ मेहता नें फांसी वाले दिन पूछा था कि उनकी अंतिम इच्छा क्या है तो भगत सिंह ने जबाव  था कि ' में दुबारा इस देश में पैदा होना चाहता हूँ |' अर्थात वे पुर्न जन्म में विश्वास रखते थे | इसके अतिरिक्त वे युवावस्था में श्री कृष्ण विजय नाटक का मंचन भी किया करते थे , जो अंग्रेजों के खिलाफ बनाय

भगत सिंह का जन्म दिन २८ सितंबर.....

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*भगत सिंह का जन्म २८ सितंबर, १९०७,शनिवार सुबह ९ बजे लायलपुर ज़िले के बंगा गाँव (चक नम्बर १०५ जो अब पाकिस्तान में है) में हुआ था। हालांकि उनका पैतृक निवास आज भी भारतीय पंजाब के नवाँशहर ज़िले के खटकड़कलाँ गाँव में स्थित है। उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था। यह एक सिख परिवार था | **अमृतसर में १३ अप्रैल, १९१९ को हुए जलियाँवाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह की सोच पर गहरा प्रभाव डाला था। लाहौर के नेशनल कॉलेज़ की पढ़ाई छोड़कर भगत सिंह हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन ऐसोसिएशन नाम के एक क्रान्तिकारी संगठन से जुड़ गए थे। भगत सिंह ने भारत की आज़ादी के लिए नौजवान भारत सभा की स्थापना की थी। इस संगठन का उद्देश्य ‘सेवा,त्याग और पीड़ा झेल सकने वाले’ नवयुवक तैयार करना था। ***भगत सिंह ने राजगुरु के साथ मिलकर १७ दिसम्बर १९२८ को लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक रहे अंग्रेज़ अधिकारी जे०पी० सांडर्स को मारा था। इस कार्रवाई में क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आज़ाद ने भी उनकी सहायता की थी। ****क्रान्तिकारी साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर भगत सिंह ने अलीपुर रोड पर स्थित दिल्ली की तत्कालीन