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महाराणा प्रताप

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महाराणा प्रताप महाराणा प्रताप वीर विनोद के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ला 13 संवत 1596 विक्रम अर्थात 31 मई 1539 है । नैनसी के अनुसार  4 मई 1540 और कर्नल टाड  के अनुसार 9 मई 1549 है ...... (जन्म- 9 मई, 1540, राजस्थान, कुम्भलगढ़; मृत्यु- 19 जनवरी, 1597) उदयपुर, मेवाड़ में शिशोदिया राजवंश के राजा थे। वह तिथि धन्य है, जब मेवाड़ की शौर्य-भूमि पर मेवाड़-मुकुट मणि प्रताप का जन्म हुआ। उनका नाम इतिहास में वीरता और दृढ प्रण के लिये अमर है। जीवन परिचय राजस्थान के कुम्भलगढ़ में प्रताप का जन्म महाराणा उदयसिंह एवं माता राणी जीवत कँवर (  जैवंता  बाई    ) के घर हुआ था। बप्पा रावल के कुल की अक्षुण्ण कीर्ति की उज्ज्वल पताका, राजपूती आन एवं शौर्य का वह पुण्य प्रतीक, राणा साँगा का वह पावन पौत्र जब (वि. सं. 1628 फाल्गुन शुक्ल 15) तारीख 1 मार्च सन् 1573 को सिंहासनासीन हुआ। शौर्य की मूर्ति प्रताप एकाकी थे। अपनी प्रजा के साथ और एकाकी ही उन्होंने जो धर्म एवं स्वाधीनता के लिये ज्योतिर्मय बलिदान किया, वह विश्व में सदा परतन्त्रता और अधर्म के विरुद्ध संग्राम करनेवाले, मानधनी, गौरवशील मानवों के लिये मशाल सिद्ध

10 मई, 1857 की क्रांति की वर्षगांठ के अवसर पर : जनक्रांति: 1857

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10 मई, 1857 की क्रांति की वर्षगांठ के अवसर पर history 1857 india freedom struggle velu   जनक्रांति: 1857  - अरविंद सीसौदिया  उस दिन देखा था तारों ने,  हिन्दुस्तानी विश्वास नया, जिस दिन लिखा था रणवीरों ने,  खूं से अपना इतिहास नया।।     : गोपाल प्रसाद व्यास ईस्ट इंडिया कम्पनी की फौजी हुकूमत के विस्तारवादी मंसूबों के विरूद्ध 1857 की जनक्रांति को वीर विनायक दामोदर सावरकर ने ‘‘भारतीय स्वतंत्रता का युद्ध’’ नामक पुस्तक लिख कर प्रथम स्वतंत्रता संग्राम नाम दिया है, तो अशोक मेहता ने ‘‘1857 का महान विद्रोह’’ पुस्तक में इस संघर्ष की राष्ट्रीय विशेषताओं को उजागर किया है। मेरा मत सिर्फ इतना है कि भारतीय प्रायद्वीप पर दो हजार वर्षों से चल रहे पश्चिमी दिशा के हमलों के विरूद्ध इस हिन्दुत्व की माटी के सपूतों की संघर्ष यात्रा का एक महत्वपूर्ण पुरूषार्थ 1857 भी था। इस संघर्ष ने हिन्दुत्व के स्वाभिमान के सामने ब्रिटिश कम्पनी सरकार को झुकाया था। हिमालय की हिम नदियों के तटों पर उपजी हिन्दू मानव सभ्यता की यह संस्कृति रही है कि वह शांतिपूर्ण शिष्टाचारमय जीवन को जिये,जीने दे और उसे स