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कठोर परिश्रम का नाम दीनदयाल उपाध्याय होता है - अरविन्द सिसोदिया ( कोटा )

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कठोर परिश्रम का नाम दीनदयाल उपाध्याय होता है                          - अरविन्द सिसोदिया ( कोटा )       आज भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस का स्थान लेकर भारत की केन्द्र सरकार और अनेकों राज्यों की सरकारों के साथ - साथ, पालिका  एवं पंचायती राज और सहकारी क्षैत्र में निर्वाचन के माध्यम से सत्ता में है। देश की आजादी के 50 साल बाद तक भी कोई यह विश्वास नहीं कर पाता था कि भाजपा कभी अपने बलबूते स्पष्ट बहूमत से केन्द्र की सरकार में आ सकती है। मगर इसके बावजूद आज वह अपने बलबूत स्पष्ट बहूमत से सत्ता में है , इसका मूल कारण, इस पार्टी को मिले विचार थे। ये विचार घोर परिश्रमशील संगठन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से मिले, तो उन्हे भारतीय राजनीति में संघ के ही प्रचारक रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने कठोरश्रम साध्य जीवन जीते हुये स्थापित किये। यही कारण है कि भाजपा को स्पष्ट बहूमत से सत्ता की कुर्सी पर भी कठोरतम परिश्रम करने वाले प्रचारक रहे नरेन्द्र मोदी ने पहुंचाया।  कुल मिला कर भाजपा की पूंजी कठोर परिश्रम और सही दिशा वाली सोच है। जो कि उन्हे संघ और पंडित दीनदयाल उपाध्याय से पैतृक गुण के रूप में मिल

हत्यारिन राजनीति : मदनलाल वर्मा 'क्रान्त'

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http://krantmlverma.blogspot.in हत्यारिन राजनीति -  मदनलाल वर्मा 'क्रान्त' यह कविता मैंने सन १९८४ में भारत की प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गान्धी की हत्या के पश्चात लिखी थी इसे लखनऊ से राष्ट्रधर्म में श्रीयुत वचनेश त्रिपाठी ने और ग्वालियर से स्वदेश में श्रीयुत राजेन्द्र शर्मा ने प्रकाशित करने का साहस किया था, अन्य समाचार पत्रों ने डर के मारे इसे छापने से ही मना कर दिया था । स्वाधीन देश की राजनीति बतला कब तक,कुर्सी की खातिर किस-किस को मरवाएगी? सिलसिला राजनीतिक हत्याओं का आखिर, इस लोकतन्त्र में कब तक और चलाएगी? जब रहा देश परतन्त्र, असंख्य शहीदों ने,देकर अपना बलिदान इसे आज़ाद किया, पैसे के बल पर कांग्रेस में घुस आये, लोगों ने इसको अपने लिए गुलाम किया. साजिश का पहले-पहल शिकार सुभाष हुए, जिनको विमान-दुर्घटना करके मरवाया. फिर मत-विभेद के कारण गान्धी का शरीर, गोलियाँ दागकर किसने छलनी करवाया? किस तरह रूस में शास्त्रीजी को दिया जहर, जिनकी क्षमताओं का युग को आभास नहीं, यदि वे जीवित रहते तो इतना निश्चित था,'नेहरू-युग' का ढूँढे मिलता इतिहास नहीं. कश्मीर-जेल