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मनुष्य को देवत्व की ओर ले जाने वाली शिक्षा चाहिए -भैयाजी जोशी

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                         राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ का 51वां अधिवेशन   मनुष्य को देवत्व की ओर ले जाने वाली शिक्षा चाहिए  -भैयाजी जोशी, सरकार्यवाह, रा.स्व.संघ                                          अच्छे नागरिक बनने के लिए शिक्षा की उपयोगिता                                               -वी.एस.कोकजे, पूर्व राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश            राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री सुरेशराव उपाख्य भैयाजी जोशी ने कहा कि परिवर्तन अच्छा और बुरा दोनों तरह का होता है। सकारात्मक परिवर्तन जहां उत्थान की ओर ले जाता है, वहीं नकारात्मक परिवर्तन पतन की ओर। हमें शिक्षा में सकारात्मक परिवर्तन करना होगा। वे गत दिनों जोधपुर (राजस्थान) में राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) के दो दिवसीय 51वें प्रांतीय अधिवेशन के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो. ए.के. गुप्ता ने स्वागत उद्बोधन दिया। शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री श्री एम.एम. रंगा ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा अध्यक्ष डा. ग्यारसीलाल जाट ने शिक

शिवताण्डवस्तोत्रम् : मोक्ष दायनी महामन्त्र

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 मोक्ष दायनी महा मन्त्र  शिवताण्डवस्तोत्रम् । जटारूप अटवी वन निकसलि जाह्नवीक पावन धारा गरदनि अवलम्बित फणिमाला ताण्डव नृत्य प्रचण्ड परा, डिमिक डिमिक डिम डमरु बाजे स्वर लहरी अनुगुंज करे, करू कल्याण हमर शिवशंकर जयशिव जयशिव हरे हरे।1। जटा कड़ाही मध्य तरंगित गंग सुशोभित शीश जनिक, धह-धह ज्वाल ललाटक मध्ये राजित बालक शोम तनिक, शुचि शरीर सुन्दर शशि शेखर सदा हृदय अनुराग भरे करु कल्याण हमर शिवशंकर जयशिव जयशिव हरे हरे।2। धन-धन गिरि तनया विलास निर्लिप्त निरासक्ते योगी, हुलसित लखि चहुँदिशि प्रकाश निज शिर-भूषण जन-उपयोगी, सतत् कृपा दृग पाबि दिगम्बर कष्ट हरे आमोद भरे, करु कल्याण हमर शिव शंकर जयशिव जयशिव हरे-हरे ।3। जटाजूट आवर्तित फणि-मणि कुंकुम रागालेप प्रभा, आलोकित चहुँ दिशा हस्ति चर्माम्बर पहिरन हरक सदा, ताहि विलक्षण भूतनाथ मे मन विनोद सदिकाल करे, करू कल्याण हमर शिव शंकर जयशिव जयशिव हरे हरे।4। इन्द्रादिक मस्तक आवर्तित पुष्प पराग चरण-पनही, नागराज केर हार निबद्धित जटा शिखर शशि टा धनही, चिर संपत्ति घटय नहि कहियो रिक्त हमर भंडार भरे, करु कल्याण हमर शिव शंकर जयशिव जयशिव हरे-हरे ।5। अग्नि प्रज्वलित