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सितंबर 29, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

राष्ट्रहित के लिए : राष्ट्रपति का निर्वाचन जनता करे

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अरविन्द सीसौदिया हमारी पद्यति प्रतिनिधि पद्यति होनें से , जनता  और शासन के बीच  में जन प्रतिनिधि नामक एक बिचोलिय आ खड़ा हुआ .., यह कभी बहुत देश भक्त ही था.., मगर अभी हम इसे दयानिधि मारन और ए राजा के रूप में समर्थन की वसूली करते हुए देख रहे हैं .., अब तो पंच  भी बिकते देखे गये हैं .. जन प्रतिनिधि स्तर पर आई गिरावट का सुधार सीधे जनता के द्वारा प्रमुख पद को चुनने में ही है | यदि सरपंच की ही तरह या महापौर की ही तरह जनता को मुख्यमंत्री या राज्यपाल और प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति का चुनाव का अधिकार मिल जाये तो काफी समस्या का हल निकल आये और ये बेशर्म बिका बिकी समाप्त हो जाये.....   हमारी स्वतंत्रता के लिये राष्ट्रपति पद का कितना महत्व है, यह समझने के लिए हमें 25 जून 1975 की रात्रि 11 बजकर 45 मिनिट पर, तत्कालीन राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमति इन्दिरा गांधी के कहने पर, लगाये गये आपातकाल को समझना होगा। जिसमें राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 352 के अन्तर्गत आंतरिक आपातकाल लगा दिया था। जेलों में डाले गये निर्दोषों को न्यायालय मुक्त न कर पाये, इसलिये कि ‘मीसा

प्रथम युद्ध विजेता प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री

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- अरविन्द सीसौदिया , कोटा, राजस्थान । हम महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर को मनाते हैं और उसमें भारत के प्रथम युद्ध विजेता प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री जी का व्यक्तित्व दवा बैठते है। याद रहे भारत की आजादी के बाद पाकिस्तान को सीधे युद्ध के मैदान में हरानें का गौरव हमें लम्बे समय के इंतजार के बाद मिला । इससे पहले हम हारने वाले लोग मानें जाते थे। 2 अक्टूबर को हमें शास्त्रीजी की जयंती भी व्यापक और उत्साह पूर्वक मनानी चाहिये। एक प्रकार से विजय दिवस के रूप में मनानी चाहिए..! ------- लालबहादुर शास्त्री (2 अक्तूबर, 1904 - 11 जनवरी, 1966),भारत के दूसरे स्थायी प्रधानमंत्री थे । वह 1963-1965 के बीच भारत के प्रधान मन्त्री थे। शास्त्री का जन्म 1904 में मुगलसराय, उत्तर प्रदेश में लाल बहादुर श्रीवास्तव के रुप में हुआ था। उनके पिता शारदा प्रसाद एक गरीब शिक्षक थे, जो बाद में राजस्व कार्यालय में लिपिक (क्लर्क) बने। भारत की स्वतंत्रता के पश्चात शास्त्रीजी को उत्तर प्रदेश के संसदीय सचिव के रुप में नियुक्त किया गया था। वो गोविंद बल्लभ पंत के मुख्यमंत्री के कार्यकाल में प्रहरी एवं यातायात मंत्री ब