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फ़रवरी 15, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी और उपाध्यक्ष राहुल गाँधी देश से मांफी मांगे - अमित शाह

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क्या यही है कांग्रेस की राष्ट्रभक्ति की नई परिभाषा ? - अमित शाह , राष्ट्रिय अध्यक्ष भाजपा केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की सफलता से निराशा और हताश कांग्रेस गहरे अवसाद से ग्रस्त है। पार्टी और उसके नेता यह समझ नहीं पा रहे हैं कि इस अवसाद की अवस्था में वो देश के समक्ष कैसे एक जिम्मेदार राजनीतिक दल की भूमिका निभायें। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी तो इस हताशा में देश विरोधी और देश हित का अंतर तक नहीं समझ पा रहे हैं। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू ) में जो कुछ भी हुआ उसे कहीं से भी देश हित के दायरे में रखकर नहीं देखा जा सकता है। देश के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में देश विरोधी नारे लगें और आतंकवादियों की खुली हिमायत हो, इसे कोई भी नागरिक स्वीकार नहीं कर सकता। लेकिन कांग्रेस उपाध्यक्ष और उनकी पार्टी के अन्य नेताओं ने जेएनयू जाकर जो बयान दिए हैं उसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनकी सोच में राष्ट्रहित जैसी भावना का कोई स्थान नहीं है। जेएनयू में वामपंथी विचारधारा से प्रेरित कुछ मुट्ठीभर छात्रों ने निम्नलिखित राष्ट्रविरोधी नारे लगाए: “पाकिस्तान जिंदाबाद” “

देशद्रोही गतिविधियों को सहन नहीं किया जा सकता : अमित शाह

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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा दिए गए प्रेस टिप्पणी के मुख्य अंश  देश की जमीन पर या इसके किसी भी हिस्से पर इस तरह की देशद्रोही गतिविधियों को सहन नहीं किया जा सकता: अमित शाह ********** देश की जनता यह जानना चाहती है कि आखिर अभिव्यक्ति की आजादी की कांग्रेस की व्याख्या क्या है: अमित शाह ********** देश की जनता यह जानना चाहती है कि कांग्रेस देश के सर्वोच्च अदालत के फैसले को मानती है या नहीं: अमित शाह ********** भारतीय जनता पार्टी देश की रक्षा करने वाले शहीद जवानों और उनके परिवारों के साथ खड़ी है और हर राष्ट्रभक्त व्यक्ति एवं संस्थाओं को देश की सुरक्षा करनेवाले जवानों के संवेदनाओं की चिंता करना चाहिए: अमित शाह ********** अगर कांग्रेस उपाध्यक्ष, अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर इन राष्ट्रविरोधी नारों कासमर्थन कर रहे हैं तो इससे बड़ा देशद्रोह का सबूत और क्या हो सकता है: अमित शाह ********** आज भी कांग्रेस के प्रवक्ता आतंकी अफज़ल गुरु को अफज़ल गुरु 'जी' कहकर सम्बोधित कर रहे हैं: अमित शाह ********** क्या कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी द्वारा जेएनयू

सनातन धर्म की रक्षा कर रही मोदी सरकार : अमित शाह

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सनातन धर्म की रक्षा कर रही मोदी सरकार : अमित शाह Mon, 08 Feb 2016 लखनऊ। मथुरा में धर्म के मंच से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सरकार की उपलब्धियों में धर्म और अध्यात्म को भी जोड़ दिया। सोमवार को वृंदावन में प्रियाकांतजू मंदिर के महोत्सव में पहुंचे शाह ने कहा कि मोदी सरकार दुनिया भर में भारत के वैभव का तो परचम फहरा ही रही है, यहां के अध्यात्म का प्रभावशाली संदेश देकर सनातन धर्म की रक्षा भी कर रही है। शाह ने कहा कि गुजरात और वृंदावन के बीच अटूट नाता है। यह रिश्ता भगवान श्रीकृष्ण के जरिए बना था। वृंदावन के प्रति यह दुनिया भर के लोगों की आस्था ही है कि श्रीकृष्ण के जन्मदिवस पर बगैर किसी निमंत्रण के ही दौड़े चले आते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में जब भौतिकवादी रास्ते रुक जाते हैं, तब भगवान श्रीकृष्ण के गीता में दिए संदेश ही रास्ता दिखाते हैं। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि जनता के समर्थन से केंद्र में ऐसी सरकार आ गई है, जो दुनिया में अध्यात्म का संदेश भी दे रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय योग का प्रभावशाली वर्णन किया, जिससे दुनिया भर के

"भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महत्वपूर्ण योगदान" : ज्ञानेंद्र नाथ बरतरिया

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"भारत में आरएसएस के 10  योगदान" ( ज्ञानेंद्र नाथ बरतरिया वरिष्ठ पत्रकार ) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 90 साल का हो चुका है. 1925 में दशहरे के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी.सांप्रदायिक हिंदूवादी, फ़ासीवादी और इसी तरह के अन्य शब्दों से पुकारे जाने वाले संगठन के तौर पर आलोचना सहते और सुनते हुए भी संघ को कम से कम 7-8 दशक हो चुके हैं. दुनिया में शायद ही किसी संगठन की इतनी आलोचना की गई होगी. वह भी बिना किसी आधार के. संघ के ख़िलाफ़ लगा हर आरोप आख़िर में पूरी तरह कपोल-कल्पना और झूठ साबित हुआ है.कोई शक नहीं कि आज भी कई लोग संघ को इसी नेहरूवादी दृष्टि से देखते हैं.हालांकि ख़ुद नेहरू को जीते-जी अपना दृष्टि-दोष ठीक करने का एक दुखद अवसर तब मिल गया था,जब 1962 में देश पर चीन का आक्रमण हुआ था.तब देश के बाहर पंचशील और लोकतंत्र वग़ैरह आदर्शों के मसीहा जवाहरलाल न ख़ुद को संभाल पारहे थे, न देश की सीमाओं को. लेकिन संघ अपना काम कर रहा था. संघ के कुछ उल्लेखनीय कार्य 1) कश्मीर सीमा पर निगरानी, विभाजन पीड़ितों को आश्रय संघ के स्वयंसेवकों ने अक्टू