कभी दुर्गा बनके कभी काली बनके


माता का भजन - १

कभी दुर्गा बनके कभी काली बनके
चली आना मैया जी चली आना

तुम कन्या रूप में आना, तुम दुर्गा रूप में आना
सिंह साथ लेके, त्रिशूल हाथ लेके,
चली आना मैया जी चली आना ................

तुम काली रूप में आना, तुम तारा रूप में आना
खप्पर हाथ लेके, शांति साथ लेके,
चली आना मैया जी चली आना ................

तुम लक्ष्मी रूप में आना, तुम माया रूप में आना
उल्लू साथ लेके, दौलत हाथ लेके,
चली आना मैया जी चली आना ................

तुम शीतला रूप में नाना, तुम ठन्डे रूप में आना
झाड़ू हाथ लेके, गदहा साथ लेके,
चली आना मैया जी चली आना ................

तुम सरस्वती रूप में आना, तुम विध्या रूप में आना
हंस साथ लेके, वीणा हाथ लेके,
चली आना मैया जी चली आना ...............

टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

God is within us and also beyond us — Arvind Sisodia

भारत रत्न बाबा साहब की बात कांग्रेस मानती तो भारत अखण्ड और तिब्बत स्वतंत्र रहता - अरविन्द सिसोदिया

कविता - पूरे ब्रह्माण्ड में एक अकेली, अपनी धरती माता है

क्रांतिपुत्र अमर शहीद मंगल पाण्डे : मे सौ जन्मों तक भारतमाता के लिये अपना बलिदान करता रहूं

राजस्थान प्रदेश में अब 48 संगठनात्मक जिले बनें

ईश्वर तो हमारे भीतर भी है और बाहर भी है - अरविन्द सिसोदिया

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान